शिमला: शहर को 24 घंटे पानी मुहैया कराने की महत्वाकांक्षी परियोजना पर वित्तीय संकट के बादल मंडरा रहे हैं। विश्व बैंक द्वारा पिछले तीन वर्षों में 587 करोड़ रुपये जारी किए जाने के बावजूद, शिमला वाटर मैनेजमेंट कॉरपोरेशन (SJPNL) को इसमें से केवल 250 करोड़ रुपये ही मिले हैं। इस गहरे फंड गैप के कारण अब कंपनी को परियोजना के कार्यों को जारी रखने के लिए कर्ज लेने पर विचार करना पड़ रहा है।
इस मामले पर अगले हफ्ते मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली कंपनी के Board of Directors की बैठक में चर्चा होगी। बैठक में कर्ज लेने के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इतना बड़ा फंड आने के बावजूद कंपनी की माली हालत पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कहां अटके 300 करोड़ से ज्यादा?
विश्व बैंक ने शिमला शहर में सतलुज नदी से पानी लाने और पूरे शहर में 24 घंटे जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह सहायता दी है। पिछले तीन सालों में अलग-अलग किस्तों में कुल 587 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इस साल भी करीब 100 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, कंपनी के खाते में अब तक सिर्फ 250 करोड़ रुपये ही पहुंचे हैं। बाकी के करीब 300 करोड़ रुपये कहां अटके हैं, इस पर कंपनी के अधिकारी फिलहाल कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इस चुप्पी ने फाइनेंशियल मिसमैनेजेंट और प्रोसीडरल देरी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
परियोजना का मौजूदा हाल
शिमला में 24 घंटे पानी देने और हर घर को सीवरेज से जोड़ने का काम विश्व बैंक की मदद से कई चरणों में चल रहा है।
- पहला चरण: करीब 370 करोड़ रुपये की लागत से सतलुज नदी से शिमला तक पानी पहुंचाया जा रहा है।
- दूसरा चरण: 970 करोड़ रुपये से शहर में प्रेशर के साथ 24 घंटे पानी देने के लिए नई पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं और स्टोरेज टैंक बन रहे हैं।
- सीवरेज नेटवर्क: लगभग 229 करोड़ रुपये सीवरेज नेटवर्क को दुरुस्त करने पर खर्च हो रहे हैं।
अधिकारियों का दावा है कि जनवरी से सतलुज का पानी शिमला पहुंचना शुरू हो जाएगा। आजकल शकरोड़ी में टैंकों और पेयजल लाइनों की टेस्टिंग का काम चल रहा है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो अगले साल से शहर के कई इलाकों में लोगों को 24 घंटे पानी मिलना शुरू हो जाएगा, जिससे 36,000 पेयजल उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
“अगले हफ्ते बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की बैठक होनी है। इसमें विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी।” — वीरेंद्र सिंह ठाकुर, प्रबंध निदेशक, पेयजल कंपनी
लोगों को इस पेयजल योजना के शुरू होने का लंबे समय से इंतजार है, लेकिन फंड की कमी की खबरों ने परियोजना के भविष्य पर चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें अगले हफ्ते होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जिसमें यह साफ होगा कि कंपनी कर्ज लेकर काम आगे बढ़ाएगी या अटके हुए फंड को हासिल करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।





