मुख्यमंत्री और मंत्री को मंदसौर मामले में किसने रखा अंधेरे में ?

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भोपाल। मंदसौर मामले पर सोमवार को गृहमंत्री बाला बच्चन का बयान कांग्रेस के लिए गले की फांस बन गया है। दरअसल विधानसभा चुनावों में शिवराज सरकार को किसानों की हत्यारी सरकार बता कर किसानों की सहानुभूति पाकर सत्ता में आई कांग्रेस अब लोकसभा चुनाव में किसानों और जनता को क्या जवाब देगी, यह पार्टी के नेताओं के लिए चिंता का विषय बन गया है।

सोमवार को प्रदेश के गृह मंत्री बाला बच्चन ने विधानसभा में विधायक हर्ष गहलोत के सवाल के लिखित जवाब में कहा था कि मंदसौर के पिपलिया मंडी थाना क्षेत्र में छह जून 2017 को हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिये आत्मरक्षा और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिये गोली चलाई गयी थी। गृहमंत्री ने यह भी बताया कि सरकारी संपत्ति की रक्षा के लिये तत्कालीन एसडीएम मल्हारगढ़ श्रवण भंडारी ने कानूनी प्रक्रिया का पालन कर गोली चलाने का आदेश दिया था। 

एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ ने जब पूरे मामले की पड़ताल की तो पता चला इतने संवेदनशील विषय के उत्तर के लिए अधिकारियों ने मंत्री को जानकारी तक नहीं दी। इतना ही नहीं इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री तक को देनी चाहिए थी जो कि नहीं दी गई। मंदसौर मामले का पूरा जवाब पुलिस महानिदेशक के मार्गदर्शन में तैयार हुआ और उसे बिना परीक्षण के जस के तस मंत्री को दे दिया गया। आमतौर पर यह परंपरा रही है कि गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर सरकार के मुखिया और संबंधित मंत्री से गहन चर्चा विचार-विमर्श होता है और परिस्थितियों के अनुसार विषय के उत्तर को बदला जाता है जो इस मामले में नहीं किया गया। हैरत की बात यह है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर गृहमंत्री ने भी  जबाब पढ़ने की जहमत नहीं उठाई। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा में दिया गया सरकार का यह जवाब अब सरकार के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है क्योंकि इस उत्तर में यदि सरकार परिवर्तन करती है तो निश्चित रूप से प्रभावित पक्ष इस जवाब को कोर्ट में अपने बचाव के लिए प्रस्तुत कर सकते हैं।

” आमतौर पर गंभीर और संवेदनशील विषयों पर मंत्री और मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श की परंपरा रही है इस मामले में मुख्यमंत्री और मंत्री को अंधेरे में क्यों रखा गया यह समझ से परे है ।”

भगवान देव इसराणी,

पूर्व  प्रमुख सचिव,

मध्यप्रदेश विधानसभा