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मिर्च उगानी है? बस ये सही मिट्टी चुनें, पैदावार दोगुनी हो जाएगी

Written by:Bhawna Choubey
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सही मिट्टी चुनना मिर्च की खेती का सबसे अहम राज है। घर पर मिर्च उगाने वालों से लेकर किसान तक हर किसी के लिए यह जानना जरूरी है कि किस किस्म की मिर्च किस मिट्टी में सबसे बेहतर बढ़ती है। यही तय करता है स्वाद, रंग और पैदावार।
मिर्च उगानी है? बस ये सही मिट्टी चुनें, पैदावार दोगुनी हो जाएगी

भारतीय रसोई की हर खुशबू, हर स्वाद और हर तड़का… कहीं न कहीं मिर्च से ही जुड़ा है। चाहे परिवार में हल्की तीखी मिर्च (Chilli Plant) खाई जाती हो या कड़ाही में चटकती तेज गुंटूर मिर्च, भारतीय खाने का असली स्वाद मिर्च के बिना अधूरा ही लगता है। यही वजह है कि लोग बाजार से मिर्च खरीदने की बजाय अब घर की छत, बालकनी या किचन गार्डन में इसे उगाने लगे हैं।

लेकिन यहां एक बात लोग अक्सर भूल जाते हैं, मिर्च उगाना सिर्फ बीज डालने भर का काम नहीं है। असली खेल मिट्टी का होता है। क्योंकि हर मिर्च की किस्म की अपनी जरूरतें होती हैं किसी को नमी ज्यादा चाहिए, किसी को तापमान, और किसी को हल्की दोमट मिट्टी। यही वजह है कि अगर आप हर बार पौधों का कमजोर होना, पत्तियों का सिकुड़ना या फल न आना जैसी दिक्कतें झेल रहे हैं, तो हो सकता है कि गलती बीज में नहीं, मिट्टी के चुनाव में हो।

मिर्च उगाने की कला मिट्टी को समझने से शुरू होती है

भारत में मिर्च की किस्में सिर्फ तीखेपन और रंग के हिसाब से अलग नहीं होतीं, बल्कि उनकी मिट्टी की जरूरतें भी पूरी तरह बदल जाती हैं। ऐसे में अगर आप घर पर मिर्च उगा रहे हैं, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किस मिट्टी में कौन-सी मिर्च सबसे ज्यादा फलती है। मिर्च का पौधा हल्की, भुरभुरी और अच्छी नमी वाली मिट्टी में अच्छा बढ़ता है, लेकिन हर मिर्च की किस्म के लिए यह नियम एक जैसा नहीं है। खास बात यह है कि मिर्च की मिट्टी में पानी रुकना नहीं चाहिए, वरना पौधा तुरंत बीमार पड़ जाता है। इसलिए आपके द्वारा चुनी गई मिट्टी सिर्फ पौधे की जड़ें ही नहीं, उसके स्वाद और तेज को भी प्रभावित करती है।

गुंटूर मिर्च

गुंटूर मिर्च, जिसे दक्षिण भारत के घरों में बेहद पसंद किया जाता है, अपनी तेज़ जलन और चटक रंग के लिए मशहूर है। यह वही मिर्च है जिसका इस्तेमाल आंध्र की चटनी और पिकल्स में खूब होता है। लेकिन जो लोग इस मिर्च को घर पर उगाना चाहते हैं, उनके लिए मिट्टी का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है।

गुंटूर मिर्च को रेतीली दोमट या लाल रेतीली मिट्टी सबसे ज्यादा पसंद आती है। इस मिट्टी की खासियत यह है कि यह पौधे की जड़ों को हवा देती है और पानी को रोकने नहीं देती, जिससे पौधा मजबूत बनता है। इस मिर्च के लिए मिट्टी का pH 6.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए। गुंटूर मिर्च चिकनी, भारी या ज्यादा पानी रोकने वाली मिट्टी को बिल्कुल पसंद नहीं करती। ऐसी मिट्टी में पौधे की जड़ें सड़ने लगती हैं और उसकी तीखापन और रंग दोनों पर असर पड़ता है। अगर आप घर में गुंटूर मिर्च उगा रहे हैं, तो मिट्टी में हल्का रेत, गोबर खाद और किचन वेस्ट कम्पोस्ट मिलाकर इसे और उपजाऊ बनाया जा सकता है।

