OSD तुषार पांचाल मामला, अब जनसंपर्क विभाग के पूर्व अधिकारी ने किया ट्वीट

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मुख्यमंत्री के OSD पद पर तुषार पांचाल (Tushar Panchal) की नियुक्ति आदेश और विवाद के बाद पांचाल द्वारा पद संभालने से इन्कार को लेकर जनसंपर्क विभाग के पूर्व आला अधिकारी ने ट्वीट किया है। उनका साफ लिखना है कि जनसंपर्क विभाग का स्थान कभी विज्ञापन एजेंसी नहीं ले सकती।

तुषार पांचाल ने किया सीएम शिवराज का OSD बनने से इनकार, ट्वीट कर दी जानकारी

सोमवार की शाम जैसे ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ओएसडी पद पर विज्ञापन एजेंसी के कर्ताधर्ता तुषार पांचाल के नियुक्ति आदेश जारी हुए, बवाल मच गया। दरअसल तुषार पांचाल के कई पुराने ट्वीट का हवाला दिया गया जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के ऊपर कई तल्ख टिप्पणियां की हैं। कांग्रेस ने मंगलवार की सुबह से ही इसे मुद्दा बना लिया और सीधे मुख्यमंत्री के ऊपर निशाना साधने लगे। गृह एवं जेल मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने भी इस मामले में कहा कि वे मुख्यमंत्री से बात करेंगे। इतना ही नहीं, दिल्ली बीजेपी की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी इस नियुक्ति को लेकर घोर आपत्ति जताई। अब से थोड़ी देर पहले ही तुषार पांचाल ने इस पद को संभालने से इनकार करने संबंधित ट्वीट किया। यानि अब वह मुख्यमंत्री के ओएसडी नहीं बनेंगे।

इस ट्वीट पर मचे बवाल के बीच जनसंपर्क विभाग के पूर्व संचालक रहे लाजपत आहूजा का एक ट्वीट आया है। ट्वीट में आहूजा ने लिखा है “जनसंपर्क का स्थान विज्ञापन एजेंसी कभी नहीं ले सकती। यह बारीक अंतर संवेदनशील प्रशासक बख़ूबी समझते हैं। सबसे पहले अजीत जोगी सरकार ने इसे शुरू किया। मध्यप्रदेश और छतीसगढ की उत्तरवर्ती सरकारों ने इसे अपनाया। हर बार यह प्रयोग विफल रहे। इस दौरान भी असल काम जनसंपर्क विभाग की मशीनरी ने ही किया।” दरअसल यह ट्वीट जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों का दर्द बताता है जो दिन रात मेहनत करके सरकार की इमेज बिल्डिंग का काम करते हैं। लेकिन जब यह काम किसी व्यक्ति को ठेके पर दे दिया जाता है तो श्रेय विज्ञापन एंजेसी ले जाती है। इसके साथ ही जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए भी एड एजेंसी को दे दि जाते हैं। जैसा आहूजा ने लिखा कि यह काम अजीत जोगी जी की सरकार के समय शुरू हुआ था लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रयोग इन्वेस्टर मीट के दौरान सरकार की इमेज बिल्डिंग के लिए किया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार की छवि चमकाने के लिए अरबों रुपए का बजट और सक्षम अधिकारी कर्मचारी मौजूद हैं तो आखिरकार विज्ञापन एजेंसी के मायने क्या हैं!