पुलिसकर्मियों-किसानों को सौगात, 2 नई नीति को मंजूरी, इस योजना में 2 वर्ष की वृद्धि, विस्तार से पढ़े शिवराज कैबिनेट के फैसले

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण क्षेत्र के परंपरागत कारीगरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करे। प्रत्येक जिले में 75 अमृत सरोवर बनना है, इनमें दान की राशि और सीएसआर के संसाधनों का उपयोग किया जाए।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 2 अगस्त मंगलवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में शिवराज कैबिनेट बैठक (Shivraj Cabinet Meeting Today)सम्पन्न हुई। इसमें स्कूली शिक्षा में तबादला नीति, देसी गाय पालने पर अनुदान, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने मास्टर ट्रेनिंग और नक्सल विरोधी अभियान में हॉक फोर्स की पुलिस कर्मियों को विशेष भत्ता, कर्मियों की नियुक्ति समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

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मंत्रि-परिषद ने राजभवन सचिवालय में गठित जनजातीय प्रकोष्ठ कार्यालयीन स्थापना एवं सचिवालयीन सहायक, सदस्यों की सेवा शर्तों तथा वार्षिक बजट एक करोड़ 5 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया।मंत्रि-परिषद द्वारा बाणसागर बहुउद्देशीय परियोजना नहर कार्य (यूनिट-2) लागत राशि 4977 करोड़ 88 लाख रूपये, सिंचाई क्षमता 2 लाख 98 हजार 844 हेक्टेयर की अंतिम बार छठवीं पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।

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इस मौके पर सीएम शिवराज ने मंत्रियों और अधिकारियों से”हर घर तिरंगा” अभियान की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त सभी स्थानों पर उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाए।मंत्रीगण के साथ 15 अगस्त के बाद चिंतन शिविर होगा।। अधिकारियों के साथ भी दो दिवसीय चिंतन शिविर होगा। मंत्रीगण के स्टाफ के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

यहां विस्तार से पढ़े शिवराज कैबिनेट के फैसले

स्कूल शिक्षा विभाग की नवीन स्थानांतरण नीति को मंजूरी

  • नवीन स्थानांतरण नीति सत्र 2023-24 से प्रभावी होगी। सभी संवर्गों के लिए स्थानांतरण प्रक्रिया 31 मार्च से 15 मई के मध्य पूरी कर ली जाएगी।
  • पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। स्वैच्छिक स्थानांतरण भी ऑनलाइन ही होंगे।रिलीविंग और ज्वाइनिंग की कार्यवाही ऑनलाइन होगी।
  • एक बार स्वैच्छिक स्थानांतरण होने के बाद विशेष परिस्थिति छोड़ कर 3 वर्ष तक स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा। सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई शाला शिक्षक विहीन न हो।
  • नवीन स्थानांतरण नीति में पहले प्रशासनिक स्थानांतरण और फिर स्वैच्छिक स्थानांतरण को प्राथमिकता दी जाएगी। नवीन नियुक्त शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में कम से कम 3 वर्ष और अपने संपूर्ण सेवाकाल के न्यूनतम 10 वर्ष कार्य करना होगा।
  • दस वर्ष या इससे अधिक अवधि से एक संस्था विशेषकर शहरी क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षक विहीन अथवा शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में पदस्थ किया जाएगा।
  • ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति 3 वर्ष शेष है अथवा गंभीर बीमारी या विकलांगता से पीड़ित है, उन्हें इस प्रक्रिया से मुक्त रखा जायेगा।
  • स्थानांतरण में वरीयता क्रम निर्धारित किया गया है। शिक्षकों को निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों की निजी पदस्थापना में पदस्थ नहीं किया जाएगा। उत्कृष्ट स्कूल, मॉडल स्कूल और CM Rise School स्कूलों में स्वैच्छिक स्थानांतरण नहीं होंगे।
  • प्राचार्य/सहायक संचालक या उससे वरिष्ठ पदों के स्वैच्छिक स्थानांतरण आवेदन ऑनलाइन लिए जाएंगे। उनका निराकरण ऑफ लाइन भी किया जा सकेगा। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के स्थानांतरण समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन से किए जाएंगे।

