लोकसभा प्रभारी ने गौर से की मुलाकात, बोले टिकट का फैसला संसदीय बोर्ड के हाथ में

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भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर एक बार फिर लोकसभा चुनाव से पहले अलग तेवर में नजर आ रहे हैं। कांग्रेस की ओर से लोकसभा टिकट का ऑफर मिलने का दावा करने के बाद प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। एक ही दिन में गौर के बंगले पर कांग्रेस और बीजेपी नेताओं की कतार लगी रही। दोपहर लंच पर मंत्री जीतू पटवारी के बाद शाम को लोकसभा चुनाव प्रदेश प्रभारी और बीजेपी नेता स्वतंत्र देव उनसे मिलने पहुंचे। गौर से मिलने के बाद उन्होंने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मीडिया से कहा कि गौर को लोकसभा टिकट देने का फैसला पार्टी संसदीय बोर्ड करेगा। बीजेपी नेता की यह मुलाक़ात ऐसे समय हुई है, जब वह लगातार कांग्रेस नेताओं से मिल रहे हैं और कमलनाथ सरकार की तारीफ कर रहे हैं, उनके कांग्रेस में जाने की चर्चाओं के बीच यह मुलाक़ात नाराज बाबूलाल गौर को मनाने की कोशिश से जोड़ कर देखा जा रहा है|  

दरअसल, बाबूलाल गौर ने लोकसभा चुनाव की दावेदारी को लेकर अभी से ताल ठोकना शुरू कर दी है। एक तरफ कांग्रेस गौर पर डोरो डाल रही है तो वहीं गैर भी बीजेपी पर दबाव की राजनीति कर रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष राकेश सिंह उनका नाम लिए बिना ही अनुशासनहीनता को लेकर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। वहीं, शुक्रवार  को दिन भर गौर के बंगले पर नेताओं के आने जाने का घटनाक्रम चलता रहा। दिन में मंत्री जीतू पटवारी और फिर देर शाम बीजेपी के प्रदेश प्रभारी स्वतंत्र देव बाबूलाल गौर के घर पहुंचे। गौर के कांग्रेस में जाने की अटकलों पर विराम लगाने के लिए स्वतंत्र देव पहुंचे थे।  बाद में जाते वक्त मीडिया से कह गए कि गौर साहब हमारे लिए सम्माननीय हैं. उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट देने पर संसदीय बोर्ड विचार करेगा।

गौर साबह के लिए पार्टी मां की तरह

उन्होंने गौर से मिलने के बाद कहा कि वह पार्टी को अपनी मां समझते हैं। वो हमारे परिवार के पालनहार हैं। पार्टी के रवैए से नाराज़ चल रहे बाबूलाल गौर ने भी स्वतंत्र देव को सलाह दे दी। उन्होंने कहा पार्टी नेताओं को ज़िले ज़िले जाना चाहिए. कार्यकर्ताओं से मिलना और उनकी बात सुनना चाहिए। असल में गौर विधानसभा चुनाव से ही चर्चा में बने हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी द्वारा उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। बाद में उन्होंने जब सख्त तेवर दिखाते हुए अपनी बहु के लिए टिकट देने के लिए दबाव बनाया था। लेकिन पार्टी का जो रवैया उनके प्रति रहा उससे वह खफा चल रहे हैं। नतीजे आने से पहले ही उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें वह वर्तमान मंत्री आरिफ अकील से मुलाकात कर उन्हें कांग्रेस की जीत और मंत्री बनने की बधाई देते नजर आ रहे थे। वहीं इसके बाद भी गौर लगातार पार्टी पर वरिष्ठ नेताओं को उपेक्षा का आरोप लगाते हुए लोकसभा चुनाव में नुकसान भुगतने की नसीहत दे रहे हैं| गौर के इस रुख से पार्टी में बेचैनी बढ़ गई है, क्यूंकि अगर गौर कांग्रेस का ऑफर स्वीकार करते हैं तो न सिर्फ भोपाल बल्कि अन्य सीटों पर भी पार्टी को नुकसान हो सकता है, वहीं गौर से जुड़े उनके समर्थक भी पाला बदल सकते हैं| क्यूंकि गौर बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं और मध्य प्रदेश में लम्बे समय से राजनीति करते आ रहे हैं, जिससे उनके समर्थकों की संख्या भी अधिक है|