हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट नहीं एक बात, आइए जानें दोनों में क्या है फर्क

भारत में पिछले पांच वर्षों में कार्डियक अरेस्ट से होने वाली मौतों में 53 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें हर साल 7 लाख से अधिक लोग मारे जाते हैं।

हेल्थ, डेस्क रिपोर्ट। आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हम लोग कहीं ना कहीं अपने स्वास्थ्य के बारे में भूलते ही जा रहे है, ना ही अच्छा खान-पान और ना ही कोई शारीरिक कसरत। ये पता होते हुए भी कि खान-पान का एक स्वस्थ जीवन में बहुत ही बड़ा योगदान होता है फिर भी इसके लिए हमारा रवैया कुछ गैर-जिम्मेदाराना ही रहता है। चलते-चलते जंक फूड का सेवन करना कई शारीरिक विकारों का कारण बनता है। लेकिन इस बीच एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया है, जहां भारत में पिछले पांच वर्षों में कार्डियक अरेस्ट से होने वाली मौतों में 53 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें हर साल 7 लाख से अधिक लोग मारे जाते हैं। हालांकि, बहुत सारे कारक हृदयरोग का कारण बनते है। लेकिन इस दौरान बहुत से लोग हृदयरोगों में अंतर नहीं कर पाते है, मुख्यत: लोग कार्डियक अरेस्ट को भी हार्ट अटैक ही समझ लेते है, पर तो अलग है। दोनों का उपचार भी अलग है और फर्स्ट-ऐड (first-aid) भी।

इसलिए आज हम आपको कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर बताने जा रहे है क्योंकि दोनों ही मामलों में लक्षण भी अलग है और इनमें जरुरी फर्स्ट ऐड जान गंवाने के खतरे को कुछ हद तक काम कर देता है।

कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest)

कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब दिल पंप करना बंद कर देता है और व्यक्ति सांस नहीं ले पाता है। कार्डिएक अरेस्ट में दिल बिना किसी लक्षण के अचानक से धड़कना बंद कर देता है। कार्डिएक अरेस्ट एक ऐसी समस्या है जिसमें दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। कार्डिएक अरेस्ट में पम्पिंग अचानक रूक जाती है, जिसमें मस्तिष्क और फेफड़ों सहित शरीर के अन्य अंगो तक खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है।

यदि इसमें जल्द-से-जल्द कोई चिकित्सा सहायता प्रदान नहीं की जाती है तो कुछ मिनटों में मृत्यु हो जाती है। हालांकि, समय पर देखभाल और अस्पताल में उपचार से 35 प्रतिशत मृत्यु का खतरा कम हो जाता है।

क्या है लक्षण

अचानक से बेहोश हो जाना
अनुत्तरदायी (unresponsive) होना
सामान्य रूप से श्वास या श्वास नहीं लेना
हांफते हुए शोर मचाना

कार्डियक अरेस्ट के कारण

दिल का दौरा (Heart Attack) (कोरोनरी हृदय रोग के कारण)
कार्डियोमायोपैथी (cardiomyopathy) और कुछ विरासत में मिली हृदय की स्थिति (inherited heart conditions)
जन्मजात हृदय रोग (congenital heart disease)
हृदय वाल्व रोग (heart valve disease)
तीव्र मायोकार्डिटिस (acute myocarditis) (हृदय की मांसपेशियों की सूजन)
ड्रग ओवरडोज (drug overdose)
एक गंभीर रक्तस्राव या बड़ी मात्रा में रक्त खोना (severe haemorrhage) – हाइपोवोलेमिक शॉक (hypovolaemic shock)
हाइपोक्सिया (hypoxia) – ऑक्सीजन के स्तर में भारी गिरावट

ये है फर्स्ट – ऐड (first-aid) विकल्प

कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में कुछ भी करने से पहले एम्बुलेंस को कॉल करें
सीपीआर (CPR) तुरंत शुरू करें और मदद आने तक इसे जारी रखें
यदि संभव हो, तो एक स्वचालित बाहरी डिफाइब्रिलेटर (automated external defibrillator) की व्यवस्था करें और तुरंत इसका उपयोग करें

हार्ट अटैक (Heart Attack)

दिल का दौरा तब होता है जब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (LDL cholesterol) के कारण इसकी धमनियों (arteries) में से एक अवरुद्ध हो जाती है। हार्ट अटैक में दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन और खून नहीं मिल पाता है। दिल के दौरे के लक्षण बहुत अचानक और गंभीर हो सकते हैं।

क्या है लक्षण

छाती, गर्दन, पीठ और बाहों में जकड़न या दर्द
थकान (fatigue)
चक्कर आना (lightheadedness)
असामान्य दिल की धड़कन (abnormal heartbeat)
चिंता (anxiety)
ठंडा पसीना (Cold sweat)
जी मिचलाना (Nausea)

हार्ट अटैक के कारण

कोरोनरी धमनी ब्लॉक (Coronary artery blockage)
– पूर्णत: ब्लॉक (Full Blockage)
-एक आंशिक रुकावट (A partial blockage)
सहज कोरोनरी धमनी विच्छेदन (Spontaneous coronary artery dissection (SCAD))
इन्फेक्शंस (infections)

ये है फर्स्ट – ऐड (first-aid) विकल्प

आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए एम्बुलेंस कॉल करें
सीपीआर (CPR) तुरंत शुरू करें और मदद आने तक इसे जारी रखें
अगर डॉक्टर कहे तो मदद आने तक एस्पिरिन लें सकते है