पुलिस कर्मियों को विशेष भत्ता

  • मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के नक्सल क्षेत्रों में पदस्थ विशेष आसूचना शाखा (SIB) के पुलिस कर्मियों को मासिक रूप से नक्सल विरोधी विशेष भत्ता तथा विशेष आसूचना शाखा (SIB) में नक्सल क्षेत्र में कार्यरत रहने की अवधि अनुसार आ-सूचना विशेष भत्ता आदेश जारी होने के दिनांक से स्वीकृत किया गया।
  • आरक्षक को 19 हज़ार, प्रधान आरक्षक और सहायक उप निरीक्षक को 25 हजार, उप निरीक्षक को 34 हज़ार और निरीक्षक को 38 हजार रूपये प्रतिमाह नक्सल विरोधी विशेष भत्ता दिया जायेगा।
  • भत्ता स्वीकृति पर प्रतिवर्ष 1 करोड 4 लाख 88 हजार रूपये का वार्षिक वित्तीय भार संभावित है।
  • नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में SIB हेतु विभिन्न संवर्ग के स्वीकृत 58 पदों में से वर्तमान में पदस्थ 33 शासकीय सेवकों को “नक्सल विरोधी विशेष भत्ते के रूप में प्रतिवर्ष 91 लाख 80000 रुपये तथा “आ-सूचना विशेष भत्ते” के रूप में प्रतिवर्ष 13 लाख 8 हजार रुपये इस प्रकार कुल 104 लाख 88 हजार रूपये की राशि देय होगी।
  • इससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पदस्थ SIB के शासकीय सेवकों का मनोबल बढ़ेगा तथा नक्सलियों की गतिविधियों का सटीक ऑकलन कर बेहतर नक्सल विरोधी ऑपरेशन हो सकेंगे।
  • मंत्रि-परिषद ने नक्सल विरोधी अभियान में हॉक फोर्स के पुलिसकर्मियों को पूर्व से स्वीकृत “नक्सलाइट ऑपरेशन रिस्क अलाउन्स” मासिक रूप से दिये जाने के साथ अतिरिक्त रूप से नक्सल विरोधी विशेष भत्ता तथा हॉक फोर्स में कार्यरत रहने की अवधि अनुसार “हॉकफोर्स भत्ता” स्वीकृत किया। हॉक फोर्स के पुलिसकर्मियों को हॉक फोर्स भत्ता प्रतिनियुक्ति की अवधि के हिसाब से देय होगा।
  • इसके अनुसार 12 से 24 माह तक का कार्यकाल पूरा करने वाले पुलिसकर्मियों को एक हजार रूपये प्रतिमाह, 24 से 36 माह तक का कार्यकाल पूरा करने वाले को 2 हजार रूपये प्रतिमाह, 36 से 48 माह तक का कार्यकाल पूरा करने वाले को 3 हजार रूपये प्रति माह और 48 से 60 माह तक का कार्यकाल पूरा करने वाले पुलिसकर्मियों को 4 हज़ार रूपये प्रति माह भत्ता दिया जाएगा।
  • अतिरिक्त नक्सल विरोधी विशेष भत्ता पर 18 करोड़ 77 लाख 80 हजार और हॉक फोर्स भत्ते पर 5 करोड़ 35 लाख 89 हजार रूपये इस प्रकार कुल 23 करोड़ 73 लाख 69 हज़ार रूपये का व्यय भार आयेगा।
  • इससे हॉक फोर्स में वर्तमान में कार्यरत 1045 पुलिसकर्मियों को प्रतिवर्ष 9 करोड़ 78 लाख रूपये के स्थान पर प्रतिवर्ष लगभग 33 करोड़ 15 लाख रूपये के अलाउन्स/भत्ते प्राप्त होंगे।
  • इससे नक्सल क्षेत्रों में कर्त्तव्यस्थ पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा तथा नक्सल विरोधी ऑपरेशन बेहतर ढंग से क्रियांवित होंगे।

