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भोपाल। मध्य प्रदेश की सत्ता में 15 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई है। हाल ही में लोकसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर संघर्ष कर रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश प्रभारी और महासचिव दीपक बावरिया को सभी 29 संसदीय क्षेत्रों के प्रेक्षकों ने रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मन टटोलने की कोशिश की गई है। कार्यकर्ता चाहते हैं कि प्रदेश के बड़े चेहरे लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाए। 

सूत्रों के मुताबिक प्रेक्षकों ने जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें बताया गया है कि बड़े नेताओं को चुनाव लड़ना चाहिए, इनमें वह भी शामिल हैं जो फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। इसमें एमपी के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को दो सीटों पर चुनाव लड़ाए जाने की अनुशंसा की गई है। भोपाल और राजगढ़ सीट से सिंह का नाम लोकसभा चुनाव लड़ाए जाने के लिए आगे बढ़ाया गया है। सिंह 1991  से 1994 तक राजगढ़ लोकसभा सीट से सांसद रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ी थी। 

रिपोर्ट के मुताबिक, गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पारंपरिक सीट से ही इस बार चुनाव लड़ सकते हैं। रिपोर्ट में उनको गुना सीट से ही चुनाव लड़वाने के लिए कहा गया है। हालांकि, इस बात की अटकलों चल रही हैं कि सिंधिया ग्वालियर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। उनके ग्वालियर सीट से चुनाव लड़ाए जाने की मांग भी की जा रही है। लेकिन सिंधिया ने गुना सीट से ही चुनाव लड़ने के लिए कहा है। वहीं, कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद छिंदवाड़ा लोकसभा सीट खाली हो जाएगी। इस सीट पर कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते हैं। 

वहीं, दिग्विजय सिंह के करीबी और मंत्री रामेश्वर नीखरा का नाम भी होशंगाबाद से लड़ने के लिए पैनल में शामिल किया गया है। हालांकि, उनके भतीजे और बॉलीबुड एक्टर आशुतोष राणा का नाम भी इस सीट के लिए प्रस्तावित किया गया है। लेकिन प्रदेश पदाधिकारियों का कहना है कि नीखरा इस सीट के लिए उनसे बेहतर विकल्प हैं। सूत्रों के मुताबिक इस सीट पर एक और नाम तेजी से चल रहा है। वह है राजकुमार पटेल का। वह 2009 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए गए थे। लेकिन समय पर सभी कागज जमा नहीं करने पर उनका नामांकन खारिज कर दिया गया था। 

हाल ही में राजधानी आए दीपक बावरिया ने बयान दिया था कि विधानसभा चुनाव में हारे हुए उम्मीदवारों को पार्टी टिकट नहीं देगी। लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी को दिग्गज नेताओं को लोकसभा चुनाव में टिकट देना चाहिए। विधानसभा चुनाव में कई बड़े चेहरे चुनाव हारे हैं। इसलिए उन चेहरों को लोकसभा चुनाव के संभावित उम्मीदारों की लिस्ट में शामिल किया गया है। इनमें सीधी से अजय सिंह, सतना से राजेंद्र सिंह, खंडवा से अरुण यादव, मुरैना से राम निवास रावत और दमोह से मुकेश नाइक शामिल हैं।

सागर जिले की नरयावली विधानसभा सीट से हारने वाले प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी टीकमगढ़ लोकसभा सीट के लिए संभावित चेहरा माने जा रहे हैं। टीकमगढ़ आरक्षित सीट के लिए चर्चा में आया एक और नाम निष्कासित आईएएस शशि कर्णावत का है। भिंड अनुसूचित जाति आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र के लिए पूर्व गृह मंत्री महेंद्र बौध का नाम भी जानबूझकर लिया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के बेटे पवन वर्मा को देवास एससी आरक्षित सीट के लिए माना जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि रतलाम सीट से पांच बार सांसद कांतिलाल भूरिया अभी भी पार्टी के सबसे पसंदीदा आदिवासी उम्मीदवार हैं। 2014 में मोदी लहर में पिछला लोकसभा चुनाव हारने वाले भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में हैं। इनमें ग्वालियर के अशोक सिंह हैं जिन्हें पिछले चुनाव में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 30,000 से कम वोटों से हराया था। ऐसा ही एक अन्य नाम पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का है, जिन्हें पिछले आम चुनावों में भाजपा के सुधीर गुप्ता ने 3 लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था।