स्व सहायता समूहों को लेकर शिवराज सरकार का बड़ा ऐलान

उन्होंने कहा था कि समूह को लोन पर 12 से 15% ब्याज देना पड़ता है जबकि अब उन्हें सिर्फ 4% ब्याज अदा करना होगा जबकि शेष ब्याज की रकम सरकार द्वारा भरी जाएगी।

स्व सहायता समूह

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में शिवराज सरकार (shivraj government) द्वारा सभी वर्गों के लोगों को बड़ी राहत दी जा रही है। इसी कड़ी में स्व सहायता समूह (self help group) को भी सशक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल (ramkhilawan patel) ने प्रदेश में स्व सहायता समूह को सशक्त बनाने की बात कही है।

दरअसल पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल ने कहा कि संस्था समूह द्वारा निर्मित उत्पादों के मार्केटिंग की उचित व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार प्रदान करने के प्रयास किए जाएंगे।

इतना ही नहीं राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल स्व सहायता समूह के मुख्य सदस्य से बात कर रहे थे। साथ ही राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि राज्य सरकार एक जिला-एक उत्पाद को प्रोत्साहित कर रही है। जिसका सीधा सीधा फायदा स्व सहायता समूह को होगा। पटेल ने कहा कि प्रदेश की संस्कृति बेहद समृद्ध रही है यहां की कारीगरी देश भर में विख्यात है। इसके साथ ही राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल ने स्व सहायता समूह के सदस्यों से अपने उत्पादों को अधिक से अधिक बाजारों में ले जाने की और मार्केटिंग (marketing) की बात कही है।

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बता दे कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि स्व सहायता समूह का प्रदेश में सशक्त और सुदृढ़ होना महिला सशक्तिकरण और प्रदेश के विकास के लिए हितकारी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chauhan) ने स्व सहायता समूह के लिए बड़ी घोषणा भी की थी। सीएम शिवराज (cm shivraj) ने स्व सहायता समूह के लोन पर 11 फ़ीसदी लोन (loan) माफ किए थे। उन्होंने कहा था कि समूह को लोन पर 12 से 15% ब्याज देना पड़ता है जबकि अब उन्हें सिर्फ 4% ब्याज अदा करना होगा जबकि शेष ब्याज की रकम सरकार द्वारा भरी जाएगी।

इसके साथ ही उन्होंने कोरोना काल में मास्क, सैनिटाइजर बनाने वाले समूह की महिलाओं से आव्हान किया था कि हर महीने करीब 150 करोड रुपए अलग-अलग समूहों के खाते में डाले जाएंगे। इसका सीधा-सीधा फायदा महिला सशक्तिकरण की ओर होगा और हर महिलाओं को 10000 महीने की आमदनी बढ़ेगी।

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