मध्यप्रदेश प्राकृतिक कृषि विकास योजना

  • मंत्रि-परिषद ने राज्य में प्राकृतिक कृषि पद्धति के प्रचार-प्रसार के लिये प्रदेश के कृषकों को एक देशी गाय के पालन पर अनुदान तथा प्रत्येक जिले के 100 ग्रामों में प्राकृतिक खेती प्रारंभ करने के उद्देश्य से नवीन “मध्यप्रदेश प्राकृतिक कृषि विकास योजना” संपूर्ण मध्यप्रदेश में क्रियान्वित किए जाने का निर्णय लिया।
  • योजना के अंतर्गत 52 जिलों में 100 ग्रामों का चयन कर कुल 5200 ग्रामों में प्राकृतिक खेती प्रारंभ की जाएगी। प्रत्येक ग्राम से 5, इस प्रकार कुल 26 हजार प्राकृतिक कृषि करने वाले किसानों का चयन कर उन्हें गौ-पालन के लिए अनुदान दिया जाएगा।
  • अनुदान के रूप में 900 रूपए प्रतिमाह की सहायता दी जाएगी। प्राकृतिक कृषि करने वाले कृषकों का एक पोर्टल/एप तैयार किया जाएगा।
  • इस पर पंजीकृत कृषकों को मास्टर ट्रेनर एवं ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षक के रूप में कार्य करने का मानदेय 1 हजार रूपए प्रतिमाह दिया जाएगा और वे प्राकृतिक प्रेरक कहलाएंगे।
  • प्रशिक्षण पर 400 रूपए प्रति कृषक प्रति दिन का व्यय प्रावधानित किया गया है। योजना के क्रियान्वयन के लिए 39 करोड़ 50 लाख रूपए की आवश्यकता होगी, जो राज्य शासन द्वारा वहन की जाएगी।
  • प्रशासकीय विभाग ने प्रथम चरण में 26 हजार कृषकों के लिए 900 रूपए प्रतिमाह के मान से 1 वर्ष के लिए 28 करोड 08 लाख रूपए के व्यय की स्वीकृति दी है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ विक्रेता ऋण योजना में 2 वर्ष की वृद्धि

  • मंत्रि-परिषद् ने मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ विक्रेता ऋण योजना की अवधि में 2 वर्ष (31 मार्च 2024 तक) की वृद्धि करने का निर्णय लिया।
  • योजना में वर्ष 2022-23 के लिए 2 लाख और वर्ष 2023-24 के लिए 2 लाख हितग्राहियों को लाभांवित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया हैं।
  • योजना 28 जुलाई 2020 से लागू की गई थी। वर्ष 2020-21 तथा 2021-22 में कुल 3 लाख 14 हजार 487 ग्रामीण पथ विक्रेता हितग्राहियों को बैंकों द्वारा प्रति हितग्राही 10 हजार रूपये का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया गया है।

नवकरणीय ऊर्जा नीति-2022 को मंजूरी

  • मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में पूर्व में लागू सौर ऊर्जा आधारित विदयुत उत्पादन नीति-2011. पवन ऊर्जा आधारित विदयुत उत्पादन नीति – 2012, बायोमास आधारित विदयुत उत्पादन नीति-2012 तथा लघु जल ऊर्जा आधारित विद्युत उत्पादन नीति-2011 को समाप्त कर उनके स्थान पर नवकरणीय ऊर्जा नीति-2022 को मान्य किये जाने का निर्णय लिया।
  • इसके आधार पर आगामी नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विकास प्रदेश में किया जाएगा। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए आदर्श स्थल है।
  • प्रदेश में प्रचुर मात्रा में भूमि, सोलर आइसोलेशन, मोडरेट विन्ड स्पीड, बायोमास जल स्त्रोत आदि नैसर्गिक रूप से उपलब्ध हैं। राज्य में उपलब्ध इन संसाधनों से राज्य की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता की आपूर्ति के इतर अन्य राज्यों को भी नवकरणीय ऊर्जा की मांग पूरी की जा सकती है, जो राज्य के लिये आय का स्त्रोत हो सकती है।
  • इसके अतिरिक्त इस वृहद लक्ष्य को पूरा करने के लिए राज्य में नवकरणीय ऊर्जा आधारित कलपुर्जीं की निर्माण इकाइयों के विकास की भी पर्याप्त सम्भावना है। पूर्व में जारी विभिन्न नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोत आधारित नीतियों के स्थान पर एकीकृत मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा नीति की आवश्यकता है।
  • इस नीति में सौर, पवन, लघु जल, बायोमास, हायब्रिड तथा स्टोरेज ऊर्जा आधारित परियोजनाओं के विकास हेतु व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है।
  • साथ ही प्रदेश में ही नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक उपकरण कलपुर्जो के विकास के लिए भी प्रावधान एवं प्रोत्साहन आदि प्रस्तावित किए गए हैं। साथ ही नीति में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को भी महत्व दिया गया है, जिसे भविष्य की ऊर्जा माना जा रहा है।

