दिन पर दिन घर पर पेड़-पौधे लगाने का क्रेज बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते अब लोग न सिर्फ़ तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधों को घर में लगाते हैं बल्कि तरह-तरह के मौसमी सब्ज़ियों और फलों के पौधों को भी लगाते हैं। सब्ज़ी वाले पौधों में लोग बैगन का पौधा भी अपने घरों में लगाते हैं। घर में बैगन का पौधा लगाना एक बहुत ही अच्छा ऑप्शन है, क्योंकि ऐसा करने से आपको बाज़ार से बैगन ख़रीदने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी साथ ही साथ आप ताज़े बैगन का आनंद ले पाएंगे।
लेकिन बोहोत लोगों की यह शिकायत रहती है कि घर में बैगन का पौधा लगा हुआ है, उसमें फूल भी खिलते हैं, लेकिन फल आने का नाम ही नहीं लेते हैं। तरह तरह की खादों का इस्तेमाल भी कर लिया है, लेकिन फिर भी कुछ ख़ास फ़र्क नहीं पड़ा। अगर आप भी इसी समस्या से परेशान रहते हैं, तो अब ज़्यादा परेशान रहने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आज हम आपको ऐसे ही कुछ ख़ास टिप्स देंगे जिसकी मदद से आपके बैगन के पौधों में भरपुर बैंगन खिलेंगे।

बैगन के पौधों में फल क्यों नहीं आते हैं? (Brinjal Plant Care)
इस बात का ध्यान रखें कि बैगन का पौधा घर सही देखभाल से उठाया जाए तो ढेरों फल देता है। सबसे पहले यह जानने की कोशिश करेंगे कि बैगन के पौधे में फल क्यों नहीं खिल रहे हैं, इसके पीछे पोषक तत्वों की कमी एक मुख्य कारण हो सकता है। साथ ही साथ पानी की सही मात्रा भी बेहद ज़रूरी है। इसके अलावा आज हम आपको एक खाद के बारे में बताने जा रहे है, जिसका सिर्फ़ दो मुट्ठी इस्तेमाल से ही आपके बैगन के पौधों में में फ़र्क नज़र आने लगेगा।
बैगन के पौधे में कौन सी खाद डालनी चाहिए?
बैगन के पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए, आपको बाज़ार से कैमिकल वाली खाद को ख़रीदने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि आप गोबर की खाद, बोन मिल, और सरसों की खली से घर पर ही एक पोषक तत्वों से भरी खाद बना सकते हैं।
- सबसे पहले दो मोटी बोन मिल चूरन, एक मुट्ठी सरसों की खली को अच्छी तरह से मिला लें।
- इसके बाद पौधे की मिट्टी को हल्का हल्का खोद लें। ताकि यह मिश्रण पौधों की जड़ों तक अच्छी तरह से पहुँच सकें।
- इसके बाद बोन मिल चूरन, एक मुट्ठी सरसों की खली का मिश्रण पौधों की जड़ों के पास डालें।
- इसके बाद ऊपर से गोबर की खाद डालें, और हल्का पानी दें। इस मिश्रण का इस्तेमाल आप 15-20 दिनों में कर सकते हैं।
- एक महीने के अंदर आपको साफ़ फ़र्क नज़र आने लगेगा। इस मिश्रण को बनाने में न ही ज़्यादा मेहनत लगती है न ही ज़्यादा पैसे ख़र्च होते हैं।