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सागर।

सागर लोकसभा सीट पर सालों से बीजेपी का कब्जा रहा है। इस सीट पर पिछले 6 चुनावों से बीजेपी ही जीतती आई है, कांग्रेस ने यहां आखरी बार 1991 जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार कांग्रेस की जीत आसान होती नजर आ रही है, चुंकी इस बार समीकरण बदले हुए नजर आ रहे है।पहला कारण वर्तमान  सांसद लक्ष्मीनारायण यादव का टिकट काटा जाना और दूसरा जैन समाज की नाराजगी। ऐसे में इसका फायदा कांग्रेस को मिलना तय है।अगर ऐसा होता है तो 1991  के बाद कांग्रेस यहां से जीत हासिल करेगी।हालांकि विधानसभा चुनाव की नजर से देखा जाए तो बीजेपी की यह सीट पूरी तरह से सेफ है,चुंकी 8 में से 7 विधानसभा क्षेत्रों में इस समय भाजपा के ही विधायक हैं।वही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने और गोविंद सिंह राजपूत  (कैबिनेट मंत्री) के इस क्षेत्र से होने का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।

दरअसल, यह सीट दो जिलों की आठ सीटों से मिलकर बनी हुई है। सागर जिले की 5 और विदिशा की 3 विधानसभा सीटों को मिलाकर सागर लोकसभा क्षेत्र बना है। कांग्रेस ने यहां से प्रभु सिंह ठाकुर तो बीजेपी ने राज बहादुर सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया। दोनों ही प्रत्याशी दांगी ठाकुर हैं।इस सीट पर ओबीसी वोटर सबसे ज्यादा और उन्हीं के हाथ जीत की चाबी है।राजबहादुर सिंह ठाकुर वर्तमान मे सागर नगर निगम के अध्यक्ष हैं। उन्होंने पार्षद से राजनीति शुरु की थी और लगातार तीन बार से पार्षद है। हालांकि वे एक नए चेहरे हैं और सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं दिलचस्प बात यह है कि वे बीजेपी नेता और पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह के भांजे दामाद हैं।वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रभु सिंह ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाया है। इन्होंने अपना राजनैतिक सफर जनपद अध्यक्ष बीना से शुरू किया था। 1990 में उन्होंने सुधाकर बापट के सामने बीना से विधानसभा चुनाव लडा जिसमे पराजय हाथ लगी थी, कांग्रेस ने 1993में इन्हें फिर से मौका दिया जिसमें वे सुधाकर बापट को हराकर विधायक बने। वे दिग्विजय सरकार में पंचायत ग्रामीण विकास राज्यमंत्री भी थे।

आसान नही बीजेपी की राह

यहां  आखिरी बार 1991 में कांग्रेस को यहां जीत मिली थी, तब कांग्रेस के आनंद अहीरवार ने बीचेपी के राम प्रसाद अहीरवार को हराया थ।  फिलहाल इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है। बीजेपी के लक्ष्मी नारायण यादव यहां के सांसद हैं, उन्होंने 2014 में गोविंद सिंह राजपूत को हराया था। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान सागर लोकसभा सीट पर बीजेपी की जीत की राह आसान नहीं दिख रही है। जहां कांग्रेस में उम्मीदवार को लेकर किसी भी तरह की रस्साकसी नहीं है। वहीं, बीजेपी को यहां से अपने दल के कई नेताओं की अदरुनी राजनीति का खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। इसके अलावा जैन समाज का उम्मीदवार बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाकर जीत की राह को मुश्किल कर सकता है।