लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के सर्वे में सामने आए इन नेताओं के नाम

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भोपाल। मध्य प्रदेश में लोकसभा प्रत्याशी का चुनाव करने के लिए कांग्रेस एक एनजीओ से सर्वे करवा रही है। आम चुनाव में महज 90 दिन बचे हैं ऐसे में उम्मीदवारो को प्रचार और रैली करने का पर्याप्त समय मिले कांग्रेस ने कवायद तेज करदी है। फिलहाल पार्टी सूत्रों के मुताबिक सर्वे में  भिण्ड-दतिया सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र के लिए सर्वे होने की बात सामने आई है। इस सीट से कई नाम भी उजागर हुए हैं। जिनके नाम पर पार्टी लोकसभा चुनाव में उतारे जाने पर चर्चा करेगी। 

दरअसल,  2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का सूपड़ा साफ हो गया था। इस बार हालात थोड़े अलग नजर आ रहे हैं। केंद्र सरकार के खिलाफ कई विपक्षी पार्टी लामबंद हो गई हैं। इसलिए कांग्रेस ने भी उम्मीदवारों के चयन और जनता का मूड भांपने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है।  सर्वे एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा बनाए गए प्रभारियों द्वारा भिंड -दतिया क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की बैठक में लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दो नाम उभर के सामने आए हैं। इसमें राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की समर्थक मप्र शासन की महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी एवं मप्र कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश संयोजक प्रभूदयाल जौहरे का नाम शामिल है। इमरती देवी वर्ष 2014 के चुनाव में भी भिण्ड लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी थीं, लेकिन आखिरी समय उनको मैदान में उतारे जाने से उनके पास पूरे क्षेत्र में पहुंचने का समय न होने से हार गई थीं।

सूत्र का कहना है कि एनजीओ के सर्वे में भाजपा छोड़ाकर कांग्रेस में आए पूर्व विधायक कमलापत आर्य की दलबदलू होने की छवि एवं निजी स्वार्थ के लिए भाजपा से बगावत करना टिकट में बाधक है । साथ ही उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया को काले झंडे भी दिखाए थे, जिससे सिंधिया समर्थक कांग्रेसियों में उनके प्रति आक्रोश है। वैसे इस सीट से पूर्व मंत्री महेंद्र बौद्ध एवं पूर्व सांसद बारेलाल जाटव का नाम भी लिया जा रहा है, लेकिन दोनों नामों के आगे उनकी निगेटिव रिपोर्ट भी लगा दी गई है।

सर्वे रिपोर्ट पर विश्वास किया जाए तो ऐसा लगता है कि कांग्रेस के पास भिण्ड क्षेत्र में कोई भी नेता ऐसा नहीं है जिसे लोकसभा चुनाव में उतारा जाए, जबकि हकीकत यह है कि भिण्ड में कांग्रेस के पास कई नेता ऐसे हैं जो लोकसभा चुनाव में स्थानीय होने के कारण प्रभावी साबित हो सकते हैं। कांग्रेस में गुटीय संतुलन के कारण भले ही ऐसे प्रत्याशियों को मैदान से बाहर रखा जाए।