सट्टा बाजार इस पार्टी की बनवा रहा सरकार, सटोरियों की पहली पसंद बना यह दल

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भोपाल।  मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में सर्वे के बाद अब सट्टा बाजार भी कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहा है। एक महीने पहले तक भाजपा की जीत का दावा करने वाले सट्टा बाजारी भी अब हालात देख कर पलटी मारते दिखाई दे रहे हैं। राजधानी भोपाल में सट्टा मार्केट में कांग्रेस के सितारे बुलंद नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक कांग्रेस सटोरियों की पहली पसंद बन गई है। जिससे प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है। सटोरियों का दावा है कि इस बार प्रदेश में कांग्रेस को 116 सीटें तक मिल सकती हैं। 

टाइम्स अॉफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक महीने पहले तक अगर कोई शख्स बीजेपी पर 10 हजार की शर्त लगाता था तो उसे पार्टी के सत्ता में लौटने पर 11 हजार रुपये मिलने वाले थे वहीं किसी शख्स ने कांग्रेस के लिए 4400 रुपये का दांव लगाया है तो उसे विपक्ष की जीत पर 10 हजार रुपये मिलने थे। बुकीज का कहना है कि इस हफ्ते से अब वे सीटों की संख्या पर शर्त लगा रहे हैं न कि इस पर कि कौन सरकार बनाएगा। एक बुकी ने बताया, ‘हम यह नहीं कहना चाहते कि कौन की पार्टी सरकार बनाएगी। दांव खुले हैं। इस चुनावी मौसम में सट्टा बाजार अच्छा चल रहा है क्योंकि इस बार मुकाबला काफी करीब-करीब का है।’ बुकीज का कहना है कि सट्टा ट्रेंड भले ही वास्तविक परिणाम से अलग हो लेकिन मार्केट में कांग्रेस के लिए 116 से अधिक सीटें और बीजेपी के लिए 102 या अधिक सीटों का दांव लगाया जा रहा है। 

बुकिज का कहना है कि हर रोज ट्रेंड में बदलाव देखने को मिल रहे हैं। प्रदेश में चुनाव प्रचार जोरों पर है। वोटिंग में सिर्फ एक हफ्ता शेष है। ऐसे में रोज नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसलिए इस बात दावा नहीं किया जा सकता जो ट्रेंड आज है वही कल भी सही साबित होगा। लेकिन अगर किसी का दांव बीजेपी या कांग्रेस में से किसी पर सही हो गया तो उसके पैसे डबल हो जाएंगे। सट्टा बाजार में हर चुनाव में करोड़ों रुपये का दांव लगाया जाता है। दांव सिर्फ फोन पर ही नहीं बल्कि वेबसाइट और ऐप्स पर भी लगाए जाते हैं। शायद इसी वजह से राज्य में अभी तक किसी गैंग का चुनाव में सट्टेबाजी रैकेट चलाने के लिए भंडाफोड़ नहीं हुआ है। 

गौरतलब है कि भारत में सट्टा बाजार पूरी तरह से गैरकानूनी है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की तमाम सक्रियता के बावजूद क्रिकेट मैचों और चुनावों में यह पूरी तरह से सक्रिय हो जाता है। बताया जाता है कि चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों की जीत-हार पर बाजार में करोड़ों रुपये दांव पर लगाए जाते हैं। खबरों के अनुसार वर्तमान विधानसभा चुनावों को लेकर भी यह बाजार काफी सक्रिय है।