मध्य प्रदेश में छाया यूरिया संकट, सिंधिया ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र

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भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार बदलते ही किसानों को यूरिया संकट से जूझना पड़ रहा है| एक तरफ किसान जहां परेशान हैं तो वहीं आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है और कांग्रेस केंद्र सरकार पर पक्षपात के आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस सरकार पर निशाना साध रही है| किसानों को यूरिया नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। सत्ता परिवर्तन होते ही यूरिया की आवक प्रदेश में घट गई है। कांग्रेस ने इसके लिए केंद्र में भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी बीजेपी पर निशाना साधा है। वहीं, कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्या सिंधिया ने रैक बढ़ाने के साथ-साथ उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा को भी पत्र लिखा है। सिंधिया ने मध्य प्रदेश में 23 लाख मीट्रिक टन यूरिया को भेजने को लेकर पत्र लिखा है।

सिंधिया ने केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि, “मैं आपका ध्यान मध्यप्रदेश में उत्पन्न खाद की कमी की ओर आकर्षित करना चाहूंगा यह स्थिति हाल ही में हुए प्रदेश के विधानसभा चुनाव के बाद उत्पन्न हुई है। जब अचानक केंद्र सरकार में मध्यप्रदेश में खाद की सप्लाई कम कर दी गई है। रबि की बुवाई के चलते किसानों को यूरिया खाद की आवश्यकता रहती है, लेकिन बाजार में यूरिया खाद उपलब्ध ना होने के चलते फसलों को बिना हाथ के पानी की सिंचाई की जा रही है। जिसमें फसल पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। यूरिया की कमी के चलते किसानों को खाद के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। बाजार में किसानों को महंगे दाम में खरीदना पड़ रहा है। मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं कि पिछले वर्ष यानी 30 दिसंबर 2017 तक 642000 मेट्रिक टन के उपयोग के मुकाबले इस साल अच्छी वर्षा के चलते खाद का सेवन कब तक 7 .18  लाख मेट्रिक टन तक पहुंच चुका है। अगर खाद वितरण में देरी होती तो किसानों की खून पसीने की मेहनत मिटटी में मिल जायेगी। 

कांग्रेस की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार को परेशानी: अजय सिंह

इस पूरे मामले पर कांग्रेस वरिष्ठ नेता अजय सिंह ने कहा कि किसानों की समस्या को खत्म करना कांग्रेस पार्टी का धर्म है। कमलनाथ जी ने बात की है। प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध हो जाएगा। स्वभाविक है भाजपा को तीनों प्रांत में हार से बड़ा झटका लगा है। इसलिए ऐसा किया जा रहा है। लेकिन किसानों के साथ इस तरह नहीं करना चाहिए। 

बता दें, विधानसभा चुनाव से पहले नवंबर महीने में ही मध्यप्रदेश में 4.10 लाख टन यूरिया आया था, लेकिन कांग्रेस सरकार आने के बाद दिसंबर के 20 दिनों में सिर्फ 1.10 लाख टन यूरिया ही मिल पाया है। रबी के मौसम में गेहूं, चना, मसूर समेत अन्य रवि की फसलों के लिए यूरिया की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में प्रदेश के अधिकतर जिलों में मांग के हिसाब से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। सीएम कमलनाथ ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से यूरिया की रैक बढ़ाने के साथ-साथ उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा से भी फोन पर बात की। वहीं यूरिया की डिमांड पूरी नहीं होने के कारण शनिवार को प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में किसानों का आक्रोश बढ़ गया। रायसेन में किसानों ने नेशनल हाईवे नंबर 12 जाम कर दिया। 20 से ज्यादा जिलों में एक जैसे हालात रहे। कई जगह सहकारी समितियों के बाद बाजार से भी यूरिया गायब हो गया। जहां यूरिया स्टॉक में है, वहां कालाबाजारी शुरू हो गई है। वहीं किसानों को तत्काल रूप से राहत देने के लिये उच्च स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं और यूरिया की बड़ी खेप पहुँचने वाली है|