निजी स्कूलों की फीस को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, नोटिफिकेशन जारी

अब निजी स्कूल अपनी मर्जी से 10 फीसदी तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। 10 से 15 प्रतिशत के बीच यदि फीस बढ़ाते हैं तो उन्हें जिला समिति की मंजूरी लेना होगी।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में अब निजी स्कूल (Private Schools) अभिभावकों से मनमानी फीस (Fees) नहीं वसूल सकेंगे। इसके लिए प्रदेश की शिवराज सरकार ने नया नियम बना दिया है, जिसके तहत अब निजी स्कूल अपनी मर्जी से 10 फीसदी तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। इतना ही नही अगर स्कूल 10 से 15 प्रतिशत के बीच फीस बढ़ाते हैं तो इसके लिए उन्हें जिला समिति से मंजूरी लेनी पड़ेगी।

दरअसल, हर साल निजी स्कूलों (School) की फीस को लेकर चल रही मनमानी पर शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने नकेल कस दी है। स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) ने गजट नोटिफिकेशन (Gazette Notification) जारी किया है, जिसके तहत अब निजी स्कूल अपनी मर्जी से 10 फीसदी तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। 10 से 15 प्रतिशत के बीच यदि फीस बढ़ाते हैं तो उन्हें जिला समिति की मंजूरी लेना होगी।

फीस बढ़ाने पर देनी होगी जानकारी

इसके अलावा स्कूलों को नए शिक्षण सत्र में प्रस्तावित फीस का पिछला और अगला स्ट्रक्चर भी बताना होगा। यह नए सत्र से 90 दिन पहले जानकारी अपलोड करना होगी।यदि पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में 10 से अधिक और 15 प्रतिशत या उससे कम है तो जिला समिति को भेजना होगी, वह इस पर 45 दिन में निर्णय लेगी। यदि यह फीस वृद्धि (Fee Increase) 15 प्रतिशत से ज्यादा है तो जिला समिति 7 दिन में अपने अभिमत के साथ राज्य समिति को भेजेगी।

वही अगर निजी स्कूल फीस में बढ़ोत्तरी करते है तो राज्य समिति स्कूल प्रबंधन (State Committee School Management) और छात्रों (Student) या पालक संगठन पक्ष से भी चर्चा करेगी और उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। अगर निजी स्कूल प्रबंधन (Private School Management) या उसकी ओर से कोई भी व्यक्ति तय फीस के अलावा फीस लेते है और किसी छात्र, माता-पिता या अभिभावक द्वारा शिकायत होती है तो उस पर कार्रवाई होगी। कमेटी यह फीस वापस भी करवा सकेगी।विभाग का मानना है कि नए नियमों के लागू होने निजी शिक्षण संस्थानों के फीस स्ट्रक्चर पर ना सिर्फ सरकार का कंट्रोल रहेगा बल्कि अभिभावकों को भी राहत मिलेगी।

अभिभावकों पर दबाब नही डाल सकेंगे निजी स्कूल

इसके अलावा नए दिशा-निर्देश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन किसी भी छात्र या पालकों काे पुस्तकें, यूनिफार्म, टाई, जूते, कॉपी केवल चयनित विक्रेताओं से खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे।स्कूल प्रबंधन यूनिफॉर्म को छोड़कर किसी भी पाठ्य सामग्री पर स्कूल का नाम नहीं लिखेगा या लिखवाएगा। निजी स्कूल यदि यूनिफॉर्म में परिवर्तन करते हैं तो वह अगले तीन सत्रों के लिए मान्य होगी।