‘ताई’ के खिलाफ इंदौर लोकसभा से कमलनाथ सरकार के इस मंत्री ने पेश की दावेदारी

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इंदौर। मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने अभी तक लोकसभा प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं किए हैं। उससे पहले एक ही सीट पर कई दावेदार सामने आ रहे हैं। कई दशकों से इंदौर लोकसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है। होली के दिन इस सीट पर लोकसभा स्पीकर और सांसद सुमित्रा महाजन(ताई) के खिलाफ कमलनाथ सरकार में मंत्री जीतू पटवारी ने दावेदारी पेश की है। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी मौका देगी तो वह ताई के खिलाफ जरूर मुकाबला करेंगे। 

दरअसल,  इस बार कांग्रेस के सामने इंदौर सीट को जीतने की चुनौती है। पार्टी इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए किसी कद्दावर चेहरे की तलाश कर रही है। इंदौर लोकसभा सीट पर बीजेपी का तीन दशकों से कब्जा है। भाजपा की वरिष्ठ नेत्री और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन इस सीट से 1989 से सांसद हैं। लोकसभा चुनाव के मद्दे मजर फिलहाल पार्टी उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रही है। इस बीच मंत्री जीतू पटवारी ने इंदौस लोकसभा से अपनी दावेदारी पेश करदी है। 

उच्च शिक्षा और खेल मंत्री जीतू पटवारी ने इंदौर में कहा कि सुमित्रा महाजन से जनता ऊब चुकी है. पार्टी मुझे मौका देगी तो जरूर चुनाव लड़ूंगा. वहीं जीतू पटवारी ने अपने परिवार के किसी सदस्य के चुनाव लड़ने से इनकार किया है. इस दौरान उन्होंने दिव्यांग बच्चों के साथ होली खेली। 

गौरतलब है कि सुमित्रा महाजन ‘ताई’ के नाम से मशहूर हैं। देश में उन्हें इस नाम से संबोधित किया जाता है। वह इंदौर सीट से लगातार 8 बार से सांसद हैं। उनके होने से इंदौर सीट बीजेपी के दुर्ग में तब्दील हो चुकी है जिसे भेदने के लिए कांग्रेस अब तक कोई बड़ा चेहरा नहीं ढूंढ पाई है। इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है। इंदौर में होलकर साम्राज्य रहा है। लेकिन मौजूदा वक्त में कांग्रेस के लिए यह सीट बीजेपी की अभेद गढ़ बन गई है। इसी तरह प्रदेश की कई बड़ी सीटों पर बीजेपी का कब्जा हो गया है। पत्रकार शम्स के मुताबिक इस बार इंदौर की सियासत के समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। कुछ खेमों में इस बात की चर्चा है कि ताई लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। इस तरह इंदौर की सियासत में नए राजनीति के अध्याय की शुरुआत होगी। खबर है कि ताई अपने बेटे को इस सीट से लोकसभा चुनाव में उतारने की पैरवी कर सकती हैं। लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा। क्योंकि सालों से इस सीट पर बीजेपी के कई नेता आंखे लगाए बैठे हैं। इनमें गोपाल कृष्णा नेमा और कैलाश विजयवर्गीय जैसे कद्दावर नेता शुमार है। अगर ताई चुनाव नहीं लड़ती हैं तो यहां से ये दो नाम सबसे आगे फिलहाल नजर आते हैं।