गर्मी में आप घमौरियों से परेशान हैं , ये घरेलू नुस्खे दिलाएंगे राहत

गर्मी में आप घमौरियों से परेशान हैं , ये घरेलू नुस्खे दिलाएंगे राहत

जीवनशैली, डेस्क रिपोर्ट। गर्मी आते ही पसीने के साथ साथ घमौरियां(Heat Rash) भी परेशानी बढ़ाती हैं, शरीर पर निकलने वाले लाल लाल दाने खुजली पैदा करते हैं, इनमें इचिंग होती है, कांटे जैसी चुभन होती है। जिन लोगों को घमौरियां (Prickly Heat) होती हैं वे कई तरह के उपाय करते हैं, हम भी यहाँ आपको कुछ आसान घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जो आपके काम आ सकते हैं।

मुल्तानी मिट्टी – मुल्तानी मिटटी को एक बर्तन में  साफ ठन्डे पानी में गला दें, फिर इस पेस्ट को घमौरियों पर लगाएं।  मुल्तानी मिट्टी ठंडक देती है , इससे घमौरियों की चुभन में आराम मिलेगा।

दही – आधा कटोरी दही लें उसमें 6-7 पत्ते पुदीना के (पिसे हुए) डालें और मिश्रण को अच्छे से तैयार कर लें। इस मिश्रण को घमौरियों पर लगाकर 10-12 मिनट तक हलके हाथ से मसाज करें, फिर स्नान कर लें, राहत मिलेगी।

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नीम – एंटी बैक्टीरियल गुण सहित तमाम औषधीय गुण वाला नीम घमौरियों के लिए बहुत लाभदायक है। नीम की पत्तियों के पानी से नहाएं, नीम की पत्तियों को पीसकर घमौरियों पर लगाएं, नीम की छाल को घमौरियों पर लगाएं आराम मिलेगा।

पपीता और गेहूं का आटा – पके हुए पपीते की स्लाइस लेकर उसमें थोड़ा से गेहूं का आटा मिलाएं और पेस्ट बनायें।  इस पेस्ट को घमौरियों पर लगाएं और हलके हाथ से मसाज करें। इसके बाद नहा (स्नान) कर लें।

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खीरा – खीरे को छीलकर उसके पतले पतले स्लाइस काट लीजिये और उसे घमौरियों पर कुछ देर के लिए रखें। खीरे की ठंडक से घमौरियों में आराम मिलेगा।

नारियल का तेल – नारियल के तेल के एंटी बैक्टीरियल गुण घमौरियों में आराम पहुंचाते हैं। घमौरियों पर नारियल का तेल लगाएं और कुछ नहा (स्नान) कर लें , आराम मिलेगा।

Disclaimer – ऊपर दी गई जानकारी अलग अलग स्रोतों से जुटाई सामान्य जानकारी है , इसका प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।   

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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