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भोपाल। अलतमश जलाल। 

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 28 नवंबर को वोटिंग होना है। मतदान से पहले भाजपा के दिग्गज चुनावी रण में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। लेकिन विरोधियोंं से कहीं अधिक भाजपा के महारथियों को अपनों से लोहा लेने पड़ रहा है। राजनीति के जानकारों का कहना है इस बार भाजपा को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल रही है। इसके साथ ही टिकट नहीं मिलने से नाराज और बागी नेताओं से भी खतरा बना हुआ है। जिससे 15 कैबिनेट मंत्रियों पर हार की तलवार लटक रही है। 

जानकारी के अनुसार इस बार शिवराज के मंत्रियों को अपने ही क्षेत्र में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इन मंत्रियों को या तो कांग्रेस के प्रत्याशियों से टक्कर मिल रही है या फिर अपनी ही पार्टी के बागियों से। जिस वजह से कई सीटों पर इस बार त्रिकोणीय समीकरण बन गया है। कैबिनेट मंत्री जयंत मलैया, रजेंद्र शुक्ला, जयभान सिंह पवैया और रुस्तम सिंह अपनी जीत को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस बार की राह आसान नजर नहीं आ रही। पिछले विधानसभा चुनाव में भी कई मंत्रियों को चुनाव नतीजों ने शर्मसार कर दिया था। 

इन मंत्रियों के लिए चुनौती

स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, खान मंत्री राजेंद्र शुक्ला, नारायण सिंह कुशवाह, वित्त मंत्री जयंत मलैया, गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह, कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, लोक निर्माण विभाग मंत्री रामपाल सिंह, राजस्व मंत्री उमा शंकर गुप्ता, समान्य प्रशासन मंत्री लालसिंह आर्य, पर्यटन मंत्री सुरेंद्र पटवा, टेक्निकल शिक्षा मंत्री दीपक जोशी, राज्य मंत्री बालाकृष्णा पाटीदार, मंत्री ललीता यादव, मेडिकल शिक्षा मंत्री शरद जैन। 

कौन दे रहा किसे टक्कर

-हेल्थ मिनिस्टर रुस्तम सिंह को इस बार मुरैना में कड़ी टक्कर मिल रही है। कांग्रेस ने उनके खिलाफ रघुराज सिंह कंसाना को उतारा है। उनके अलावा दिमनी से बीएसपी विधायक बलबीर सिंह डंडोटिया और उनके रिश्तेदार रामप्रकाश राजौरिया आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भी मैदान में डटे हैं। कंसाना को इस बार गुर्जर समुदाय का समर्थन मिल रहा है। सिंह को इस बात चिंता सता रही है कि एसटी और मुस्लिम समुदाय के मतदाता कहीं कांग्रेस को समर्थन न दें। 

-जयभान सिंह पवैया इस बार ग्वालियर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने कांग्रेस के प्रद्युमन सिंह तोमर हैं। पवैया अपने खराब व्यवहार के कारण जनता में काफी नपसंद किए जा रहे हैं। जबकि तोमर को लोगों का सपोर्ट मिल रहा है। वहीं, पवैया को स्थानीय नेताओं से भी समर्थन नहीं मिल रहा है। 

-ऊर्जा मंत्री नारायण सिंह कुशवहा ग्वालियर दक्षिण से चुनाव लड़ रहे हैं। उनको कांग्रेस के प्रवीण पाठक चुनौती दे रहे हैं। भाजपा से बागी हुईं समीक्षा गुप्ता के कारण उनको कमजोर माना जा रहा है। 

-वित्त मंत्री जयंत मलैया के सामने भी इस बार कड़ा मुकाबला है। वह दमोह से एक बार फिर चुनावी रण में हैं। कांग्रेस उनके खिलाफ युवा प्रत्याशी राहुल लोधी को उतारा है। लेकिन भाजपा से टिकट नहीं मिलने से बागी हुए पूर्व मंत्री कुसमरिया दमोह और पथारिया से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका बड़ा जनाधार है जो मलैया को नुकसान पहुंचा सकता है। इस सीट पर त्रिकोणीय जंग की स्थिति बन गई है। 

-गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह भी इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार सो घिरे नजर आ रहे हैं। वह खुरई विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने यहां से पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे को उतारा है। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि गृह मंत्री ने उनके क्षेत्र में काफी विकासकार्य करवाए हैं। 

-उधोग मंत्री राजेंद्र शुक्ल रीवा से 15 साल से विधायक हैं। इस बार उन्हें भाजपा से बागी हुए अभय मिश्रा टक्कर मिल रही है। राजनीति के जानकारों का कहना है इस बार शुक्ला के लिए यह चुनाव काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा। इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा में सीधा मुकाबला है। इनके अलावा भाजपा विधायक नीलम मिश्रा ने भी अपने पत्नी के समर्थन में कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। 

-हमेशा विवादित बयानों से चर्चा में रहने वाले मंत्री बिसेन इस बार मुश्किल में नजर आ रहे हैं। वह बालाघाट से मैदान में उतरे हैं। इस बार कांग्रेस ने उनके खिलाफ विश्वेश्वर भगत को टिकट दिया है। हालांकि, बीते कई सालों से बिसेन लगातार जीत हासिल कर रहे हैं। इस सीट पर सपा प्रत्याशी अनुभा मुंजारे भी कद्दावर प्रत्याशी मानी जा रही हैं। इस तरह यहां भी त्रिकोणीय मुकाबल है।