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शाजापुर

मध्यप्रदेश में विधानसभा से पहले प्रत्याशी के जनसंपर्क के दौरान मारपीट और विरोध की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। विकास के नाम पर जनता से वोट मांगने वाले प्रत्याशियों से पिछले पांच सालों का हिसाब मांगा जा रहा है। ताजा मामला शाजापुर से सामने आया है। यहां भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक अरुण भीमावत के काफिले को ग्रामीणों ने उस वक्त रोक लिया जब वे जनसंपर्क के दौरान जनता से वोचट मांगने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने विरोध स्वरुप उन्हें काले झंडे दिखाए और जमकर नारेबाजी की। इससे गुस्साए कार्यकर्ता औऱ ग्रामीण आमने-सामने हो गए।इस दौरान मारपीट और पथराव की भी घटनाए हुई।

दरअसल, घटना शनिवार शाम को विधायक अरुण भीमावत जनसंपर्क करते हुए अपने काफिले के साथ दुपाड़ा पहुंचे थे। यहां बस स्टैंड के पास पहले से खड़े कुछ ग्रामीणों ने विधायक के काफिले के सामने काले झंडे दिखाए औऱ फिर  नारेबाजी करना शुरु कर दिया।  ग्रामीणों ने उन पर कई आरोप लगाए और पांच सालों का हिसाब मांगा। इस पर भाजपा प्रत्याशी अरुण भीमावद और उनके समर्थक भीड़ के बीच से आगे निकलने का प्रयास करने लगे। इस पर दोनों ओर से धक्का-मुक्की के साथ मारपीट शुरु हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने भीमावद की कार पर डंडे व पत्थरों से हमला कर दिया। इससे गाड़ी के कांच भी फूट गए।करीब आधा घंटे दोनों पक्षों में झगड़ा होता रहा। सूचना पर शाजापुर से दुपाड़ा पहुंचे पुलिस बल ने मोर्चा संभाला। 

एक घंटे बाद फोर्स की मौजूदगी में भीमावद ने रात 8 बजे दुपाड़ा में जनसंपर्क कर ग्रामीणों से समर्थन मांगा।विवाद में मारपीट के साथ ही एक पक्ष द्वारा वाहनों में भी तोड़फोड़ भी की गई। जानकारी अनुसार भाजपा प्रत्याशी की कार के साथ ही एक और चार पहिया वाहन में तोड़फोड़ की गई।विवाद के बाद गांव में तनाव के हालात बन गए थे। हालांकि पुलिस के पहुंचने के बाद हालात सामान्य हुए और पुलिस सुरक्षा के बीच भाजपा प्रत्याशी का संपर्क जारी रहा।इसी बीच विधायक भीमावद भी समर्थकों के साथ थाने पहुंचे। देर रात को मामले में शिकायत दर्ज हो सकी।

बताया जा रहा है कि विरोध करने वाले लोग निर्दलीय प्रत्याशी जेपी मंडलोई के समर्थक थे।विवाद में निर्दलीय प्रत्याशी समर्थक तीन लोग घायल भी हो गए, जिन्हें बाद में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। भीमावत ने भाजपा के बागी होकर निर्दलीय प्रत्याशी जे.पी. मंडलोई और कांग्रेस प्रत्याशी हुकुम सिंह कराड़ा पर इस घटना के आरोप लगाए है, औऱ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है। जबकि कराड़ा और मंडलोई ने आरोपों को निराधार बताया है।