MP पुलिस को मिला विज्ञापन का टारगेट, RTI एक्टिविस्ट ने उठाए सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस को आल इंडिया वॉटर स्पोर्ट्स के आयोजन की कमान मिली है। लेकिन इसी के साथ एक नए विवाद ने भी जन्म ले लिया है। पुलिस मुख्यालय से एक फरमान जारी किया गया है कि प्रतियोगिता आयोजन में पैसा जुटाने के लिए प्रदेश के सभ जिलों के पुलिस अक्षीक्षकों को लाखों रुपए का टारगेट दिया गया है। हर जिले के एसपी को डेढ़ लाख रुपए जुटाने का लक्ष्य दिया गया है। मुख्यालय के इस आदेश की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है। आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने फेसबुक पर इस आदेश पर सवाल उठाए हैं। यह प्रतियोगिता 12 से 16 दिसंबर के बीच भोपाल की बड़ी झील में होगी। 

उन्होंने लिखा है कि ‘जय हो कमलनाथ सरकार, मध्यप्रदेश पुलिस के चंबल आईजी ने वॉटर स्पोर्ट्स के आयोजन हेतु प्रकाशित होने वाली स्मारिका में विज्ञापन की वसूली का टार्गेट SP को दिया है । सबसे रोचक तथ्य मुझे 4 जिलो में भिंड से सर्वाधिक वसूली का दिखा ।संयोग से अवैध उत्खनन भी भिंड में अधिक होता है।’

दरअसल, पुलिस मुख्यालय पैसे जुटाने के लिए स्मारिका का प्रकाशन करेगा। स्मारिका में विज्ञापन के जरिए प्रतियोगिता के लिए रुपए जुटाए जाएंगे। आदेश में प्रदेश के ५० जिलों के एसपी और 2 डीआईजी को विज्ञापन के जरिए प्रदेश भर से रुपए जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके पीछे तर्क यह दिया गया है कि पुलिस मुख्यालय के पास 19वीं आल इंडिया वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता आयोजित कराने के लिए फंड की कमी है। इसलिए यह फैसला किया गया है कि फंड की कमी को दूर करने के लिए स्मारिका का प्रकाशन किया जा रहा है। इस संबंध में विज्ञापन के रेट भी तय कर दिए गए हैं। और सभी जिले के एसपी को भेज दिए गए हैं। 

यह रहेगा विज्ञापन का रेट

फुल पेज कलर्ड – 50 हज़ार

हॉफ पेज कलर्ड- 30 हज़ार

क्वार्टर पेज कलर्ड- 17 हज़ार

कवर पेज सैकंड कलर्ड- 80 हज़ार

सेकंड लास्ट कवर पेज- 70 हज़ार

बैक कवर लास्ट पेज- एक लाख रुपए