सावधान : नकली दूध, घी, मावे के बीच सक्रिय हुआ नकली रेत माफिया

कुछ लोग मिट्टी और मुरम से नकली रेत बना रहे हैं। श्री मिश्रा ने कहा कि नकली रेत सीमेंट में नहीं चिपकती जिससे जिस भवन में इसका इस्तेमाल हो रहा है उसके गिरने का खतरा बना रहता है

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) भले ही माफिया (Mafia)पर नकेल कस रहे हो लेकिन बेखौफ माफिया अपना कारोबार कर रहा है। चौंकाने वाली बात ये है कि तमाम तरह के माफिया के बीच अब नकली रेत माफिया (Fake sand mafia) भी सक्रिय हो गया है। बताया जा रहा है कि नकली रेत को बड़े पैमाना पर सरकारी निर्माणों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

नकली दूध, नकली घी, नकली मावा, नकली सीमेंट आदि के लिए बदनाम ग्वालियर चंबल संभाग ( Gwalior Chambal Division) में अब नकली रेत माफिया भी सक्रिय हो गया है। ये रेत माफिया जमीन से मिट्टी और मुरम निकालकर उसे रेत की शक्ल दे रहे हैं और बड़े पैमाने पर इसे खपा रहे हैं। नकली रेत के बढ़ते कारोबार का असर अब असली रेत का वैध कारोबार करने वाले ठेकेदारों पर हो रहा है। अंचल के बड़े रेत कारोबारी आशुतोष माहेश्वरी ने एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि ग्वालियर के घाटीगांव क्षेत्र में चैत, जखा सहित आसपास के अन्य गांव में मिट्टी और मुरम से नकली रेत बनाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि नकली रेत का इस्तेमाल अधिकांश सरकारी इमारतों के निर्माण में किया जा रहा है। जो उस बिल्डिंग के लिए खतरा है क्योंकि नकली रेत के प्रयोग के कारण ये मजबूत नहीं हो सकती और कभी भी गिर सकती है। आशुतोष माहेश्वरी ने कहा कि नकली रेत माफिया का असर उन जैसे वैध रेत कारोबारियों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत उन्होंने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से की है।

उधर लोक निर्माण विभाग यानि PWD के कार्यपालन यंत्री राष्ट्रीय राजमार्ग ज्ञान वर्धन मिश्रा से जब एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ ने नकली रेत के बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि उन्होंने भी इसके बारे में सुना है। कुछ लोग मिट्टी और मुरम से नकली रेत बना रहे हैं। श्री मिश्रा ने कहा कि नकली रेत सीमेंट में नहीं चिपकती जिससे जिस भवन में इसका इस्तेमाल हो रहा है उसके गिरने का खतरा बना रहता है। कार्यपालन यंत्री ने कहा कि ग्वालियर अंचल में सिंध और चंबल की रेत का इस्तेमाल होता है। सिंध नदी की रेत सीमेंट कांक्रिट भवनों के निर्माण में और चंबल नदी की रेत भवनों के प्लास्टर में प्रयोग की जाती है। उन्होंने बताया कि मिट्टी या मुरम से बनाई जाने वाली नकली रेत सीमेंट के साथ चिपकती नहीं है इसलिए इसका इस्तेमाल खतरनाक है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी इमारतों खा निर्माण में नकली रेत का इस्तेमाल नही किया जाता।

बहरहाल ये बहुत चिंता की बात है कि नकली रेत बनाने में सक्रिय हुआ माफिया यदि सांठगांठ कर इसे सरकारी निर्माणों या निजी निर्माणों में खपा रहा है तो निश्चित ही उन भवनों की उम्र कम होगी और वे कभी भी गिर सकते हैं जो बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। हालांकि अभी ये साफ तौर पर पता नहीं चल पाया है कि नकली रेत माफिया कितने वर्षों से सक्रिय है फिर भी इस पर नकेल कसने की जरूरत है।