“महाराज” ने दिखाई ताकत तो बैकफुट पर गए शिवराज !

ग्वालियर/अतुल सक्सेना

ग्वालियर। सत्ता को भले ही आज के नेता सेवा का माध्यम बताएं लेकिन हकीकत में ये क्या है सब जानते हैं। इसमें जीत उसी की होती है जिसके पास ताकत होती है। मध्यप्रदेश में ताकत का प्रभाव तो जनता पिछले दिनों देख चुकी है अब इस ताकत का एक और प्रभाव देखना बाकी रह गया था जिसकी भी एक झलक दिखाई दे गई है। ये झलक है मंत्रिमंडल में अपने लोगों को जगह दिलाने की, और जो खबरें दिल्ली से आ रही हैं उस हिसाब से “महाराज” “मामा” शिवराज पर भारी पड़ते दिखाई देरहे हैं।

पिछले दिनों मध्यप्रदेश की राजनीति में आये घमासान के बाद 23 मार्च की शाम चौथी बार प्रदेश की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछले 27 दिन से अकेले ही प्रशासनिक अफसरों यानि नौकरशाहों के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं । इतना ही नहीं वे ऐसा करने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री भी बन गए हैं। मुख्यमंत्री बनने के अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल तक लॉक डाउन घोषित कर दिया। कुछ दिन तक सब ठीक ठाक चला शिवराज अकेले ही अपने हिसाब से सभी फैसले लेने लगे, मसलन अपने पसंद के प्रशासनिक अफसर को नियुक्त करना, कमलनाथ सरकार के समय की गई नियुक्तियाँ रद्द करना आदि आदि। लेकिन इसी बीच मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो पाया तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से अच्छी ट्यूनिंग रखने वाले वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों ने कुछ सुझाव मुख्यमंत्री को दिये। सीएम शिवराज को ये सुझाव इतने पसंद आये कि उन्होंने कोरोना संकट का हवाला देते हुए वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों यानि नौकरशाहों को ही प्रदेश के जिलों की कमान सौंप दी। खास बात ये है कि ऐसा करने वाले सीएम शिवराज सिंह देश के अकेले मुख्यमंत्री बन गए।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का ये फार्मूला भाजपा के ही उन नेताओं को पसंद नहीं आया जो सरकार में खुद का सीधा दखल चाहते हैं। इसे लेकर अंदर ही अंदर तलवारें खिंचने लगीं। मामला समझ आते ही एक खबर तेजी से फैलने लगी कि कोरोना संकट को देखते हैं शिवराज सिंह एक मिनी कैबिनेट का गठन करेंगे जिसमें 10 मंत्री होंगे और शिवराज सिंह ने इसकी रूपरेखा तैयार कर ली है और इस मिनी मंत्रिमंडल को 20 अप्रैल तक शपथ दिलवाई जा सकती है।

शिवराज का मिनी कैबिनेट का फैसला उनकी उम्मीद के विपरीत पार्टी में अंदर ही अंदर नाराजगी का कारण बनने लगा। पिछले दिनों कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकांश नेता मंत्रिमंडल में जगह चाहते थे लेकिन उन्हें अपनी आशाओं पर पानी फिरता दिखाई देने लगा। उधर मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल तय हो जाने की सूचना कांग्रेस की सत्ता गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास पहुंची तो वे भो भड़क गए। उन्होंने सीधे वरिष्ठ नेतृत्व से बात की और कहा कि जो कैबिनेट मंत्री मेरे साथ पद छोड़कर आये वे तो मंत्रिमंडल में रहेंगे ही, साथ ही कुछ अन्य विधायकों को भी राज्य मंत्री बनाया जाए। सूत्र बताते हैं कि हाल ही में सिंधिया की ताकत के सहारे मप्र में वापसी करने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व ने सिंधिया की नाराजगी और परेशानी दोनों सीएम शिवराज सिंह को बता दी। सूत्रों का यहाँ तक कहना है कि शिवराज ने फिलहाल मिनी कैबिनेट का फैसला वापस ले लिया है और अब एक बड़ा मंत्रिमंडल बनाने पर विचार कर रहे हैं। जो जानकारी आ रही है उस हिसाब से अब जो लिस्ट बनी है उसमें 20 से अधिक मंत्रियों के नाम है उसमें सिंधिया के करीबी 6 पूर्व कैबिनेट मंत्रियों के नाम है साथ ही तीन वो नाम हैं जिन्हें सत्ता परिवर्तन से पहले मंत्रिमंडल में लेने का वादा किया गया था। इसके अलावा भाजपा के उन कद्दावर पूर्व मंत्रियों के नाम है जो पिछली शिवराज सरकार में भी रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस मंत्रिमंडल में 20 से अधिक लेकिन 27 से कम मंत्री होंगे । जिन्हें इस बार जगह नहीं मिलेगी उन्हें अगले विस्तार में शामिल करने का भरोसा देकर शांत करा लिया जायेगा। बहरहाल इस घटना के बाद ये साबित हो गया कि “महाराज” की तलवार की धार कमजोर नहीं पड़ी है वे अभी से शिवराज पर भारी पड़ने लगे हैं। जिसका ही ये नतीजा है कि शिवराज सिंह को बैकफुट पर आना पड़ा है और उन्होंने अपना मिनी कैबिनेट का फैसला वापस ले लिया है। सूत्रों की बात पर भरोसा करें तो अब 3 मई तक इंतजार नहीं किया जायेगा। उम्मीद की जा रही है कि 20अप्रैल को राजभवन में एक सादे समारोह में मंत्रियों को शपथ दिलाई जायेगी और इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।