MP: इस पाक जासूस की रिहाई पर “लॉक डाउन” ने लगाए ब्रेक

ग्वालियर।अतुल सक्सेना। “लॉक डाउन” के हालात में जहाँ मध्यप्रदेश सरकार जेल से बंदियों को पेरोल पर छोड़ रही है वहीं ग्वालियर जेल में सजा पूरी कर चुके एक पाकिस्तान जासूस को पाकिस्तान सरकार ने वापस लेने से इंकार कर दिया है।

पाकिस्तान के लिए जासूसी करते ग्वालियर की इंदरगंज थाना पुलिस द्वारा पकड़े गए अब्बास अली उर्फ माजिद खां की 14 साल की सजा सेंट्रल जेल में 26 मार्च 2020को पूरी हो गई लेकिन उसकी रिहाई कोरोना वायरस के चलते जारी “लॉक डाउन” में उलझ गई है। पाकिस्तानी दूतावास ने अब्बास अली को वापस पाकिस्तान भेजने से इंकार कर दिया है। स्थानीय प्रशासन पाकिस्तान दूतावास के माध्यम से अटारी बॉर्डर के रास्ते अब्बास को पाकिस्तान भेजना चाहती है। ग्वालियर सेंट्रल जेल अधीक्षक मनोज कुमार साहू के मुताबिक अब्बास अली की सजा 26 मार्च 2020 को पूरी हो गई हमने और स्थानीय पुलिस ने अब्बास की रिहाई के लिए जरूरी का का कानूनी तैयारी पूरी कर ली। दिल्ली स्थित पाक दूतावास, विदेश मंत्रालय सब जगह बात कर ली लेकिन इस बीच कोरोना वायरस के कारण घोषित लॉक डाउन के चलते उसकी रिहाई अटक गई है। जेल अधीक्षक ने कहा कि जब तक “लॉक डाउन” रहता है और हालात सामान्य नहीं होते तब तक अब्बास अली को जिला प्रशासन द्वारा जेल में बनाये गए डिटेंशन सेंटर में ही रखा जायेगा।

ये है पूरा मामला

ग्वालियर की इंदरगंज थाना पुलिस ने अब्बास अली उर्फ माजिद खां को 13 मार्च 2006 को नई सड़क से पकड़ा था। अब्बास अली उर्फ माजिद खां यहाँ बिरजू रजक के मकान में माधौ स
सिंह पुत्र वेदप्रकाश बनकर किरायेदार के रूप में रह रहा था। पूछताछ में अब्बास अली ने बताया था कि वो रहीमयार खां पंजाब पाकिस्तान का रहने वाला है उसने खुलासा किया था कि उसे पाक अधिकृत पंजाब के ही फैयाज खां ने ग्वालियर एयरवेज और सेना की जासूसी के लिए भेजा था इसके लिए उसे विशेष ट्रेनिंग भी दी गई थी। वो पहली बार 2005 में भारत में घुसा था वो दिल्ली और उसके आसपास रहा, उसके बाद मुंबई, मुरादाबाद, बुलंदशहर गया फिर जासूसी के लिए ग्वालियर आया। पुलिस को अब्बास के कब्जे से ड्राइविंग लाइसेंस, उत्तर प्रदेश का वोटर कार्ड, ग्वालियर के मुरार सैन्य छावनी का रोड मैप, जिसपर अंग्रेजी में UMA लिखा था ( एयर फोर्स से ताल्लुक रखने वाली जानकारी ) , ब्लेक एंड व्हाइट और कलर्ड फोटो, मार्कशीट, उर्दू में लिखी कई पर्चियाँ कुल 58 दस्तावेज मिले थे जिसे बाद न्यायालय ने सबूतों के आधार पर अब्बास अली को जासूसी के आरोप में 14 साल आजीवन कारावास को सजा सुनाई थी। जो 26 मार्च 2020को पूरी हो चुकी है।