कश्मीरी मिर्च

कश्मीरी मिर्च को भारत की कलर क्वीन कहा जाता है। यह ज्यादा तीखी नहीं होती, लेकिन इसका गहरा लाल रंग किसी भी डिश को खूबसूरत बना देता है। घर पर कश्मीरी मिर्च उगाने वाली महिलाएं और गार्डनर्स अक्सर शिकायत करते हैं कि पौधा ठीक बढ़ता नहीं, या मिर्च का रंग फीका आता है। इसकी सबसे बड़ी वजह गलत मिट्टी का चुनाव होती है।

कश्मीरी मिर्च के लिए रेतीली दोमट या उपजाऊ एलुवियल मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। मिट्टी का pH लेवल 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। इसके पौधे की जड़ों को हल्की, हवादार और ऑर्गेनिक पदार्थों से भरपूर मिट्टी बेहद पसंद आती है। कश्मीरी मिर्च का असली रंग तभी निकलता है जब मिट्टी में जैविक खाद यानी गोबर खाद, कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट मिलाया गया हो। यही ऑर्गेनिक तत्व उसके रंग को चमकदार बनाते हैं। अगर मिट्टी भारी हो या पानी रोकने लगे, तो पौधा कमजोर होकर पत्तियां गिराने लगता है और मिर्च का रंग सुस्त हो जाता है।

भूत जोलोकिया

भूत जोलोकिया, जिसे नॉर्थ-ईस्ट में घोस्ट पेपर भी कहा जाता है, दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों में गिनी जाती है। इसकी तीखापन का स्तर इतना ज्यादा है कि इसे सैन्य और रेस्क्यू टेक्नोलॉजी में भी इस्तेमाल किया जा चुका है। यह मिर्च देखने में जितनी आकर्षक होती है, उतनी ही संवेदनशील भी होती है, खासकर मिट्टी के मामले में।

भूत जोलोकिया दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी बढ़ती है। इस मिट्टी में हवा और नमी का संतुलन बेहद जरूरी होता है। इसकी मिट्टी में जैविक पदार्थ और कम्पोस्ट की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए, क्योंकि यह पौधा पोषक तत्वों को तेजी से खींचता है। इस मिर्च की जड़ें गर्मी से जल्दी प्रभावित होती हैं, इसलिए मल्चिंग यानी पत्तों का ढकाव मिट्टी को ठंडा रखता है और पौधे को बाहरी तापमान से बचाता है।

अगर मिट्टी सख्त, भारी या बिना ऑर्गेनिक मैटर की हो, तो भूत जोलोकिया का पौधा जल्द ही सूखने लगता है या उसमें मिर्चें छोटी और कम पैदा होती हैं। इसलिए इसे उगाने वालों के लिए मिट्टी का संतुलित, मुलायम और पोषक होना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

ब्यादगी मिर्च

कर्नाटक में उगाई जाने वाली ब्यादगी मिर्च अपने सुर्ख लाल रंग और हल्की से मध्यम तीखापन के लिए जानी जाती है। इस मिर्च की मांग मसाला उद्योग में सबसे ज्यादा है क्योंकि यह रंग और स्वाद दोनों का बेहतरीन संतुलन देती है। घर पर ब्यादगी मिर्च उगाने के लिए मिट्टी का चुनाव बहुत सोच-समझकर करना पड़ता है।

ब्यादगी मिर्च नमी बनाए रखने वाली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करती है। ध्यान रखें कि मिट्टी में नमी होनी चाहिए, लेकिन पानी जमा नहीं होना चाहिए, वरना पौधे में फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाता है। पौधा लगाने से पहले मिट्टी में गोबर खाद या कम्पोस्ट मिलाना बेहद जरूरी है। इससे मिट्टी की पोषक क्षमता बढ़ती है और पौधा स्वस्थ और हरा-भरा बढ़ता है। चिकनी मिट्टी यानी क्ले सॉइल इस मिर्च के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं मानी जाती क्योंकि यह पानी को रोककर पौधे की जड़ों को खराब करती है।

 

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Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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