भोपाल।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज शुक्रवार को अशोक नगर पहुंचे, जिसको लेकर कांग्रेस ने शिवराज पर तंज कसा है। चुंकी सीएम पद पर रहते हुए  शिवराज कभी अशोकनगर नही गए हमेशा अशोकनगर जाने से दूरी बनाते रहे लेकिन पद से हटते ही आज एक बार फिर वे भाजपा कार्यकर्ताओं के समर्थन में वहां पहुंचे ।हालांकि इसके पहले वह लोकसभा चुनाव में भी दौरा करने पहुंचे थे। वही उनके इस दौरे को लेकर कांग्रेस ने चुटकी लेना शुरु कर दिया है।कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज अंधविश्वास के चलते कभी अशोकनगर नही पहुंचे और कुर्सी से हटने के बाद अब अशोक नगर जा रहे है।

दरअसल, राजनीतिक गलियारों में अशोकनगर के साथ मिथक जुड़ा है । जिसके अनुसार, जो भी मुख्यमंत्री यहां आया है, उसे अगले चुनाव में ही अपना पद गंवाना पड़ा है। इस मिथक को लेकर पूर्व सीएम प्रकाशचंद सेठी, अर्जुन सिंह, श्यामाचरण शुक्ल, सुंदरलाल पटवा, मोतीलाल वोरा आदि के नाम गिनाए जाते हैं। जो यहां आने के बाद अगले चुनाव में अपनी गद्दी से हट गए थे।इसी के चलते मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज यहां कभी नही गए, बड़े बड़े कार्यक्रमों होने के बावजूद शिवराज अशोकनदर से दूरी बनाते रहे, वे आसपास के मार्गों से निकल जाते थे। हालांकि वे वर्ष 2003 में यहां आए थे, तब वे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और विदिशा के सांसद थे।वही लोकसभा चुनाव में यहां पहुंचे थे, लेकिन तब प्रदेश से बीजेपी की सत्ता जा चुकी थी। आज एक बार फिर शिवराज यहां पहुंचे और सभा की। कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने शिवराज पर तंज कसते हुए कहा कि जो शिवराज जी पूरे 13 वर्ष मुख्यमंत्री रहते , सिर्फ़ कुर्सी से हटने के अंधविश्वास के चलते , अशोक नगर की जनता की सुध लेने कभी नहीं गये वो कुर्सी से हटने के बाद अब अशोक नगर जा रहे है।वहाँ की जनता इसका जवाब उनसे माँगेगी।

अधिकारियों को चेताया

इस दौरान शिवराज ने कमलनाथ सरकार और कांग्रेस को जमकर घेरा। शिवराज ने कहा कि  इमर्जेंसी के दौरान मुझे जेल ले जाया गया और   पुलिस ने इतने डंडे बरसाये कि आज भी हड्डियों में दर्द होता है। पुलिस अफसर ने मुझसे कहा कि माफी मांग लो और बीस सूत्रीय का समर्थन कर दो, लेकिन मैंने कहा कि मर जाऊंगा, लेकिन माफी नहीं मांगूंगा।उनके कहने पर जो उनका हुकुम बजा रहे हैं, जो नियम, कायदे, कानून का पालन नहीं कर रहे हैं, वो समझ लें कि दो दिन की बहारें हैं जग में, कब जुल्म किसी का चलता है, ये जुल्म का सूरज लाख चढ़े, हर शाम को लेकिन ढलता है  

कर्जमाफी और बेरोजगारी पर घेरा

वही आगे शिवराज ने वादे पूरे ना होने पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अतिथि विद्वान खुले आसमान के नीचे पड़े हैं। कड़कड़ाती सर्दी में, धरती के बिछौने पर, आसमान की चद्दर ओढ़कर पड़े हैं और मुख्यमंत्री के पास उनकी व्यथा सुनने का वक्त नहीं है । कांग्रेस सरकार का नये साल का तोहफा है। अब गली-गली में शराब की दुकानें खोली जा सकेंगे। सरकार की एक ही मंशा है कि पीयो और पड़े रहो, ताकि कर्ज माफी और बेरोजगारी भत्ते का सवाल इनसे न पूछ सको।