ग्रामीण पर्यटन परियोजना में होम-स्टे के लिये अनुदान की स्वीकृति

  • मंत्रि-परिषद ने पर्यटन विभाग की ग्रामीण पर्यटन परियोजना अंतर्गत चयनित ग्राम में होम-स्टे निर्माण/उन्नयन के लिये अनुदान की स्वीकृति दी।
  • स्वीकृति अनुसार हितग्राही को नवीन होम-स्टे की निर्माण लागत का 40 प्रतिशत अनुदान अधिकतम 2 लाख रूपये और होम-स्टे उन्नयन के लिये लागत का 40 प्रतिशत अनुदान अधिकतम 1 लाख 20 हजार रूपये देय होगा।
  • (जो कम हो) अनुदान दो किस्तों में देय होगा। ग्रामीण पर्यटन अंतर्गत स्थापित होम-स्टे को मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा संचालित 4 योजनाओं में से नियमानुसार संबंधित योजना में पंजीयन कराना होगा।
  • परियोजना के प्रथम चरण में लगभग 100 ग्रामों में पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश का अनुभव कराने के लिए पर्यटन गतिविधियाँ संचालित की जायेगी।
  • इसमें प्रति ग्राम लगभग 10 परिवार के हिसाब से 1000 परिवारों में पर्यटकों को आवासीय सुविधा प्रदान करने के लिये 1000 होम-स्टे कक्षों का निर्माण/उन्नयन किया जायेगा।
  • इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 20 हजार ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिलेगा। ग्रामीण पर्यटन परियोजना के प्रमुख घटकों में ठहरने की उत्तम व्यवस्था, स्थानीय भोजन, कला एवं हस्तकला, लोक संगीत एवं नृत्य, स्थानीय खेलकूद और कौशल उन्नयन शामिल है।
  • प्रथम चरण के बाद द्वितीय चरण में आवश्यकतानुसार नवीन ग्रामों का चयन ग्रामीण पर्यटन परियोजना में किया जा सकेगा।

