सुषमा स्वराज को यादकर भावुक हुई ताई, बोली-‘मेरी एक साथी मुझसे छूट गई’

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इंदौर।आकाश धौलपुरे।

अपने ओजस्वी विचारों और वाणी की वीरांगना देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन लंबी बीमारी के बाद ह्रदयघात के कारण हो गया। इंदौर में पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि 6 अगस्त का दिन आंनद का दिन के रूप में मनाया जा रहा था कि अचानक सिर पर किसी ने पत्थर गिरा दिया हो। ताई ने कहा कि मेरे लिये व्यक्तिगत वेदना इसलिए है कि हम दोनों साथ रहते है लेकिन अब मेरा एक साथी मुझसे पीछे छूट गया और मैं अकेली पड़ गई। हम दोनों की दोस्ती बहुत अच्छी थी हालांकि वो उम्र छोटी जरूर थी लेकिन कार्य कुशलता में बहुत बड़ी थी। हम जब भी मिलते थे तो सामान्य महिलाओ की तर्ज पर घरेलू बात हुआकरती थी साथ ही राजनीति की बाते हुआ करती थी। 

ताई ने कहा कि राजनीति में उनसे बहुत सीखा। पहले तो उनका राजनीति का जो अभ्यास प्रेरणादायी है वही उनकी स्मृति भी। संसद में वो  किसी की घटना को बताती थी तो उन्हें तारीख वार तक याद रहता था। वो जब भी संसद में रहती थी फिर हम विपक्ष में बैठे हो पक्ष के वो ऐसे तीखे हमले करती थी कि दूसरों की बोलती बंद हो  जाती थी। वो जब विदेशों में बात करती थी तो ऐसा लगता था कि मानो भारत की आवाज हो। वो दिल से बोलती थी। वो लंबे समय से बीमार थी लेकिन बावजूद इसके उन्होंने जिद और हिम्मत के साथ विदेश मंत्री का दायित्व संभाला। संगठन की बात को वो तुरंत मानती थी संगठन कहता था कि यहां सांसद का चुनाव लड़ा यहां से मुख्यमंत्री का दायित्व संभालो। हर दायित्व को  वो बखूबी निभाती थी।

लड्डू बनने का इंतजार करती रही सुषमा 

ताई ने सुषमा स्वराज को याद कर उन बातों को भी साझा किया जिससे दुनिया अब तक मरहूम थी। ताई ने बताया कि एक समय 6 – 7 दिन के लिए  राजनीतिक सफर पर दोनों को जाना था। उस वक्त सुषमा स्वराज उनके घर आई क्योंकि उन्हें साथ मे जाना था इसलिए वो जल्द ही जाने की बात करने लगी। इसी दौरान ताई के बेटे ने लड्डू बनाने की जिद की तब ताई ने सुषमा स्वराज से कहा था आप रुके मैं पहले लड्डू बनाउंगी उसके बाद ही चलेंगे। इस दौरान सुषमा स्वराज ताई का 1 घण्टे तक इंतजार करती रही आखिर में जब लड्डू तैयार हो गए तब कार्यक्रम के लिए घर से बाहर निकले। इसके बाद सुषमा स्वराज ने कहा कि ताई एक राजनीतिज्ञ होने के साथ ही घरेलू महिला भी है जो अपने बच्चो का पूरा ध्यान रखती है। इसके अलावा लोकसभा स्पीकर ने यादों का ताज करते हुए बताया कि एक बार सुषमा स्वराज से ये पूछा था कि वो अपने पति याने श्रीमान स्वराज के लिए समय कैसे निकाल पाती है तब सुषमा स्वराज ने जबाव दिया कि हम दोनों ने एक बात तय कर रखी थी कि हम जहां भी जैसे व्यस्त होंगे लेकिन दोपहर की चाय एक साथ पीयेंगे और अक्सर वो ऐसा करती थी। 

पिछली दिल्ली यात्रा में सुषमा से मिली थी ताई

पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने बताया कि सुषमा स्वराज एक कृततवान महिला थी और पिछली बार जब वो दिल्ली में थी तब वो उनसे मिलने गई। तब तबीयत के अलावा अन्य विषयों पर उनसे बात हुई थी। ताई ने दुखी मन से बताया कि जब वो उनके पास से लौट रही थी तब मैंने कहा था कि मैं फिर आऊंगी उस वक्त सुषमा स्वराज ने कहा था अब मैं आपसे मिलने आऊंगी लेकिन अंततः वो बहुत छोटी उम्र में दुनिया को अलविदा कह गई। 

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