पिता हैं ‘मध्यप्रदेश’ तो बेटे का नाम रखा ‘भोपाल’, अनोखी है ‘नाम’ की कहानी

भोपाल| ‘एमपी अजब है, सबसे गजब है’ यह स्लोगन हमेशा चर्चा में रहता है, लेकिन मध्य प्रदेश के 64वें स्थापना दिवस पर एक ख़ास व्यक्ति की पहल पर यह स्लोगन एक दम फिट बैठता है| अब तक आपने महापुरषों, योद्धाओं, फ़िल्मी कलाकारों, खिलाड़ियों के नामों पर किसी बच्चे के नामकरण होते देखा सुना होगा| लेकिन प्रदेश में एक व्यक्ति ऐसे भी हैं जिनका नाम ‘मध्य प्रदेश’ जो कि 34 वर्ष के हैं, आपको यह जानकार भी आश्चर्य होगा कि उन्होंने अपने बेटे का नाम एमपी की राजधानी भोपाल के नाम पर रखा है।  

मध्यप्रदेश सिंह को अपने इस नाम पर गर्व है, मध्यप्रदेश सिंह का पूरा नाम मध्यप्रदेश सिंह अमलावर है| झाबुआ शहर के पीजी कॉलेज में भूगोल के अतिथि विद्वान मध्यप्रदेशसिंह अमलावर की पहचान उनके नाम के कारण है। 34 साल के मध्यप्रदेशसिंह के घर इस साल 18 जुलाई को बेटे का जन्म हुआ तो उन्होंने अपने बेटे का नाम भोपाल रखा।  अमलावर ने बताया कि वे उमरबन (तहसील मनावर जिला धार) के रहने वाले हैं। पिताजी मदनसिंह अमलावर गांव के पटेल हैं।आठ बच्चों के बाद जब नौवें नंबर पर सबसे छोटे बालक के रूप में 5 सितंबर 1985 को उनका जन्म हुआ तो पिताजी ने प्रदेश के आधार पर उनका नाम मध्यप्रदेश सिंह रख दिया। छोटे होने के कारण वे सबके लाडले रहे।

मध्यप्रदेश सिंह का कहना है कि 18 जुलाई को उनके पुत्र का जन्म हुआ। उन्होंने पुत्र का नाम भोपाल रख दिया है। इसमें पत्नी की भी सहमति रही। उनकी एक बिटिया भी है। मध्यप्रदेशसिंह 2017 से झाबुआ कॉलेज में अतिथि विद्वान हैं। पीएससी से असिस्टेंट प्रोफेसर का एलिजिबिलिटी टेस्ट पास कर चुके हैं। वो बताते हैं, जब किसी को अपना नाम बताता हूं तो एक बार तो वो यकीन नहीं करता। फिर पहचान पत्र दिखाना पड़ता है। कोई हंसता है, कोई मुस्कुराता है और कोई कहता है, बहुत अच्छा नाम है। मध्यप्रदेश सिंह की पत्नी किरण को उनके नाम पर गर्व है| वह कहती हैं कि बड़ा ही यूनिक नाम है, पहली बार कुछ अजीब लगा था, लेकिन जब उनसे हर कोई मिलना चाहता है, बात करना चाहता है तो अच्छा लगता है. कभी कोई परेशानी नहीं हुई इस नाम से, वहीं मध्यप्रदेश सिंह को अपने इस नाम पर गर्व है|