परिसम्पत्ति का निर्वर्तन

  • मंत्रि-परिषद ने दमोह में राजस्व विभाग की प्लॉट नं. 195 वार्ड नं. 2. रानी दुर्गावती वार्ड स्थित भूमि परिसम्पत्ति शीट क्रमांक 56-57 कुल या 2615.22 वर्गमीटर के निर्वर्तन के लिए H-1 निविदाकार की उच्चतम निविदा 5 करोड़ 11 लाख रूपये जो कि रिजर्व मूल्य 5 करोड़ 9 लाख रूपये से अधिक है का अनुमोदन करते हुए उसे विक्रय करने एवं H-1 निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100% जमा करने के बाद अनुबंध रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर द्वारा किये जाने का निर्णय लिया।
  • मंत्रि-परिषद द्वारा इंदौर में राजस्व विभाग की तलावली चान्दा के पास स्थित भूमि परिसम्पत्ति सर्वे नंबर 4/2 कुल रकबा 7690 वर्गमीटर के लिये H-1 निविदाकार की उच्चतम निविदा राशि रु.10 करोड़ रुपये जो कि रिजर्व मूल्य 2 करोड़ 1 लाख रूपये से अधिक है, का अनुमोदन करते हुए उसे विक्रय करने एवं H- निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100% जमा करने के बाद अनुबंध/रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर द्वारा किये जाने का निर्णय लिया गया।
  • मंत्रि-परिषद ने भोपाल में राजस्व विभाग की खसरा क्र. 169, ग्राम हिनोतिया आलम, तहसील कोलार स्थित भूमि परिसम्पत्ति कुल रकबा 12500 वर्गमीटर के निर्वर्तन के लिये H- निविदाकार की उच्चतम निविदा 8 करोड़ 63 लाख 63 हजार 63 रूपये, जो कि रिजर्व मूल्य 6 करोड़ 32 लाख रूपये से अधिक है, का अनुमोदन करते हुए उसे विक्रय करने एवं H-1 निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100% जमा करने के बाद अनुबंध / रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर किये जाने का निर्णय लिया गया।
  • मंत्रि-परिषद ने नरसिंहपुर में लोक निर्माण विभाग की नजूल भूमि शासकीय माध्यमिक स्कूल, प्लॉट न. 21/5, वार्ड क्र. 14 शीट क्रमांक 22 कुल रकबा 620.63 वर्गमीटर के निर्वर्तन के लिये H-I निविदाकार की उच्चतम निविदा 3 करोड़ 59 लाख 46 हजार रूपये, जो कि रिजर्व मूल्य 2 करोड़ 67 लाख रूपये से अधिक है, का अनुमोदन करते हुए उसे विक्रय करने एवं H-1 निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100% जमा करने के बाद अनुबंध / रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर द्वारा किये जाने का निर्णय लिया।
  • मंत्रि-परिषद ने ग्वालियर में खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की टी4, टी5 वेयरहाउस, पड़ाव चौराहा, स्थित भूमि एवं भवन परिसम्पत्ति खसरा क्रमांक 304 कुल रकबा 1987.31 वर्गमीटर के निर्वर्तन के लिये H-1 निविदाकार द्वारा उच्चतम निविदा राशि 17 करोड़ 20 लाख रूपये, जो कि रिजर्व मूल्य राशि 6.96 करोड़ रूपये से अधिक है, का अनुमोदन करते हुए उसे विक्रय करने एवं H-1 निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100% जमा करने के बाद अनुबंध / रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर द्वारा किये जाने का निर्णय लिया।

