जब भागवत ने पढ़ा इकबाल का मशहूर शेर- ‘कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’

इंदौर।

मध्यप्रदेश के इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ (आरएसएस) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी मंडल की पांच दिवसीय बैठक गुरुवार से शुरू हो गई। इसी दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार शाम चमेली देवी पार्क कॉलोनी में शांतादेवी रामकृष्ण विजयवर्गीय न्यास का लोकार्पण किया।इस मौके पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने उर्दू शायर अल्लामा इकबाल का एक शेर पढ़ते हुए कहा ‘’यूनान, मिस्र, रोमां, सब मिट गए जहाँ से, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।’’ खास बात ये है कि भागवत ने ऐसे समय में ये नज्म पढी है जब शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘हम देखेंगे’ के हिंदू विरोधी होने की जांच नहीं की जा रही है।ऐसे में सियासत के फिर गर्माने के पूरे आसर है।

भागवत ने कहा हिंदू समाज ने प्राचीन समय से लेकर आज तक कई बातें झेली हैं, तो कई उपलब्धियां हासिल भी की हैं। पिछले पांच हजार वर्षों में आए उतार-चढ़ावों के बावजूद हिंदू समाज के प्राचीन जीवन मूल्य भारत में आज भी प्रत्यक्ष तौर पर देखने को मिलते हैं।.और यह बात है-हमारा धर्म। यहां धर्म से तात्पर्य किसी संप्रदाय विशेष से नहीं, बल्कि मनुष्यों के सह अस्तित्व से जुड़े मूल्यों से है। धर्म समन्वित और संतुलित तरीके से जीवन जीने का तरीका है जिसमें महत्व इस बात का है कि हम दूसरों को क्या दे रहे हैं और उनके भले के लिए क्या कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘दुनिया के बाकी देशों के प्राचीन जीवन मूल्य मिट गए। कई देशों का तो नामो-निशान ही मिट चुका है। परंतु हमारे जीवन मूल्य अब तक नहीं बदले हैं। इसलिए इकबाल ने कहा है- ‘यूनान, मिस्र, रोमां, सब मिट गए जहां सेज्. कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।

उन्होंने कहा, जीवन श्रेष्ठ तभी है जब वह मूल्य आधारित और संस्कार देने वाला हो। मैं, मेरे और जग में समन्वय करेंगे तो सब ठीक रहेगा। हालांकि जो कहते थे कि सब ब्रह्म हैं, सभी में परमेश्वर है, उनमें से भी कुछ लाेग जात-पांत में उलझ गए हैं। जैसे आज भक्तनिवास का उद्घाटन हुआ। मैं कहूंगा कमाओ और समाज को भी दाे। डॉ. हेडगेवार ने किया वो धर्म था, खुद के लिए कुछ नहीं किया।

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