ई टेंडरिंग मामले में नया खुलासा, हजारों की संख्या में हुई टेंडरों में गड़बड़ी

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भोपाल|  ई टेंडरिंग मामले में एक नया खुलासा हुआ है। एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ को मिली जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग के द्वारा टेंडर संख्या 43672 जिसकी लागत राशि 84 .53 करोङ रुपए थी देने में भी गड़बड़ी की गई। यह टेंडर मक्सी- तराना -रूपा खेड़ी सीमेंट कंक्रीट रोड बनाने के लिए किया गया था। 29 अगस्त 2017 को किया गया टेन्डर इंदौर के पीडी अग्रवाल नामक ठेकेदार के नाम खुला था। हालांकि लोक निर्माण विभाग द्वारा इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और इस मामले की जब शिकायत की गई थी उस शिकायत के दूसरे ही दिन विभाग के प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान ने लोक निर्माण विभाग के ईएनसी ऑफिस पहुंचकर मामले की फाइले अपने कब्जे में कर ली थी, जिसके बारे में विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी मोहम्मद सुलेमान पर आरोप लगाए थे। लोक निर्माण विभाग के सूत्रों का कहना है कि अकेले विभाग में 200 से ज्यादा ऐसे टेंडर हैं जिनमें टेंपरिंग कर मनचाहे लोगों को टेंडर आवंटित किए गए। 2014 से मध्यप्रदेश में टेंडरों में टेंपरिंग का ये खेल खुलेआम चल रहा था जिसे विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव का संरक्षण प्राप्त था। हैरत की बात यह है कि पीडी अग्रवाल के टेंडर की जानकारी विभाग को होने के बावजूद इसे ईओडब्लू को नहीं सौंपा गया। मई में शिकायत होने के बाद भी ईओडब्ल्यू ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की, यह समझ से परे है।  ये  टेंडर प्रमोद अग्रवाल के लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव रहते समय जारी हुआ था। इसके कुछ समय बाद लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान बने थे

 क्या है ई टेंडर टेंपरिंग घोटाला

मई में सबसे पहले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पीएचई विभाग में यह मामला सामने आया | जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी ने पीएचई के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल को पत्र लिखकर ई प्रोक्योरमेंट पोर्टल में टेंपरिंग कर 1000 करोड़ मूल्य के तीन टेन्डरो के रेट बदलने की जानकारी दी। इसके बाद ही 3 टेंडर निरस्त कर दिए गए इनमें से दो टेंडर उन पेयजल परियोजनाओं के थे जिनका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले थे। 

दरअसल इस पूरे खेल में ई पोर्टल में टेंपरिंग से दरें संशोधित करके टेंडर प्रक्रिया से बाहर आने वाली कंपनी को टेंडर दिला दिया जाता था और मनचाही कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का काम बहुत ही सुव्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया जाता था। इस खुलासे के बाद में मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ,जल निगम, महिला बाल विकास, लोक निर्माण, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, नर्मदा घाटी विकास, जल संसाधन जैसे विभागों में भी इस तरह के मामले होने की खबरें मिली। मुख्यमंत्री ने इस मामले पर कार्रवाई करने के आदेश दिए तब मुख्य सचिव ने ईओडब्ल्यू पत्र लिखकर इस मामले में एफआईआर दर्ज करने को कहा। लेकिन मुख्य सचिव के कहने के बाद भी ईओडब्ल्यू ने इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की|  क्योंकि तब तक मुख्यमंत्री समझ चुके थे कि चुनावी वर्ष में यदि हुए घोटाला बाहर आया तो सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी। कान्ग्रेस ने अपने वचन पत्र में इस मामले की जांच कराकर दोषियों को सजा दिलाने की बात कही है|