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मध्यप्रदेश में लव जिहाद के मामलों की जांच के लिए SIT का गठन, वरिष्ठ IPS अभय सिंह को मिली कमान

Written by:Shruty Kushwaha
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राज्य सरकार ने लव जिहाद, दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों की जांच के लिए स्टेट SIT गठित की है। अभय सिंह की अगुवाई में यह टीम राज्यभर में ऐसे मामलों की निगरानी और कार्रवाई करेगी। टीम में चार आईपीएस अधिकारी होंगे जो संदिग्ध घटनाओं की पहचान, साइबर जांच और अंतरराज्यीय नेटवर्क की पड़ताल करेंगे।
मध्यप्रदेश में लव जिहाद के मामलों की जांच के लिए SIT का गठन, वरिष्ठ IPS अभय सिंह को मिली कमान

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MP State SIT Formed to Investigate Love Jihad : मध्य प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। स्टेट एसआईटी लव जिहाद के साथ दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों की जाँच भी करेगी। पुलिस मुख्यालय ने सभी संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों, उप पुलिस महानिरीक्षकों और अन्य एजेंसियों को SIT को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का निर्देश दिया है।

इस समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अभय सिंह करेंगे, और इसमें कुल चार आईपीएस अधिकारी शामिल होंगे। SIT का मुख्य उद्देश्य इन मामलों की निगरानी, समन्वय और गहन जांच करना है।

लव जिहाद के मामलों की जांच के लिए SIT गठित

एमपी में लव जिहाद, दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों की जाँच के लिए गठित स्टेट SIT का गठन किया गया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा इसकी कमान आईपीएस अभय सिंह को सौंपी गई है। दल में कुल चार आईपीएस अधिकारी रहेंगे।  यह निर्णय राज्य में हाल ही में सामने आए कुछ मामलों के बाद लिया गया है, जहां अंतरधार्मिक विवाहों के प्रयासों के दौरान हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप की घटनाएं हुई हैं। जैसे कि इसी साल फरवरी में में भोपाल और रीवा में ऐसे दो मामलों में अंतरधार्मिक जोड़ों को अदालत परिसर में ही हिंसा का सामना करना पड़ा था।

एसआईटी को सौंपे गए कार्य

  • राज्य के विभिन्न जिलों में ऐसी घटनाओं की पहचान करना, जहां महिलाओं और बालिकाओं को प्रेमजाल, धोखे या धमकी के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया हो।
  • इन घटनाओं में संलिप्त व्यक्तियों, संगठनों या गिरोहों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना।
  • किसी अंतरराज्यीय या विदेशी नेटवर्क की संलिप्तता की जांच करना।
  • साइबर और डिजिटल माध्यमों का विश्लेषण कर साक्ष्य एकत्र करना।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक उपाय और सिफारिशें प्रस्तुत करना।
  • प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस महानिरीक्षक रेंज, पुलिस महानिरीक्षक जोन, महिला एवं बाल सुरक्षा इकाइयों, विशेष शाखा तथा अन्य संबद्ध एजेंसियों से समन्वय स्थापित करना।
Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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