Madhya-Pradesh-Assembly-Polls-2018-Rebels-May-Queer-Saffron-Pitch

भोपाल। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कल्याणकारी योजनाओं के भरोसे भाजपा सरकार बनाने के सपने देख रही है। लेकिन इस बार बागियों को मनाने में असफल हुई बीजेपी को शहडोल, उमरिया और अनूपपूर में भारी नुकसान हो सकता है। इन तीनों जिले में भाजपा के बागी खेल बिगाड़ सकते हैं। शहडोल संभाग के तीन जिलों की आठ सीटों में से पांच पर बीजेपी और तीन पर कांग्रेस का कब्जा है। जातिवाद, एंटीइंकम्बेंसी की वजह से बागियों को क्षेत्रों में मजबूती मिल रही है।

इन आठ सीटों में से सात एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2013 के चुनाव में बीजेपी ने शहडोल और उमरिया में दो-दो सीटें और एक अनूपपुर में जीती थी। लेकिन इस बार पार्टी से टिकट नहीं मिलने से बागी नेता बीजेपी का खेल बिगाड़ सकते हैं। सिर्फ बीजेपी ही नहीं कुछ सीटों पर कांग्रेस को भी नुकसान होगा। दोलों ही दलों के पास यहां कद्दावर नेताओं की कमी है। यहां से कांग्रेस के बिसाहुलाल सिंह और बीजेपी सांसद ज्ञान सिंह ही दो बड़े नेताओं में शुमार हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का मानना है कि इस बार बीजेपी को बागियों से अधिक नुकसान होगा। 

क्या है शहडोल का समीकरण

शहडोल में तीन सीटे हैं। इनमें से ब्योहारी सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। इस बार कांग्रेस ने वर्तमान विधायक रामपाल सिंह को दोबारा मौका दिया है। इस सीट पर बीजेपी के शरद कौल, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के तेजप्रताप कौल और बसपा के रामविशाल भी अपनी किस्मत आजमा रहा हैं। टिकट विरण से बीजेपी के स्थानीय नेता विरेश सिंह रिंकू काफी नाराज हैं और उनका असंतोष कांग्रेस के लिए मददगार साबित होगा। दूसरी ओर बीजेपी की चिंता बढ़ी है। इस बार पार्टी ने वर्तमान विधायक परिमिला सिंह का टिकट काट कर जयसिंहनगर से जयसिंह मारावी को उतारा है। 

मारावी जैतपुर की वर्तमान विधायक हैं और पार्टी ने उनकी सीट बदल दी है। वहीं, उनके मुकाबले में कांग्रेस ने यहां से ध्यान सिंह मार्को को उतारा है। जैतपुर की बात की जाए तो बीजेपी ने यहां से मनिषा सिंह गोंड और कांग्रेस ने उमा धुर्वे को उतारा है। यहां बेहद रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। दोनों दलों ने महिला उम्मीदवार उतारे हैं। यहां बैगा और गौंड समुदाय के लोग निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 

क्या है उमरिया का समीकरण

उमरिया जिले की बांधवगढ़ सीट पर बीजेपी ने वर्तमान विधायक को ही मौका दिया है। बीजेपी ने शिवनारायण सिंह को मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस ने गायत्री सिंह को टिकट दिया है। शिवनारायण सिंह बीजेपी सांसद ज्ञान सिंह के बेटे हैं उन्होंने उपचुनाव में जीत हासिल की थी। उनकी जीत इस बार सुनिश्चित मानी जा रही है। यह सीट उनके पिता ज्ञान सिंह की पारंपरिक है। मानपुर से बीजेपी ने मीणा सिंह को टिकट दिया है। कांग्रेस ने यहां से ज्ञानवती सिंह को मैदान में उतार है। वह पिछला चुनाव हार चुकी हैं। कहा जाता है यहां बीजेपी का अच्छा होल्ड है। 

क्या है अनूपपुर का समीकरण

अनूपपुर जिले की कोतमा सीट अनारक्षित है। इस बार यहां से कांग्रेस ने वर्तमान विधायक  मनोज अग्रवाल को टिकट काट कर रामनरेश गर्ग को दिया है। लेकिन अग्रवाल ने यहां निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है। जबकि बीजेपी ने इस सीट से दिलिप जयसवाल को मौका दिया है। बीजेपी के राजेश सोनी ने भी यहां से निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है। बीजेपी ने पिछली बार उन्हें टिकट दिया था। दोनों ही दलों के असंतोष नेताओं के निर्दलीय चुनाव लड़ने से मुकाबला काफी रोचक हो गया है।