Corona Effect: मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने CM शिवराज को लिखा पत्र, की ये मांग

भोपाल।

मध्यप्रदेश(madhyapradesh) में लॉकडाउन(lockdown) के पांचवे चरण के साथ अनलॉक 1 शुरू हो गया है। जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से जिले को खोला जा रहा है। इसी बीच राजधानी में बढ़ रहे लगातार संक्रमण के मामले के बीच मंत्रालयीन कर्मचारी संघ द्वारा राज्य शासन(State government) को पत्र(letter) लिखकर मंत्रालय(Ministry) में फैलते संक्रमण के बीच बरते जा रहे अगंभीरता पर चिंता जताया गया है। मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने अपने लिखे पत्र में कहा है कि कोरोना के खिलाफ जो लड़ाई पूरे प्रदेश में चल रही है। मंत्रालय उस लड़ाई का वाररूम है। लेकिन उक्त लड़ाई के वाररूम (war room) में ही कोरोना संकट को अधिकारियों द्वारा बिल्कुल लापरवाही से लिया जा रहा है।

दरअसल मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने कहा है कि मंत्रालय में अब 50% की जगह 100%उ पस्थिति कराई जा रही है। इससे सोशल डिस्टेंशिंग मेंटेन नहीं हो पा रही है। सोशल डिस्टेंशिंग(social distancing) के हिसाब से सीटिंग अरेंजमेंट(sitting arrangement) आज तक चेंज नहीं किया गया। लोकस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा हाईरिस्क आइटम घोषित करने के बाद भी अधिकारी अभी भी सेंट्रल एसी(AC) चला रहे हैं। थर्मल स्कैनिंग(thermal screening) 12बजे तक होती है।12 के बाद कोई स्कैनिंग नहीं की जा रही है। कभी कभी स्कैनिंग मशीन की बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है। तब वगैर स्कैनिंग के ही लोग चले जाते हैं। जनप्रतिनिधियों के साथ आज भी पूरे प्रदेश के समर्थकों की भीड़ आती है। ऐसी अगम्भीरता में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

मंत्रालय में नहीं हो रहा सोशल डिस्टैन्सिंग का पालन

मध्यप्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों से डाक लगाने के लिए आज भी कर्मचारी मंत्रालय आते हैं और तीनों बिल्डिंगों में घूम घूमकर कर डाक लगाते हैं।उनकी डाक गेट पर ही ले ली जाये। इतना छोटा सा निर्णय भी नहीं हो सका। वाशरूमों में लिक्विड सोप डिस्पेंसर जैसी छोटी सी सुविधा के लिए हमें जद्दोजहद करनी पड़ी। अब, डिस्पेंसर लग गये लेकिन उनमें सोप नहीं भरी गई। नगरीय प्रशासन, खेल तथा युवक कल्याण विभागों के उपसचिव 50% उपस्थिति के निर्देश को नहीं मान रहे हैं। सफाई कर्मी सभी महिलाएं हैं जो हाटस्पाट बने हुए क्षेत्रों से आती हैं। सफाईकर्मी महिलाओं के पास न मास्क हैं,न सैनिटाइजर और न उनका स्वास्थ्य परीक्षण हुआ है। उन्हें न सोशल डिस्टेंशिंग के बारे में बताया गया।वे आज भी झुंड बनाकर घूमती हैं और झुंड में ही खाना खाती हैं। लैंड लाइन फोन असुरक्षित पड़े रहते हैं। उनसे अनेक लोग बात करते रहते हैं। लैंड लाइन फोन संक्रमण के वाहक हो सकते हैं।

पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद भी नई सील हुए कमरे

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का मूवमेंट अधिक होता है। उन्हें दूसरे कार्यालयों में जाना पड़ता है। आगंतुकों से बातची उनके विजिटिंग कार्ड अंदर पहुंचाने पड़ते हैं। परंतु, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कोई अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता नहीं समझी गई।वहीं मंत्रालय में एक कोरोना पाज़ीटिव निकल आने के बाद भी पूरी बिल्डिंग तो छोड़िए उस कक्ष को भी सील नहीं किया गया। वहां पर आज भी लोग बैठकर काम कर रहे हैं। जबकि भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय में एक सफाईकर्मी की रिपोर्ट पाज़ीटिव आने के बाद हड़कंप मच गया था और पूरा कार्यालय खाली करा लिया गया था। कैंटीन में न सोशल डिस्टेंशिंग है,न ई-पेमेंट की व्यवस्था है।

इधर इंजी सुधीर नायक, अध्यक्ष, मंत्रालयीन कर्मचारी ने बताया है कि मंत्रालयीन कर्मचारी संघ द्वारा मंत्रालयीन अधिकारियों/कर्मचारियों को सचेत, जागरूक करने और उनका मनोबल बढ़ाने हेतु एक अपील भी सीट टू सीट वितरित की जा रही है। मंत्रालयीन कर्मचारी संघ अपने सदस्यों को स्वयं संघ की ओर से सैनिटाइजर,मास्क इत्यादि बांटने की योजना बना रहा है।