सीएम शिवराज ने कैबिनेट मंत्रियों को दिए ये निर्देश

  • मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्म-दिवस 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़े के रूप में मनाया जाना है। सभी विभाग इसके लिए आवश्यक कार्य-योजना बनाए।उनकी मंशा के अनुरूप जन-कल्याण के लिए संचालित कार्यक्रम और योजनाओं में प्रत्येक पात्र व्यक्ति को समय-सीमा में लाभ उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना है।
  • विकास और जन-कल्याण के कार्यक्रमों में शत-प्रतिशत उपलब्धि दर्ज करना हमारा लक्ष्य है। इसके लिए प्रतिदिन का लक्ष्य निर्धारित कर योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। योजनाओं में लक्ष्य प्राप्ति की प्रति सप्ताह, पाक्षिक और मासिक आधार पर समीक्षा हो।
  • सभी विभागों के प्रमुख सचिव, मंत्री से समन्वय कर कार्य-योजना विकसित कर गतिविधियाँ संचालित करें। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, स्वामित्व, किसान क्रेडिट कार्ड आदि योजनाओं के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। विभागीय अधिकारी समय-सीमा में लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करें।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम किसान सम्मान निधि आदि योजनाओं में अब तक की हमारी उपलब्धि लगभग शत-प्रतिशत रही है। अधिकांश योजनाओं में उपलब्धि 90 प्रतिशत से अधिक है।
  • भविष्य में भी योजनाओं के क्रियान्वयन में हमें शीर्ष पर रहना है। योजनाओं के लक्ष्य प्राप्ति की प्रगति के संबंध में मुख्यमंत्री स्तर पर नियमित बैठकें होंगी। विभागीय मंत्रियों का दायित्व है कि वे उनके विभाग में संचालित योजनाओं का समय-सीमा में क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
  • मंत्रीगण विभागीय योजनाओं के संबंध में सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहें। साथ ही आकांक्षी जिलों के प्रभारी मंत्री जिलों में रात्रि विश्राम अवश्य करें।
  • सभी योजनाओं में डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आधार कार्ड का दुरूपयोग न हो। बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन की प्रक्रिया आरंभ की जाए।
  • प्रारंभिक स्तर पर शासकीय कार्यालयों और शासकीय विद्यालयों में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में प्रक्रिया आरंभ करें।  GST का दायरा बढ़ाने के लिए राजस्व संग्रहण से संबंधित विभिन्न विभाग विशेष रूप से प्रयास करें।
  • शहरों में पेयजल सहित जनोपयागी सुविधाएँ लोगों को सरलता से प्राप्त हों, इस ओर ध्यान देना आवश्यक है। शहरी क्षेत्र में स्वनिधि योजना के साथ विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों से जीवंत संवाद बनाए रखना जरूरी है।
  • नगरीय नियोजन में यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रमिक वर्ग के रहने की व्यवस्था शहरों में सुगम स्थल पर हो। पुलिस थाने बनाते समय थाने के ऊपर ही पुलिसकर्मियों के आवास की व्यवस्था भी की जाए।
  • लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था हो। सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएँ, जो आने वाले मरीजों, उनके परिजन और सहयोगियों को आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराएँ।
  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण क्षेत्र के परंपरागत कारीगरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करे। प्रत्येक जिले में 75 अमृत सरोवर बनना है, इनमें दान की राशि और सीएसआर के संसाधनों का उपयोग किया जाए।
  • अमृत सरोवरों का शुभारंभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को जोड़ते हुए उत्साह और उल्लास के साथ करें। जिन नगरों और ग्रामों में गौरव दिवस होना शेष है, वहाँ भी तिथि निर्धारित कर आयोजन किए जाएँ। साथ ही अस्पतालों, शालाओं, महाविद्यालयों से समाज के जुड़ाव को बढ़ाने के लिए भी पहल करना जरूरी है।
  • आँगनबाड़ियों के संचालन से समाज को जोड़ने के लिए गतिविधियाँ संचालित करें। आँगनबाड़ियों के लिए खिलौने देने या समाज के लोगों द्वारा अन्य सामग्री उपलब्ध कराने अभियान का रूप दिया जाए। सभी शालाओं में शिक्षकों की फोटो लगवाना भी सुनिश्चित किया जाए। महाविद्यालयों की रैकिंग की व्यवस्था हो।
  • प्रदेश में खेल की संस्कृति को विकसित करने के लिए विशेष प्रयास आवश्यक हैं। खेल, जीवन में उत्साह और आनंद का संचार करते हैं। खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए समन्वित कार्य-योजना विकसित की जाए।
  • शन कार्ड के परीक्षण का अभियान चला कर फर्जी राशन कार्ड निरस्त किए जाएँ। साथ ही राशन दुकान आवंटन की पारदर्शी प्रक्रिया बनाकर दुकानें आवंटित करने कार्य-योजना बनाई जाए। राशन दुकानों को राशन माफिया से मुक्त करना जरूरी है।
  • ईज ऑफ डूईंग बिजनेस में वैश्विक स्तर के मापदण्डों का राज्य में क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
  • प्रदेश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर “एक जिला-एक उत्पाद” की सामग्री के स्टॉल लगाए जाएँ। प्रदेश में उत्पादित सामग्री की बिक्री को प्रोत्साहित करने त्यौहारों पर विशेष अभियान चलाया जाए। स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की खपत बढ़े इस उद्देश्य से जन-सामान्य को प्रेरित करना आवश्यक है।
  • वर्ष 2023 में मिलेट मिशन में विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जाना है। जन-सामान्य को कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा जैसी फसलों के लाभ की जानकारी देकर इसके उत्पादन और उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है।