भाजपा में बगावत से मची उथल पुथल, डमैज कंट्रोल में जुटे नेता

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भोपाल। विधानसभा चुनाव की तरह भाजपा में लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों का भी पार्टी नेताओं ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। जबकि कुछ सीटों पर प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से नाराज नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है या फिर दूसरे दलों के संपर्क में हैं। भाजपा में असंतुष्ठ नेताओं को मनाने के लिए बड़े नेेताओं को मैदान में उतारा गया है।

भाजपा में सबसे ज्यादा विरोध सिंगरौली लोकसभा प्रत्याशी रिति पाठक का हो रहा है। कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद पार्टी ने रिति को टिकट दिया। इससे नाराज होकर सिंगरौेली जिलाध्यक्ष ने इस्तीफा सौंपा, जबकि रामलल्लूसिंह वैश्य ने भी खुलकर विरोध किया। पार्टी के प्रदेश नेताओं ने असंतुष्ठों को समझाया है। जिला अध्यक्ष ने इस्तीफा वापस ले लिया है| वहीं भिंड से टिकट नहीं मिलने पर मुरैना महापौर अशोक अर्गल ने भी खुलकर नाराजगी जाहिर की है। सूत्रों ने बताया कि अर्गल कांग्रेस के संपर्क में है। स्थानीय स्तर पर अर्गल को मनाने की कोशिशें जारी है। वही टिकट कटने से नाराज भागीरथ प्रसाद ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा जाहिर की है। उन्होंने स्थानीय मतदाताओं का आभार माना है, जबकि भाजपा संगठन पर सवाल उठाए हैं।  मुरैना से टिकट काटे जाने के बाद सांसद अनूप मिश्रा ने अभी मुंह नहीं खोला है, लेकिन वे नाराज बताए जा रहे हैं। वे कांग्रेस के संपर्क में हैं और उन्हें ग्वालियर से टिकट मिलने की उम्मीद है। 


ज्ञान सिंह ने किया निर्दलीय लड़ने का ऐलान, पार्टी में हड़कंप 

चुनावी समय में शहडोल सीट की भी सबसे ज्यादा चर्चा है| क्यूंकि कभी बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली प्रत्याशी को भाजपा ने अब अपना प्रत्याशी बनाया है| जिसके बाद यहां नाराजगी उभर कर सामने आई है| शहडोल से वर्तमान सांसद ज्ञान सिंह ने टिकट कटने के बाद पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंंने मीडिया से चर्चा के दौरान निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंंने कहा कि 2016 में हुए उपचुनाव में उन्होंने जिस कांग्रेस उम्मीदवार को हराया पार्टी ने उसी को मेरा टिकट काटकर प्र��्याशी घोषित किया है। इसलिए मैं अब निर्दलीय चुनाव लडूंगा। ज्ञान सिंह की नाराजगी और निर्दलीय लड़ने के ऐलान के बाद भाजपा में हड़कंप मच गया है|  प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत ने उनसे फ़ोन पर चर्चा की है, वहीं हिमाद्रि भी उन्हें मानाने के प्रयास में है| तीन बार मंत्री पद पर रहने वाले ज्ञान सिंह शहडोल संभाग में कभी कोई चुनाव नहीं हारे।  ज्ञान सिंह ने कहा कि जब वे लोकसभा का उपचुनाव नहीं लड़ना चाह रहे थे तब उन्हें मंत्री पद से हटाकर जबरन लोकसभा का चुनाव लड़ाया गया और अब जब वे लोकसभा का चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं तो पार्टी ने उनसे पूछा तक नहीं। 

यहां भी विरोध 

भाजपा में मंदसौर से सुधीर गुप्ता को फिर से प्रत्याशी बनाया गया है। जबकि किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वंशीलाल गुर्जर खुद दावेदारी कर रहे थे। टिकट तय होने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है। वहीं इधर भाजपा राजगढ़ में मौजूदा सांसद रोडमल का टिकट काटने को लेकर कार्यकर्ता सड़क पर हैं, जबकि विदिशा से पूर्व मुख्यमंत्री की पत्नी साधना सिंह को टिकट देने का उनके परिवार में ही विरोध हो रहा है। 

 

कांग्रेस में भी विरोध 

कांग्रेस में भी टिकट का विरोध हो रहा है। खंडवा से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव को कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने का विरोध हो रहा है। स्थानीय नेताओं ने इसका खुलकर विरोध किया है। निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा अपनी पत्नी के लिए टिकट मांग रहे हैं| वे यादव का खुलकर विरोध कर रहे हैं और अपनी पत्नी को निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं| वहीं इंदौर में प्रत्याशी चयन को लेकर जबर्दस्ती खींचतान मची है।