जनता में लोकप्रिय हुए यह ‘कलेक्टर’, पसंद आ रहे ‘इनोवेशन’

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भोपाल। प्रदेश में एक ओर जहां सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की वजह से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ कलेक्टर अपने नवाचार की वजह से लोगों के बीच खासे चर्चित हैं। ये अधिकारी लोगों की समस्याएं सुनने से लेकर सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने एवं पर्यावरण बचाने के लिए समाज को जोड़ रहे हैं। हाल ही में भोपाल, राजगढ़, ग्वालियर एवं शहडोल कलेक्टर के नवाचार सामने आए हैं। जिनकी खासी चर्चा हो रही है। 

तरुण पिथौड़े, भोपाल कलेक्टर 

पिछले महीने हुई प्रशासनिक सर्जरी में भोपाल कलेक्टर बनाए गए तरुण पिथौड़े एक बार फिर अपने नवाचा�� को लेकर चर्चा में है। उन्होंने सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने एवं प्रेरित करने के लिए सरकारी अधिकारियों को पढ़ाने का जिम्मा दिया है। पिथौड़े के अनुसार जिन अधिकारियों की रुचि पढ़ाई लिखाई में है, वे अपनी स्वैच्छा से पढ़ा सकते हैं। पिथौड़े इससे पहले राजगढ़ कलेक्टर रहते गरीब छात्रों के लिए सिविल परीक्षाओं की तैयारियों के नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था करा चुके हैं। वे ‘असंभव से संभव की ओर’ किताब भी लिख चुके हैं। जो युवाओं को प्रेरित करती है। 


ललित दाहिमा, शहडोल कलेक्टर

लोकसभा चुनाव के बाद फिर से शहडोल कलेक्टर बनाए गए ललित दाहिमा की पहचान जनसुनवाई कलेक्टर के रूप में हो गई है। वे अब गांव-गांव पहुंचकर जनसुनवाई कर लोगों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण कर रहे हैं। जिसमें जमीनों से कब्जा हटाना, सीमांकन, नामांकन, पेंशन, पट्टा, राशनकार्ड की समस्याएं शामिल हैं।


अनुराग चौधरी, ग्वालियर कलेक्टर

सिंगरौली से ग्वालियर कलेक्टर बनाए गए चौधरी कलेक्टरों में खासे चर्चा में है। उन्होंने शस्त्र लाइसेंस वालों के लिए पौधरोपण अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने पिछले महीने गाइडलाइन जारी की थी कि पौधे के साथ फोटो खिंचाने पर ही लाइसेंस दिया जाएगा। आईएएस की इस पहल को कई अधिकारियों ने भी अपनाया है और अब प्रदेश में यह एक मुहीम की तरह शुरू हो चुका है, हाई कोर्ट ने भी पर्यावरण के लिए पौधरोपण की शर्त पर जमानत देना तय किया है


निधि निवेदिता, राजगढ़ कलेक्टर

राजगढ़ कलेक्टर के रूप में इन्होंने कन्या शिक्षा पर जोर दिया है। वे समय निकालकर कन्या स्कूलों में खुद पढ़ाने के लिए जा रही हैं। साथ ही लोगों को इसके लिए प्रेरित भी कर रही हैं। उन्होंने गांव-गांव दौर कर लोगों से बेटियों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित भी किया है। कलेक्टर का यह नवाचार लोगों को पंसद आया। 

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