नर्मदा जयंती के अवसर पर ककराना में मां नर्मदा को 551 मीटर लंबी चुनरी चढ़ाई

अलीराजपुर। यतेंद्र सिंह सोलंकि।

अलीराजपुर के ग्राम ककराना में मां नर्मदा का स्वरूप देखने लायक होता है यहां की सुंदर वादिया सब को लुभाती है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं।  नर्मदा जयंती के दिन यहां पर कन्या भोज और हवन का आयोजन भी किए जाते हैं। अलीराजपुर जिले में आकर मां नर्मदा गुजरात की खम्भात की खाड़ी में मिल जाती है। त्वदीय पाद पंकजम् नमामि देवी नर्मदे के जयकारों के साथ मॉं नर्मदा की महाआरती की स्वर लहरियों से शनिवार को जिले के सोंडवा विकास खंड के नर्मदा तट का ग्राम ककराना गुंजायमान हो उठा। जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर स्थित ग्राम ककराना में नर्मदा जयंति के अवसर पर आठवें वर्ष में आयोजित नर्मदा मैया की महाआरती, चुनरी यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। मुख्य अतिथि विधायक मुकेश पटेल थे। उन्होने मां नर्मदा की विधिवत पूजा अर्चना की। पश्चात मां नर्मदा को ओढ़ाई जाने वाली चुनरी की पूजा करने के बाद उसे उत्तर तट से दक्षिणी तट तक मोटर बोट के सहारे लेकर गए। दक्षिणी तट की पूजा अर्चना के बाद वापस लौटे व मां नर्मदा की आरती उतारी। पंचकुंडीय यज्ञ की पूर्णाहुति में भाग लिया। कन्या पूजन करने के बाद विशाल भंडारा संपंन हुआ जिसमें हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। नर्मदा के उत्तरी तट पर हवन-पूजन, भजन-किर्तन के धर्ममय वातावरण में श्रद्धालुओं ने नर्मदे हर के जयकारों के साथ माता की स्तुति की।

नावों पर निकली भव्य चुनरी यात्रा 
दोपहर करीब 1 बजे मंदिर से चुनरी यात्रा आरंभ हुई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 551 मीटर लंबी चुनरी को नर्मदा मैया को एक छोर से दूसरे छोर तक ओढ़ाया गया, दोनों तटों तक चुनरी ओढ़ाने के लिए 7 मोटरबोट व 8 नावों का सहारा लिया गया दूसरे छोर पहुंचने के बाद चुनर को नर्मदा नदी के तट पर बांध दिया गया।चुनरी यात्रा के बाद दोपहर 2 बजे नर्मदा मैया व बैद्यनाथ धाम की आरती हुई पश्चात दोपहर ढाई बजे से कन्या भोज व विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। आयोजन में सरदार सरोवर बांध के डूब बेत्र के ग्राम झंडाना, कुलवट, महलगांव के अलावा आसपास के ग्राम वालपुर, गुनेरी, देलवानी, उमराली, सोंडवा, डही व आलीराजपुर से बड़ी संख्या में श्रृद्वालु पहुंचे। नर्मदा तट पर शुक्रवार रात को भजन मंडलों द्वारा भजन संध्या में शानदार भजनों की प्रस्तुती दी गई। शाम ढलते ही नर्मदा तट पर श्रद्धालुओं ने दीपों की मालाएं नर्मदा जल में प्रवाहित की।