तो क्या योजना बंदी से पटरी पर आएगी अर्थव्यवस्था, सरकार ने की तैयारी शुरू

आईपीएल

भोपाल।

कोरोना(corona) संकटकाल में देशव्यापी लॉकडाउन(lockdown) के बीच देश के साथ-साथ मध्यप्रदेश(madhya pradesh) की अर्थव्यवस्था(economy) भी चरमरा गई है। सभी कामकाज ठप पड़ने के बाद करो से आय(earn) होने भी लगभग बंद हो गए हैं। प्रदेश में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है जिसकी बात खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान(CM Shivraj singh chouhan) कई बार कर चुके हैं। ऐसे में सरकार इस आर्थिक संकट से उबरने के लिए नए रास्ते तलाश रही है। जिसमें ‘योजना बंदी’ को एक बड़े विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। खबरों की मानें तो इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी शुरू की जा चुकी है। जिसके द्वारा सरकार द्वारा संचालित योजना को बंद करने पर विचार किया जाएगा। कोई अति महत्वपूर्ण योजनाएं चालू रहेंगी इसके अलावा कम महत्वपूर्ण योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी चल रही है।

खबरों की माने तो मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव कार्यालय एवं वित्त विभाग को निर्देश दिए हैं कि जो अत्यावश्यक श्रेणी की योजनाएं हैं उनके बारे में बताएं। गैर जरूरी सभी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है। इसी बीच मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने सभी अपर मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर योजनाओं पर विचार कर गैर जरूरी एवं जरूरी योजनाओं का खाका खींचने को कहा है। इसे बीच गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने योजना बंदी के सवाल पर कहा कि इसको लेकर अभी कोई स्पष्ट निर्देश नहीं जारी किए गए हैं। किंतु सरकार इस पर जल्दी फैसला से ले सकती हैं।

कोरोना महामारी से देश पीड़ित है। ऐसी स्थिति में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने को लेकर सरकार कई तरह के विकल्पों की तलाश में है। प्रदेश में तालाबंदी होने की वजह से किसानों व मजदूरों के लिए सरकार द्वारा बड़े निर्णय लिए जाने के बाद कई योजनाओं की राशि में कटौती पहले ही की जा चुकी है। वही कोरोना संकट से जूझने के लिए सरकार ने अपना खजाना खाली कर दिया है। ऐसी स्थिति में अगर निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया जाता है तो माना जा रहा है कि संबल योजना भी बंद की जा सकती है। इसके साथ ही देश में कोरोना के संकट को लेकर केंद्र सरकार का बजट(budget) भी चरमरा गया है। जिस कारण से केंद्र सरकार(central government) के स्तर पर भी राजस्व संग्रहण में कमी आई है। वहीं वर्ष 2019-20 के बजट पुनरीक्षण में प्रदेश को मिलने वाले केंद्रीय कर में करीब 14 हजार 400 करोड रुपए की कमी की गई है। ऐसी स्थिति में प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था को थोड़ा सा बल देने के लिए शिवराज सरकार कम महत्वपूर्ण योजनाओं को बंद करने की तैयारी में है।

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