भाजपा का आंदोलन, बिजली बिलों को जलाया

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इंदौर। आकाश धौलपुरे। 

इंदौर में जहां एक ओर बीजेपी द्वारा किसानों की कर्ज माफी और बिजली बिलों को लेकर प्रदर्शन किया गया। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने केंद्र में बैठी मोदी सरकार से मदद ना मिलने को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। दरअसल, बीजेपी ने घोषणा की थी किसानों के 2 लाख तक कि कर्ज माफी को लेकर, प्रदेश की कांग्रेस सरकार की वादा खिलाफी पर इंदौर कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान बीजेपी नेताओं ने बिजली के बढ़ते बिलो का राक्षस भी मंच से ही जला दिया। 

जहां बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय का विवादित बयान चर्चाओं में रहा वही दूसरी ओर पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मंच से हुंकार भरी और सीधे कांग्रेस और सीएम कमलनाथ पर जमकर निशाना साधा। पूर्व लोकसभा स्पीकर ने सीधे सीधे सीएम को कहा कि भोपाल में बैठने से काम नही होता है, काम करने के लिए निकलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की 5 साल की सरकार है और वो उसे चलाये भी लेकिन हम मजबूत विपक्ष में रहकर, हर विफलता को जनता के सामने लाएंगे। किसानों को कर्ज माफी को लेकर उन्होंने पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करते हुए कहा कि वर्तमान सीएम और उनकी सरकार द्वारा 2 लाख तक का ऋण माफी का वादा, वादा नही बल्कि वादा खिलाफी है। इधर, बिजली के बिलो में वृद्धि को लेकर उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार द्वारा गरीबो को बड़े हुए बिजली के बिल थमाकर झोली भरी जा रही है वही एक उदाहरण देकर उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति उनके पास बढ़े हुए बिजली के बिल को लेकर तथ्यों के साथ आया था जबकि उसके घर पर सोलर सिस्टम लगा था। इसके बाद उसी व्यक्ति ने बिजली विभाग के दफ्तर पर जब हंगामा किया तो विभाग एडजस्टमेंट की बात कर बिल कम करने को राजी हो गया। उन्होंने बताया कि इसका मतलब है कि सक्षम व्यक्ति बिजली के बिल को लेकर एडजस्टमेंट करा सकता है लेकिन एक गरीब अपनी रोजी रोटी को छोड़कर क्या दफ्तर के चक्कर काटते रहे। वही ताई ने इंदौर में प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाकर कई सीख भी दी। इस दौरान बड़ी संख्या में बीजेपी नेता व कार्यकर्ताओं का हुजूम मंच पर मौजूद था लेकिन आंदोलन में शामिल हुई भीड़ को लेकर सवाल उठ रहे है। मिली जानकारी के मुताबिक लाखो लोगो के साथ सरकार के खिलाफ आंदोलन करने में जुटी बीजेपी को सत्ता जाते ही कार्यकर्ताओ का टोटा पड़ गया जिसके चलते आज के आंदोलन में बड़ी संख्या में मजदूरों को दिहाड़ी मजदूरी देकर लाया गया था जिस पर सवाल उठ रहे है।

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