मध्य प्रदेश का बजट कैसा हो, अर्थशास्त्रियों ने दिए यह सुझाव

पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि मध्य प्रदेश का बजट कैसा हो यह आम जनता, अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के सुझाव पर तय किया जाएगा| इसी क्रम में बुधवार को मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुझाव लिए|

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने बजट (Budget) की तैयारियां शुरू कर दी है| बजट के लिए सरकार अर्थशास्त्रियों और विषय-विशेषज्ञों से सुझाव ले रही है| बुधवार को सीएम ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के माध्यम से प्रदेश के आगामी बजट के संबंध में अर्थशास्त्रियों एवं विषय-विशेषज्ञों से चर्चा की| इस दौरान सीएम शिवराज ने कहा मध्यप्रदेश का आगामी बजट क्रांतिकारी सुधारों वाला होगा। यह आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण को प्रशस्त करेगा।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि मध्य प्रदेश का बजट कैसा हो यह आम जनता, अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के सुझाव पर तय किया जाएगा| इसी क्रम में बुधवार को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुझाव लिए| आज की चर्चा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, कृषि, लोक वित्त एवं बैंकिंग, ग्रामीण विकास एवं आर्थिक गतिविधियां, वृहद एवं मध्यम उद्योग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं प्रबंधन आदि के क्षेत्र में अर्थशास्त्रियों एवं विषय-विशेषज्ञों ने सुझाव दिए हैं, प्रदेश के आगामी बजट में इन सुझावों को शामिल किया जाएगा।

मध्यप्रदेश में ऑक्सीजन के प्लांट लगें
एम्स भोपाल के डायरेक्टर प्रो. सरमन सिंह ने सुझाव दिया कि प्रदेश में 3-4 नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए जायें। फार्मा कंपनियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए तथा पोषण के क्षेत्र में और कार्य होने चाहिए। एमपी नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र जामदार ने कहा कि मध्यप्रदेश में मेडिकल टूरिज्म बढ़ाने के प्रयास किये जायें। एक वायरोलॉजी संस्थान बनाया जाये।

पी.पी.पी. मोड, सी.एस.आर. फंड तथा एनजीओ
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री सुमित बोस ने सुझाव दिए कि मध्यप्रदेश में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पी.पी.पी. मोड) से सामाजिक क्षेत्र तथा अधोसंरचना विकास के लिए कार्य किये जायें। सी.एस.आर. फंड के लिये भी प्रयास किये जायें। सामाजिक कार्यों के लिए एन.जी.ओ. का अधिक से अधिक सहयोग लिया जाए। बजट में ‘फ्लैक्सिबिलिटी’ हो जिससे सभी योजनाओं के लिए राशि मिले।

कृषि अधोसंरचना फंड रखें
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एम.डी. पल्लव महापात्र ने बजट में कृषि अधोसंरचना के लिए प्रावधान रखने का सुझाव दिया। उन्होंने प्रदेश में लेबर सेक्टर को बढ़ावा देने को कहा।

फाइन्स व पैनेल्टीज को डेढ़ गुना करें
आई.आई.एम. के डायरेक्टर प्रो. हिमांशु राय ने सुझाव दिया कि ‘फाइन्स’ और ‘पैनल्टीज’ को डेढ़ गुना किया जाये। विदेशी शराब और तंबाकू पर कर बढ़ाया जाये। कृषि क्षेत्र में भी पीपीपी मोड पर कार्य हो। शासकीय विद्यालयों में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो।

सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा दें
नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती टी.एस. राजी गैन ने सुझाव दिया कि मध्यप्रदेश में सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाये। इसके लिए मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार के साथ एम.ओ.यू. साइन करें।

मुर्गीपालन को बढ़ावा दें
एन.जी.ओ. ‘प्रदान’ के एच.के. डेका ने सुझाव दिया कि प्रदेश में मुर्गीपालन की व्यापक संभावनाएँ हैं, इसलिये क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाये। आदिवासी एवं दलित महिलाओं की सहायता के लिए विशेष फंड रखा जाए।

मध्यप्रदेश में बने टेक्सटाईल पार्क
सागर ग्रुप के चेयरमैन सुधीर अग्रवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश की कॉटन अच्छी गुणवत्ता की है और उत्पादन भी बहुत है। प्रदेश में टेक्सटाईल पार्क बनाया जाये। भोपाल शहर का मास्टर प्लान बने।

मध्यप्रदेश के वाहनों को प्राथमिकता दें
वोल्वो आयशर ग्रुप के एम.डी. विनोद अग्रवाल ने सुझाव दिया कि मध्यप्रदेश में बनने वाले वाहनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रतिभा सिंटैक्स के एम.डी. श्रेयस्कर चौधरी ने उद्योगों के लिए रियायती बिजली देने का सुझाव दिया।

लॉजिस्टिक कॉस्ट कम करने के प्रयास करें
मैक्सोन ग्रुप के डायरेक्टर राजेन्द्र पटेल ने प्रदेश में लॉजिस्टिक कॉस्ट कम करने के प्रयास करने का सुझाव दिया। लघु उद्योग भारती के स्टेट जनरल सेकेट्री राजेश मिश्रा ने तहसील एवं जिला स्तरों पर औद्योगिक भवन बनाने का सुझाव दिया, जहाँ लघु उद्यमियों को उद्योग लगाने के लिए किराये से स्थान मिल सके।

प्रदेश में बड़े शिक्षा समूहों को आमंत्रित करें
सी.बी.एस.ई. स्कूल्स के प्रेसीडेंट अनिल धूपड़ ने सुझाव दिया कि प्रदेश में बड़े शिक्षा समूहों को आमंत्रित किया जाये। प्रदेश एजुकेशन हब बने। विद्या भारती के विवेक सेंडे ने सामाजिक संस्थाओं द्वारा संचालित छोटे-छोटे विद्यालयों को अधोसंरचना विकास के लिए सहायता दिए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए, कृषि संकाय प्रारंभ करें।

राज्य शिक्षा आयोग के गठन की घोषणा करें
राजीव गांधी तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुनील कुमार ने प्रदेश में राज्य शिक्षा आयोग के गठन की घोषणा करने का सुझाव दिया। फीस नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र कान्हेरे ने सुझाव दिया कि सभी विद्यालयों में कृषि और वाणिज्य विषय के अध्यापन की सुविधा हो। शिक्षा अधोसंरचना का विकास किया जाये। साथ ही महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लासेस हो।