भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। कृषि बिल पर बड़ा फैसला सुनाते हुए आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने तीनों कृषि कानून के अमल पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने इसी के साथ चार सदस्यों की एक कमेटी बनाने का आदेश भी दे दिया  है। सरकार और किसानों के बीच लंबे वक्त से चल रही बातचीत का कोई हल ना निकलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला आया है।

किसानों द्वारा लगातार कृषि कानूनों विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों की आपत्ति को समझने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी भी बना दी है। इस चार सदस्यीय कमेटी में भूपिदर सिंह मान, अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, डॉ प्रमोद कुमार जोशी, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, अशोक गुलाटी, कृषि अर्थशास्त्री तथा अनिल धनवत, शिवकेरी संघटना, महाराष्ट्र सम्मिलित होंगे। इसके बाद अटॉर्नी जनरल की ओर से कमेटी बनाने का स्वागत किया गया है। कृषि कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि समिति इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। हम कानूनों को निलंबित करने की योजना बना रहे हैं लेकिन ये अनिश्चितकाल के लिए नहीं होगा।

सरकार की तरफ से कही गई ये बात

आज सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हरीश साल्वे के आरोप पर ध्यान दिया, जिसमें कहा गया है कि प्रतिबंधित संगठन इस प्रदर्शन को फंडिंग कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि किसान आंदोलन में खालिस्तानी तत्वों की घुसपैठ हो चुकी है। 26 जनवरी को किसानों द्वारा प्रस्तावित किसान ट्रेक्टर मार्च को लेकर भारत सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि दिल्ली में गणतंत्र दिवस के कारण उन्हें राजधानी में घुसने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। इस दलील पर पर चीफ जस्टिस ने पूछा  कि क्या वे किसान आंदोलन में खालिस्तानी तत्वों के शामिल होने की पुष्टि करते हैं ? अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हां वे इसकी पुष्टि करते हैं। इस पर चीफ जस्टिस द्वारा एटॉर्नी जनरल से इस बारे में हलफनामा दायर करने को कहा गया। एटॉर्नी जनरल ने कहा कि बुधवार को हलफनामा और आईबी की रिपोर्ट दोनों कोर्ट में पेश कर दी जाएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसे पुलिस पर ही छोड़ दिया जाए, हमें इसका निर्णय लेने का अधिकार नहीं।

सोमवार को लगाई थी सरकार को फटकार

इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट  ने किसान आंदोलन(Farmers Protest) को लेकर हुई सुनवाई में कहा था कि हम कानून सस्पेंड भी कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र की मोदी सरकार के विवाद पर निपटने के फैसले पर नाराजगी जताई और पूछा था कि क्या वह कानून को स्थगित करती है या फिर वह इस पर रोक लगा दें। साथ ही अदालत ने किसानों की चिंताओं को कमेटी के सामने रखे जाने की जरूरत के बारे में भी कहा था।