भोपाल।

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा राज्य सेवा एवं राज्य वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2019 के लिये संभागीय पर्यवेक्षक नियुक्त करने का मामला अब विवादों में घिर गया है।  आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद राय ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए है। राय ने के सी जैन और आर के शिवहरे का भाई अशोक को पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाए है।उन्होंने इन्हें व्यापमं का सरगना बताया है।उन्होंने मांग की है कि इन्हें हटाया जाए।

 राय ने ट्वीट कर लिखा है कि व्यापमं घोटालेबाज प्री पी जी2012 का आरोपी  के सी जैन को बनाया लोक सेवा आयोग परीक्षा का पर्यवेक्षक,व्यापमं आरोपी आर के शिवहरे का भाई अशोक भी बना पर्यवेक्षक,आज भी आरएसएस विचारधारा के लोग लोक सेवा आयोग पर काबिज हैं चाहे अध्यक्ष हो या सचिव। वही उन्होंने अगले ट्वीट में वीडियो जारी कर मांग की है कि इन्हें तुरंत पर्यवेक्षक के पद से हटाना चाहिए 

दरअसल, बुधवार को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा एवं राज्य वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2019 के लिये संभागीय पर्यवेक्षक नियुक्त किये हैं। जिसमें ग्वालियर संभाग में  अशोक कुमार शिवहरे,और उज्जैन संभाग में  के.सी. जैन को नियुक्त किया है।  जैन पर बेटे का प्री पीजी २०१२ की परीक्षा में पैसे देकर सिलेक्शन करवाने का आरोप है, वही अशोक शिव हरे, पूर्व डीआईजी आर के शिव हरे के भाई  है। जिस पर राय ने आपत्ति जताई है। इसकी परीक्षा 12 जनवरी, 2020 को होगी। 

गौरतलब है कि व्यापमं घोटाले में प्री-पीजी 2012 में सीबीआई की जांच पूरी हो गई है। जल्द ही सीबीआई रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी आरके शिवहरे सहित 28 आरोपितों के खिलाफ चालान पेश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार एक अन्य रिटायर आईएएस केसी जैन की अपने बेटे के प्री-पीजी में पास कराने की भूमिका को लेकर सीबीआई की जांच में ठोस आधार नहीं बने। इससे केसी जैन तो बच गए हैं लेकिन उनके बेटे और रिश्तेदार विवेक कुमार जैन घोटाले में आरोपी बना दिए गए हैं।वही  रिटायर आईपीएस अधिकारी आरके शिवहरे को अपनी बेटी डॉ. नेहा और दामाद आशीष आनंद गुप्ता को व्यापमं के अधिकारियों को पैसे देकर प्री-पीजी पास कराने में आरोपित बनाया गया है। उनकी बेटी और दामाद भी इसमें आरोपित बने हैं।