कैबिनेट में आएगा ये प्रस्ताव, नए साल में विकास के लगेंगे चौके-छक्के

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भोपाल। कमलनाथ सरकार में जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा का बड़ा बयान सामने आया है। मंत्री का कहना है कि विधान परिषद के गठन की तैयारी शुरु हो गई है।कैबिनेट की बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जाएगा।मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को केंद्र को भेजा जाएगा ।केंद्र की मंजूरी मिलते ही विधान परिषद के गठन की कवायद शुरु हो जायेगी।बताते चले कि राज्य में विधान परिषद के गठन का बिन्दु कांग्रेस के वचन पत्र में है। वचन पत्र के इस बिन्दु को पूरा करने के लिए सरकार कवायद कर रही है। सत्तारूढ़ दल कांग्रेस तो इसके पक्ष में है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल भाजपा इसके विरोध में है,

वही शर्मा ने पीसीसी चीफ के सवाल पर कहा कि यह फैसला राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी लेंगी।मप्र क्लियररेंस एक्ट 2019 पर कहा कि अब उद्योगपतियों को मंजूरी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।आवदेन देने के साथ ही 24 घंटे के अंदर ज्यादा से ज्यादा मंजूरियां मिल सकेगी। इंदौर के बीच फिल्म सिटी बनेगी। पर्यटन विभाग सिटी बनाएगा ।गांवों में भी थियटर बनाया जाएगा, ताकि गावों की प्रतिभा को भी मौका मिल सकें।

नए साल में लगेंगे विकास के चौके-छक्के

 मंत्री पीसी शर्मा ने नए साल पर सरकार का विजन बताते हुए कहा कि सरकार अपना विजन डॉक्यूमेंट पहले ही जारी कर चुकी है। अब उस पर काम किया जा रहा है, लेकिन काम की रफ्तार 2019 की तरह नहीं होगी। पिछले साल चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण विकास की रफ़्तार टेस्ट मैच की तरह थी, लेकिन अब 2020 में विकास 20-20 मैच की तरह होगा, जिस तरह से 20-20 मैच में चौके-छक्के लगते हैं, उसी तर्ज पर प्रदेश में अब विकास के फटाफट रन बनेंगे।

बीजेपी पर साधा निशाना

इस दौरान शर्मा ने बीजेपी को भी आड़े हाथ लिया और कहा कि पहली बार देश में युवा सामने आया है।मोदी सरकार के लिए यह खतरे की घंटी है।जनता भी सीएए और एनआरसी को लेकर सड़को पर है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 25 दिसम्बर को सीएए और एनआरसी को लेकर स्थिति साफ कर दी है।  25 दिसंबर को शांति मार्च हुआ था। हम सीएए के खिलाफ है। बीजेपी भ्रम फैला रही है, लेकिन वो सफल नहीं होगी। इस दौरान उन्होंने केंद्र पर मंहगाई बढाने का आरोप लगाते हुए प्याज के दाम सस्ते करने का अनुरोध किया है। पीसी शर्मा ने कहा कि नोटबन्दी ने देश के लोगों परेशान कर दिया है। केंद्र सरकार जनता को फायदा देने के लिए काम करे। 

76 सदस्यीय होगी विधान परिषद 
संविधानिक प्रावधान के तहत विधान परिषद में राज्य विधानसभा में सदस्य संख्या के अधिकतम एक तिहाई सदस्य हो सकते हैं। प्रदेश की विधानसभा में सदस्य संख्या 230 हैं, इसलिए विधान परिषद में सदस्यों की अधिकतम संख्या 76 हो सकती है। इसी सदस्य संख्या को देखते हुए सदस्यों के चुनाव और चयन की प्रक्रिया शुरू होगी।राज्य विधान परिषद के गठन की लम्बी प्रक्रिया है। केन्द्र सरकार की हरीझंडी के बाद विधान परिषद गठन में कम से कम छह माह लगेंगे। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस बीच सरकार को कई नियमों में संशोधन कराना होंगे। इसमें दो संशोधन तो संसद से कराना होंगे।

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