निर्दलीय प्रत्याशी ने थामा भाजपा का दामन, कांग्रेस से बागी होकर लड़ रहे थे चुनाव

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आगर मालवा| गिरीश सक्सेना| जिले की आगर विधानसभा सीट पर चुनाव रोचक हो गया है| कांग्रेस से टिकट न मिलने पर बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरे मधु गहलोत ने भाजपा का दामन थाम लिया है| इंदौर आये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में गहलोत ने मंच से भाजपा की सदस्यता ली| निर्दलीय चुनाव लड़ रहे मधु गहलोत को सपाक्स, करनी सेना और परशुराम सेना ने समर्थन दिया था| इन संगठनों के समर्थन और मधु गहलोत के समर्थकों के चलते आगर विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की स्तिथि बन गई थी, लेकिन अब एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा में सीधा मुकाबला है| 

टिकट वितरण के बाद से जहां प्रदेश भर में नेताओं के बागी होने का सिलसिला शुरू हुआ था, इसी क्रम में आगर विधानसभा से मधु गहलोत ने भी कांग्रेस से बगावत कर दी थी| गहलोत ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरा और नगर में सैकड़ों समर्थकों के साथ जनसम्पर्क रैली भी निकाली थी| सपाक्स, करनी सेना और परशुराम सेना ने भी मधु गहलोत को अपना समर्थन देने का एलान कर दिया था| इस सीट पर त्रिकोणीय संगर्ष की स्तिथि थी| शुरुआत में कांग्रेस ने गहलोत को मनाने की कोशिश की वहीं बीजेपी भी एड़ी चोटी का जोर लगा रही थी| आखिरकार बीजेपी को सफलता मिली| वहीं मधु गहलोत के इस कदम से उनको समर्थन देने वाले संगठन अब नाराज है और अपने समर्थकों से नोटा बटन दबाने की की अपील कर सकते हैं, सूत्रों के मुताबिक कल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नोटा को वोट देने की अपील की जा सकती है|  

आगर विधानसभा में बीजेपी की स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से सक्रिय हुए प्रदेश के कुछ बड़े नेताओं की सक्रियता और आश्वासन के बाद मधु गहलोत बीजेपी में शामिल हुए हैं । 2013 के विधानसभा चुनाव में आगर से बीजेपी के मनोहर ऊँटवाल के खिलाफ मधु गहलोत कांग्रेस से प्रत्याशी थे। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर 2013 में लगभग 27 हजार मतों से मधु गहलोत की हार हुई थी। इस बार भी गहलोत कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े को मैदान में उतार दिया यह उनका पहला विधानसभा चुनाव है| इसके बाद गहलोत ने कांग्रेस से बगावत कर दी और निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया, इसके बाद पार्टी ने उन्हें छह साल के निष्कासित भी कर दिया| नामांकन वापसी के दिन भी गहलोत ने नाम वापस नहीं लिया था| उनके मैदान में डटे रहने से कांग्रेस से ज्यादा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता था| क्योंकि सपाक्स, करनी सेना समेत कई संगठन उनके समर्थन में आ गए थे और इनके वोट गहलोत को मिलते जो अब तक भाजपा को मिलते थे।