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भोपाल। तीन प्रदेशों में भाजपा की हार के बाद अब तीनों प्रदेशों के मुखियाओं को केंद्र में फिलहाल नहीं भेजा जाएगा। मीडिया रिपोर्ट में इस बात का दावा किया जा रहा है। लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले देश के ओबीसी वर्ग को साधने के लिए भारतीय जनता पार्टी चौहान को लोकसभा चुनाव से पहले बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। मध्य प्रदेश में शिवराज की लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उनके इस अंदाज को भुनाना चाहती है। हालांकि, अभी तक इस उनकी भूमिको को लेकर किसी भी तरह की ओपचारिक घोषणा नहीं की गई है। 

शिवराज सिंह ऐसे हैं जिन्हें पार्टी मध्य प्रदेश के बाहर भी उपयोग करने के बारे में सोच रही है। पार्टी उनका उपयोग देश में ओबीसी मतदाताओं को लुभाने के लिये करना चाहती है। शिवराज सिंह आने वाले दिनों में बिहार की राजधानी पटना में एक ओबीसी रैली को संबोधित करने वाले हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कुछ दिनों पहले संवाददाताओं से कहा था कि वह राज्य में ही रहेंगे और अगले लोकसभा चुनाव के लिये सक्रियता से काम करेंगे।

चौहान ने अपनी मंशा जाहिर करते हुए ट्वीट किया, “हम सभी मिलकर मध्यप्रदेश के विकास के लिए संघर्ष करेंगे। आप सभी से मिलने मैं 24 दिसंबर से चार दिन के लिए बुधनी आ रहा हूं। इसके बाद भी मुलाकात का क्रम एक-एक गांव पहुंचने तक जारी रखूंगा।” शिवराज सिंह चौहान भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य भी हैं।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि वसुंधरा राजे व रमन सिंह का उनके राज्यों में ज्यादा उपयोग है। विधानसभा चुनाव के परिणाम एवं राज्य में कांग्रेस की नई सरकार बनने के बाद वसुंधरा राजे ने जनसम्पर्क कार्यक्रम शुरू किया है। वसुंधरा राजे अपने इस कार्यक्रम के क्रम में चुरू के भींचरी गांव गई थी और वीर जवान शहीद किशन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।