Smoking In Diabetes: डायबिटीज के मरीज करते हैं धूम्रपान, तो हो जाएं सावधान और फटाफट करें ये काम

Smoking In Diabetes : आज के युवा वर्ग नशे के इतने आदि होते जा रहे हैं कि उन्हें गंभीर बिमारियों का ख्याल नहीं रहता। 21वीं सदी के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलते हुए किशोर इस कदर स्मोकिंग, शराब, आदि के शिकार हो रहे हैं कि बेहद ही कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं। इन दिनों डायबिटीज एक गंभीर और आम समस्या बनती जा रही है, जिसकी चपेट में लोग तेजी से आ रहे हैं, तो चलिए आज के आर्टिकल में आपको बताने जा रहे हैं कि अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं और इसके बाद भी धूम्रपान करते हैं तो ये आपके लिए बहुत ज्यादा हानिकारक हो सकता है।

हृदय से जुड़ी समस्याएं

अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो आपके लिए धूम्रपान करना खतरे से खाली नहीं है। आपको ये कोशिश करनी चाहिए कि आप तम्बाकू जैसी चीजों से दूर रहें। मधुमेह में इनका सेवन करने से दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। केवल इतना ही नहीं ऐसे लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। इसलिए अगर आप भी ऐसा करते हैं तो तुरंत इसे छोड़ दें।

किडनी से जुड़ी बीमारियां

अगर आप डायबिटीज होने के बाद भी लगातार धूम्रपान कर रहे हैं, तो आप किडनी संबंधी बीमारियों का भी शिकार हो सकते हैं। इसके साथ ही आंखों में इंफेक्शन का खतरा भी काफी बढ़ सकता है। केवल इतना ही नहीं ऐसे लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है इसलिए अगर आप भी ऐसा करते हैं तो तुरंत इसे छोड़ दें।

कठोर धमनियां

जो लोग डायबिटीज का शिकार होने पर भी स्मोकिंग करते हैं, उनकी धमनियां काफी कठोर होने लगती हैं। जिसके कारण उनकी समस्या और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही आंखों में इंफेक्शन का खतरा भी काफी बढ़ सकता है इसलिए अगर आप भी ऐसा करते हैं तो तुरंत इसे छोड़ दें। बता दें इससे हार्ट अटैक का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है।

ग्लूकोज का स्तर

डायबिटीज के शिकार व्यक्ति के धूम्रपान करने पर शरीर में ग्लूकोज का स्तर बिगड़ सकता है। दरअसल, इसकी वजह से ग्लूकोज का लेवल कम या ज्यादा हो सकता है, जिससे आपकी स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ सकती है और इससे हार्ट अटैक का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

डिस्क्लेमर – इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। एमपी ब्रेकिंग इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।