पूर्णिमा पर करीला धाम में भरा मेला, सड़क की जर्जर हालत से श्रद्धालु हुए परेशान

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अशोकनगर मुंगावली। अलीम डायर।

पूर्णिमा के मौके पर  क्षेत्र के मशहूर  करीला धाम  मंदिर में मेले का आयोजन किया गया जहां आसपास सहित दूर दराज से हजारों श्रद्धालुओं ने करीला पहुंचकर माता जानकी के दर्शन किए। मंगलवार को पूर्णिमा के मोके पर सुबह से ही करीला जाने बाली श्रद्धालुओं की संख्या कम रही लेकिन दस बजे से श्रद्धालुओं की संख्या बडती गई। जहां देखते ही देखते दो पहिया चार पहिया एवं बसों से बैठकर श्रद्धालु करीला पहुंचे ओर शाम तक हजारों श्रद्धालुओं ने करीला पहुंचकर माता जानकी के दरवार में मात्था टेका ओर मनोकामना पूरी होने पर राई भी करवाईं। इस बीच करीला मंदिर जाने बाली सडक जो ठेकेदार ने  उखाडकर फेंकदी है इसकी बजह से पैदल चलने बाले श्रद्धालु एवं वाहनों से उडने बाली धूल के कारण श्रद्धालुओं को परेशान भी होना पडा। लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा सडक बनाने को लेकर काम शुरु नहीं किया है।

परिक्रमा मार्ग ओर मंदिर परिसर में अगरवत्ती से फैलता रहा धुंआ। श्रद्धालुओं द्वारा परिक्रमा मार्ग ओर मंदिर परिसर में ही नरियल फोडते है ओर अगरवत्ती जलाकर लगाते है। जिससे अगरवत्तियां जलने से होने बाला धुंआ पूरे परिसर सहित माता जानकी के निज मंदिर तक पहुंचता है। जिससे माता जानकी के दर्शन करने बाले श्रद्धालुओं को परेशान होना पडता है।लेकिन परिसर में अगरवत्ती जलाने से रोकने के लिए करीला ट्रस्ट ओर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं रहता।साथ ही कई बार अगरवत्ती का गुल नरियल की नरेटी पर पड जाता है।ओर आग सुलग उठती है।जिससे आग लगने का भी डर बना रहता है। इसके साथ ही परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा फोडने बाले नरियलों की नरेटी परिक्रमा लगाने बाले श्रद्धालुओं के पैरों में लगते है। लेकिन कोई भी इन्हें रोकने का प्रयास नहीं करता। ओर श्रद्धालु परेशान होते रहते है।नरियल फोडने ओर अगरवत्ती लगाने की कोई एक जगह नहीं है। वल्कि चार से पांच जगह श्रद्धालुओं अगरवत्ती लगाते रहते है।

आने वाली रंग पंचमी पर करीला धाम पर एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें हिंदुस्तान के कोने कोने से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और जिसकी तैयारी में पूरा जिला प्रशासन बड़े जोर शोर से तैयारियों में लगा रहता और कभी समय पहले से यहां प्रशासन की मीटिंग भी चल रही है उसके बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ है अगर सड़कों की यही हालत रही तो श्रद्धालुओं को मेले में आने पर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।