हत्या के संदेही आरोपी के फरार होने का मामला, तीन पुलिसकर्मी सहित कोतवाली प्रभारी लाइन अटैच

अनूपपुर। मो अनीश तिगाला। महिला की हत्या के संदिग्ध आरोपी हथकड़ी सहित फरार हो जाने के मामले में पुलिस अधीक्षक ने तीन पुलिस कर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है। एक अन्य आदेश में अनूपपुर पुलिस अधीक्षक किरण लता केरकेट्टा ने कोतवाली प्रभारी प्रफुल्ल रॉय को लाइन अटैच किया और नरेंद्र पाल को अनूपपुर कोतवाली का प्रभारी नियुक्ति किया गया है। लेकिन प्रफुल्ल राय को लाइन अटैच करने का आदेश अलग से क्यों निकाला गया यह समझ के परे है।

हथकड़ी समेत आरोपी के भागने के मामले में दो एएसआई और एक सिपाही को लाइन अटैच किया गया और कोतवाली प्रभारी को लाइन भेजने का आदेश अलग से जारी क्यों करना पड़ा ये समझ के परे है। मामले की जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सकरा के पास 20 अप्रैल को 50 वर्षीय महिला की हत्या के बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर 5 मई को 35 वर्षीय द्वारिका कोल को गिरफ्तार कर अभिरक्षा में लिया तथा 6 मई की शाम को घटना स्थल की शिनाख्ती और निषानदेही के लिए अपने साथ ले गई थी, जहां हत्या का संदिग्ध आरोपी द्वारिका कोल घटना स्थल से ही पुलिस को चकमा देकर हथकड़ी समेत फरार हो गया था। जिस पर पुलिस अधीक्षक ने तीन पुलिस कर्मियों जिनमें उपनिरीक्षक पीएस बघेल, सहायक उपनिरीक्षक लियाकत अली एवं आरक्षक दिनेश बंधैया को लाइन अटैच कर दिया गया।
अब सवाल यह उठता है इस पूरे मामले में कोतवाली प्रभारी को किस बात के लिए अभय दान दे कर लाइन में भेजा गया जबकि कइयों पर पुलिस अधीक्षक की गाज गिर गई। क्या जो सजा बांकी पुलिस कर्मियों को दी गई उसके असली हकदार वही है।सूत्रों की माने तो बड़ी कार्यवाही तो कोतवाली प्रभारी के ऊपर होनी चाहिए थी परंतु अधीनस्थों को निपटा कर थाना प्रभारी को अभय दान दिया गया जो कई सवाल खड़े करता है। पुलिस अधीक्षक की कार्यवाही पर इतनी बड़ी लापरवाही पर इन सबको निलंबित कर बड़ी सजा दी जानी थी लेकिन निरीक्षक प्रफुल्ल राय के रिटायरमेंट के कुछ महीने बचने के कारण यह इन्हें अभय दान दिया गया है वही कुछ लोगों को पदोन्नत होने की वजह से उन्हें निलंबित कर सजा नहीं दी गई है। पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक अनूपपुर की भी भूमिका संदिग्ध ही मानी जा रही है।