MP ELECTION: भाजपा-कांग्रेस को ‘फतह’ की उम्मीद, प्लान ‘B’ भी तैयार

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भोपाल| मध्य प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी यह 11 दिसम्बर मंगलवार को साफ़ हो जाएगा| मतगणना को लेकर सभी दलों ने तैयारियां कर ली है, वहीं जीत के लिए भी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता दावा कर रहे हैं और अति आत्मविश्वास भी दिखा रहे हैं| हालाँकि यह भी तय है कि अगर दोनों ही पार्टी बहुतमत नहीं जुटा पाती है तो निर्दलीय और अन्य दल किंगमेकर की भूमिका में होंगे| जिसके लिए दोनों ही पार्टियों ने ‘प्लान बी’ बना लिया है| बहुमत से कम सीट मिलने पर निर्दलीय या अन्य दलों से लड़ रहे दमदार उम्मीदवारों पर भी उनकी नजर है और हर स्तिथि में इन्हे मनाने की कोशिश की जायेगी| 

दरअसल, टिकट कटने से नाराज बागी नेताओं ने चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस का सबसे ज्यादा खेल बिगाड़ा है, बागियों से बीजेपी को कांग्रेस से ज्यादा नुकसान हुआ है, क्यूंकि भाजपा के कब्जे में अधिक सीटें थी और दावेदार भी अधिक थे| टिकट बंटवारे के बाद डैमेज कंट्रोल भी किया गया| लेकिन कई दिग्गज नहीं माने और निर्दलीय या सपा-बसपा का दामन थाम कर चुनाव मैदान में उतरे और गणित बिगाड़ा| 

दमोह और पथरिया सीट पर भाजपा से बागी हुए रामकृष्ण कुसमरिया की चुनौती है। भिंड सीट पर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह इस बार टिकट नहीं मिलने पर नाराज होकर सपा की साइकिल पर सवार हो गए। बमौरी में पूर्व मंत्री केएल अग्रवाल भी भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर बागी हो गए।जबलपुर उत्तर में मंत्री शरद जैन के सामने धीरज पटेरिया ने कठिनाई खड़ी कर दी तो बैरसिया सीट पर ब्रह्मानंद रत्नाकर ने भी दमदार चुनौती दी है। सीहोर से पूर्व विधायक रमेश सक्सेना की पत्नी उषा सक्सेना ने निर्दलीय लड़कर भाजपा के लिए मुश्किल पैदा की।  महेश्वर में भाजपा से विधायक राजकुमार मेव टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़े हैं। वहीं सत्ता का वनवास ख़त्म करने में जुटे कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की दावेदारों ने शुरुआत से ही मुश्किलें बढ़ाई| अब बगावत कर मजबूत स्तिथि में हैं और अगर यह सीट जीतते हैं तो पार्टी को जरूर इन्हे मनाने की कोशिश करनी होगी| कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे सत्यव्रत चतुर्वेदी के पुत्र नितिन चतुर्वेदी बागी होकर राजनगर से सपा के प्रत्याशी बने। बिजावर में राजेश शुक्ला ‘बब्लू’ भी बागी हैं और अन्य उम्मीदवारों को कड़ी चुनौती दी है। वहीं पहले साथ आने वाली पार्टियां सपा और बसपा का साथ लेना चुनौती होगी| क्यूंकि दोनों ही पार्टी के प्रमुख गठबंधन नहीं हो पाने के लिए कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ चुके हैं| 

बागियों के अलावा सपा, बसपा, सपाक्स और गाेंगपा के कुछ उम्मीदवार मजबूत स्तिथि में हैं|  निर्दलीय या अन्य पार्टियों के लगभग 12 उम्मीदवार जीतने की स्थिति में हैं। भाजपा और कांग्रेस की निगाह अपने बागियों के साथ इन प्रत्याशियों पर भी है। दोनों ही पार्टियां पूरा जोर लगा रही है और हर संभावनाओं को नजरअंदाज न कर प्लान बी पर काम किया जा रहा है| बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और पार्टी उपाध्यक्ष प्रभात झा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से प्लान बी पर चर्चा कर चुके हैं| वहीं कांग्रेस भी प्लान बी का खाका तैयार कर चुकी है| राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी से कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया चर्चा कर चुके हैं| अगर बहुमत नहीं मिला तो सिंधिया सपा और कमलनाथ बसपा से बात करेंगे| पार्टी ने इस रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है|