MP गजब है- क्लर्क बनकर रिकॉर्ड कीपर करता रहा नौकरी, खुलासे के बाद ट्रांसफर  

खास बात ये है कि साक्ष्य छिपाकर शासन को गुमराह कर नौकरी करने वाले आकाश गुप्ता के खिलाफ विभाग ने आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं कराया।

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। मध्यप्रदेश सरकार के अधिकारी अपने विभाग को लेकर कितने गंभीर हैं इसकी एक बानगी ग्वालियर (Gwalior) में देखने को मिली। ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी पिछले लम्बे समय तक शासन और उसके विभाग के अधिकारियों की आँखों में धूल झोंककर अपने से ऊँचे पद पर ट्रांसफर लेकर नौकरी करता रहा और किसी को भनक नहीं लगी। लेकिन जब मामला खुला तो विभाग ने दोषी कर्मचारी के खिलाफ कोई एक्शन ना लेते हुए उसका सिर्फ ट्रांसफर कर इतिश्री कर ली।

दरअसल जबलपुर (JABALPUR) में पदस्थ रहे स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड कीपर (Record keeper) आकाश गुप्ता ने 2019 में ग्वालियर में ट्रांसफर लेने के लिए भोपाल आवेदन किया। चूँकि ग्वालियर में रिकॉर्ड कीपर (Record keeper) का पद स्वीकृत नहीं है इसलिए उसने आवेदन में अपना मूल पद छिपाते हुए खुद को सहायक ग्रेड 3 यानि क्लर्क लिख दिया और शासन ने आवेदन की जाँच पड़ताल के बिना आकाश का ट्रांसफर (Transfer) ग्वालियर में  सहायक ग्रेड 3 के आधार पर कर दिया। आकाश ने भी खुद को क्लर्क बताते हुए ग्वालियर में ज्वाइन कर लिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने आकाश को आंतरी में पदस्थ कर दिया।

जबलपुर ऑफिस और सर्विस बुक से हुआ खुलासा 

उधर आकाश का स्थानांतरण जब ग्वालियर हुआ तो ग्वालियर जिले के आंतरी में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 योगेश गुप्ता का ट्रांसफर (Transfer) जबलपुर कर दिया गया। योगेश गुप्ता ने जब जबलपुर में ज्वाइन किया तो उसे वहां मालूम पड़ा कि आकाश गुप्ता का मूल पद रिकॉर्ड कीपर है वो सहायक ग्रेड 3 यानि क्लर्क नहीं है, उसने इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारीयों से की , इधर जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के पास आकाश गुप्ता की सर्विस बुक पहुंची तो उसने उसका मूल पद रिकॉर्ड कीपर (Record keeper) देखकर सब चौंक गए। यह खुलासा होने पर शुक्रवार को आकाश का ट्रांसफर (Transfer)ग्वालियर से जबलपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO)कार्यालय कर दिया गया। इसका आदेश भी जारी हो चुका है।

कोरोना काल में फर्जी अफसर बनकर धमका चुका है लोगों को 

जानकारी के मुताबिक राजनेताओं में अपनी पैठ रखने वाले आकाश ने आंतरी में ज्वाइन करने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में खुद को अटैच करा लिया।  इस बीच पिछले साल जब कोरोना फैला तब अप्रैल 2020 में आकाश गुप्ता स्टेशन रोड पर स्थित विधिचंद जैन धर्मशाला पहुंचा और खुद को शासन का बड़ा अधिकारी बनकर वहां बने क्वारेंटाइन सेंटर का निरिक्षण करने की बात की।  आरोप है कि आकाश शराब के नशे में था , उसने क्वारेंटाइन सेंटर में महिला कर्मचारियों से अभद्र भाषा में बात की और उनके खिलाफ एक्शन लेने की धमकी भी दी।  इसके बाद आकाश गुप्ता सत्कार गेस्ट हाउस में बने क्वारेंटाइन सेंटर पर भी फर्जी अफसर बनकर गया यहाँ भी स्टाफ से इसने अभद्र भाषा में बात की, महिला कर्मचारियों ने इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से की लेकिन तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी  डॉ एसके वर्मा (CMHO Dr SK Varma)ने आकाश गुप्ता को नोटिस देकर जवाब मांग लिया, लेकिन शराब पीकर हंगामा कर विभाग की साख गिराने वाले कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं की।

सिर्फ ट्रांसफर हुआ, साक्ष्य छिपाकर ट्रांसफर करना पर कोई एक्शन नहीं 

शासन को गुमराह कर रिकॉर्ड कीपर (Record keeper) आकाश गुप्ता बिना पद करीब डेढ़ साल तक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में सहायक ग्रेड 3 यानि क्लर्क बना बैठा रहा, जब इसकी शिकायत भोपाल स्वास्थ्य विभाग में हुई तो जांच में खुलासा हुआ कि आकाश क्लर्क  नहीं बल्कि उसका मूल पद रिकॉर्ड कीपर (Record keeper) का है। यह खुलासा होने पर शुक्रवार को आकाश का ट्रांसफर ग्वालियर से जबलपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय कर दिया गया। लेकिन खास बात ये है कि साक्ष्य छिपाकर शासन को गुमराह कर नौकरी करने वाले आकाश गुप्ता के खिलाफ विभाग ने आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं कराया।

उधर इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनीष शर्मा (CMHO Dr Manish Sharma)का कहना है कि रिकॉर्ड कीपर (Record keeper) आकाश गुप्ता का ट्रांसफर जबलपुर हो चुका है। ग्वालियर में रिकॉर्ड कीपर (Record keeper) का कोई पद नहीं था। उन्होंने कहा कि उसका ट्रांसफर भोपाल स्तर से हुआ है।