MP : ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए सरकार की नई व्यवस्था, 5% कम दर पर उपलब्ध होगी सामग्री

MP News: साथ ही बिक्री से होने वाले लाभ का 0.25% हिस्सा उपभोक्ता संघ को भी उपलब्ध कराया जाएगा।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (MP) में ग्रामीण उपभोक्ताओं (rural consumers) के लिए सरकार ने व्यवस्था की है। दरअसल अपनी जरूरत के सामान लेने के लिए शहर नहीं जाना होगा। मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में उचित मूल्य पर राशन की दुकानों पर सरकार आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएगी। सामग्री की कीमत 5% कम दर पर उपलब्ध करवाई जाएगी।

दरअसल इसके लिए सहकारिता विभाग की सहकारी समिति (co-operative committee) द्वारा तैयारी पूरी कर ली गई है। सहकारी समिति द्वारा संचालित दुकानों को बहुद्देशीय दुकानों में परिवर्तित करने की योजना तैयार की गई है। इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है। ज्ञात हो कि प्रदेश में 4 करोड से अधिक उपभोक्ताओं को उचित मूल्य की दुकान से राशन उपलब्ध कराए जाते हैं। वहीं प्रदेश के 4540 से अधिक सहकारी समिति द्वारा दुकानों का संचालन कर उचित मूल्य पर जरूरत की सामग्री उपभोक्ताओं को बेची जाती है।

Read More : EPFO खाताधारकों के लिए खुशखबरी, मिलेगा 7 लाख रूपए का बड़ा लाभ, जाने कैलकुलेशन

मामले में संयुक्त पंजीयक सेंगर का कहना है कि दुकान पर उपभोक्ता सामग्री बेचना अनिवार्य नहीं रहेगा। हालांकि प्रबंधक तय करेंगे कि सामग्री बेची जानी है अथवा नहीं। प्रतिबंधित वस्तुओं को बेचने की अनुमति नहीं रहेगी। साथ ही बिक्री से होने वाले लाभ का 0.25% हिस्सा उपभोक्ता संघ को भी उपलब्ध कराया जाएगा।

इतना ही नहीं इसके साथ ही 11 लाख परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गेहूं चावल और नमक का वितरण प्रतिमाह किया जाता है। अब सरकार ने सहकारी समितियों के माध्यम से संचालित दुकानों को बहुद्देशीय बनाना
है। दुकानों में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया है। जिससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले उपभोक्ताओं को जरूरत की सामग्री लेने के लिए कस्बा शहर में न भटकना पड़े।

इस मामले में इस सप्ताह निविदा भी आमंत्रित कर ली जाएगी। वही आपूर्तिकर्ता सामग्री दर में अधिक छूट देंगे, उनका चयन किया जाएगा। सहकारी समितियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में शामिल रहने के लिए अधिकतम खुदरा मूल्य से कम से कम 5% की छूट उपभोक्ता को उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा दुकान संचालक को 1 महीने में सामग्री बेचकर भुगतान करना अनिवार्य होगा। वही जो सामग्री नहीं बिकेगी उसे वापस भी लिया जा सकेगा।