शिवराज को छोड़कर हर मंत्री की सीट फंसी, एक दिन भी नहीं छोड़ा क्षेत्र

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भोपाल। प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने ज्यादातर मंत्रियों को फिर से चुनाव मैदान में उतारा है, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को छोड़कर एक भी मंत्री ऐसा नहीं है, जिसने एक दिन के लिए भी विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर दूसरे प्रत्याशी के लिए वोट मांगने गया हो। हर मंत्री की सीट फंसी हुई है।  सीट निकालने के लिए हर मंत्री की ओर से पार्टी के बड़े नेताआें की चुनावी सभा कराने की मांग की है। जिनमें से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हर मंत्री के चुनाव क्षेत्र में सभाएं ली हैं। 

प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने का दावा कर रही शिवराज सरकार के ज्यादातर मंत्री चुनाव में संघर्षपूर्ण स्थिति में हैं । मुख्यमंत्री शिवराज को छोड़कर एक भी मंत्री ऐसा नहीं है जो अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। शिवराज के आधा दर्जन करीब मंत्री ऐसे हैं, जो अन्य चुनावों में पार्टी के लिए चुनावी सभाएं करते हैं और स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल होेते हैं। लेकिन इन मंत्रियों में से एक भी मंत्री चुनाव की घोषणा होने के बाद अपने चुनाव क्षेत्र से बाहर नहीं निकला। दो दिन पहले संघ और भाजपा ने चुनाव में प्रत्याशियों की जीत की संभावना को लेकर मंथन किया है, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि शिवराज सरकार के मौजूदा मंत्रियों में से आधा दर्जन की हालत खराब हैं। जिन पर हार का खतरा मंडरा रहा है, जबकि कुछ मंत्रियों को कड़ें संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। 

इन मंत्रियों को सीट बचाने की चिंता 

भितरघात एवं बागियों की वजह से मंत्री जयंत मलैया, दीपक जोशी, शरद जैन, सुरेन्द्र पटवा, जयभान सिंह पवैया, रुस्तम सिंह, भूपेन्द्र सिंह, राजेन्द्र शुक्ल, रुस्तम सिंह की सीट पर कड़ा चुनावी संघर्ष है। जबकि गौरीशंकर विसेन, उमाशंकर गुप्ता, गोपाल भार्गव, नारायण सिंह कुशवाह, बालकृष्ण पाटीदार समेत आधा दर्जन मंत्रियों को भी कड़ी टक्कर मिल रही है। 

बागियों ने बिगाड़ा खेल

इस बार चुनाव में भाजपा का बागियों ने खेल बिगाड़ दिया है। जिन मंत्रियों पर हार खतरा मंडराया हुआ है, जिन्हें कड़ी टक्कर मिल रही है, वहां भाजपा के बागी ही चुनाव मैदान में है। दमोह और पथरिया में रामकृष्ण कुसमारिया की वजह से मलैया पर हार का खतरा है। जबलपुर में धीरज पटेरिया की वजह से मंत्री शरद जैन की चुनाव में स्थिति नाजुक है। इसी तरह भोजपुर में सुरेन्द्र पटवा को भितरघात का खतरा है। मुरैना में रुस्तम सिंह का चुनाव जातिवाद में उलझ गया है। ग्वालियर में नारायण सिंह कुशवाह की सीट समीक्षा की वजह से संकट में है।

जैन समाज के चारों मंत्रियों को खतरा

शिवराज सरकार में जैन समाज से 4 मंत्री हैं, जिन पर हार का खतरा मंडरा रहा है। उज्जैन से पारस चंद्र जैन को कांग्रेस प्रत्याशी से कड़ी टक्कर मिल ही है। पारस को भितरघात का सबसे ज्यादा खतरा है। इसी तरह दमोह विधानसभा सीट पर बागी नेता रामकृष्ण कुसमारिया के निर्दलीय मैदान में उतरने की वजह से मंत्री जयंत मलैया पर हार का खतरा मंडरा रहा है। वहीं जबलुपर में भाजपा के बागी धीरज पटेरिया ने मंत्री शरद जैन की नींद उड़ा दी है। जबकि भोजपुर से चयनित सुरेद्र पटवा का क्षेत्र में खुलकर विरोध हो रहा है।

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