निगम-मंडलों में नियुक्तियों की कवायद तेज, इस फॉर्मूले से एडजस्ट होंगे कांग्रेस नेता

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भोपाल| मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही निगम मंडलों और आयोगों में नियुक्तियों का इन्तजार कर रहे कार्यकर्ताओं और नेताओं को सरकार जल्द ही खुशखबरी देगी| राजनीतिक नियुक्ति को लेकर कवायद जल्द शुरू होने वाली है| मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के फॉर्मूले पर हाईकमान ने मुहर लगा दी है|

सीएम के फॉर्मूले के तहत दस साल तक पार्टी के लिए जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ता और नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियां देकर एडजस्ट किया जाएगा| हालाँकि शुरुआत से ही कई बड़े नेता इन नियुक्तियों को लेकर सक्रिय हैं और पद पाने के लिए भोपाल से दिल्ली तक जोर लगा रहे हैं| लेकिन इस फॉर्मूले के चलते बड़े नाम देखकर नहीं बल्कि पार्टी के हर आंदोलन और प्रदर्शन में बढ़चढ़कर हिस्सा लेना वाले नेताओं को मौका दिया जाएगा| 

सूत्रों की मानें तो सोमवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री कमलनाथ और सोनिया गांधी के बीच हुई चर्चा में निगम मंडलों में अध्यक्ष उपाध्यक्ष की राजनीतिक मुद्दों को लेकर जानकारी दी है | इसके बाद यह तय हो गया है कि जिन्होंने पिछले 10 साल तक कांग्रेस के लिए पूरा समय दिया ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं को पद दिए जाने चाहिए| इसके लिए मुख्यमंत्री ने एक फॉर्मूला तय किया था, फार्मूला में यह था कि जिन लोगों ने पिछले कम से कम 10 साल तक पार्टी के लिए संघर्ष किया हर आंदोलन प्रदर्शन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया ऐसे लोगों को आगे बढ़ाने और उसके संघर्ष को महत्व देते हुए उन्हें निगम मंडलों में जगह दी जाएगी, इसके लिए जिला अध्यक्षों के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के नाम मांगे गए हैं| विपक्ष में रहते हुए जिन बड़े नेताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया और सरकार बनने के बाद अब सक्रिय राजनीति में नजर नहीं आ रहे हैं, ऐसे नेताओं को पार्टी पद देकर एक बार फिर मुख्य धारा से जोड़ सकती है| 

दावेदारों की लम्बी लिस्ट 

राजनीतिक नियुक्ति पाने के लिए कई बड़े नेता दावेदारी जाता रहे हैं| सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के नेता सक्रिय हैं।  पार्टी सूत्रों का कहना है कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, सुरेश पचौरी, रामेश्वर नीखरा, अरुण यादव, विस के पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार सिंह, सीएम कमलनाथ के लिए सीट खाली करने वाले उनके करीबी दीपक सक्सेना, रामनिवास रावत, सरताज सिंह, लक्ष्मण सिंह, बिसाहूलाल सिंह, मुकेश नायक, चंद्रिका प्रसाद, चंद्रप्रभाष शेखर,पूर्व मीडिया प्रभारी मानक अग्रवाल, केके मिश्रा, अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख मोहम्मद सलीम, पूर्व सांसद असलम शेर खान, प्रदेश महिला कांगे्रस अध्यक्ष मांडवी चौहान सहित कई नेता शामिल हैं। इसके अलावा उपाध्यक्ष राजीव सिंह, मीडिया प्रभारी शोभा ओझा, प्रदेश अध्यक्ष समन्वयक नरेंद्र सलूजा, प्रवक्ता रवि सक्सेना, पंकज चतुर्वेदी, जेपी धनोपिया, विभा पटेल, दीप्ति सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों में महेंद्र सिंह चौहान, कैलाश मिश्रा, सहित अन्य भी कतार में हैं। इनके अलावा रजनीश सिंह, केपी सिंह, एदल सिंह कंसाना, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, बिसाहूलाल सिंह, संजय शर्मा और बसपा के संजीव सिंह भी दौड में हैं। विस चुनावों में कांगे्रस पार्टी को बुंदेलखंड में अच्छा समर्थन मिला था। इनमें पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह जग्गू राजा, अरुणोदय चौबे, शंकरप्रताप सिंह मुन्ना राजा, विधायक विक्रम सिंह नातीराजा, कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे बिजावर सीट से सपा विधायक राजेश शुक्ला के नाम दौड़ में है।

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